
अस्पताल पहुंचने वाली पांच प्रतिशत गर्भवतियां डायबिटीज की शिकार
संक्षेप: :: विश्व डायबिटीज डे पर विशेष :: - एसकेएमसीएच में आने वाली गर्भवतियों की
:: विश्व डायबिटीज डे पर विशेष :: - एसकेएमसीएच में आने वाली गर्भवतियों की रिपोर्ट से हुआ खुलासा - शहरी क्षेत्र से आने वाली महिलाओं में डायबिटीज का प्रकोप अधिक मुजफ्फरपुर, प्रमुख संवाददाता। गर्भावस्था के समय अस्पताल पहुंचने वाली पांच प्रतिशत महिलाएं डायबिटिज की शिकार मिल रही हैं। श्रीकृष्ण मेडिकल कॉलेज और सदर अस्पताल में आने वाली महिलाओं की केस स्टडी से इसका खुलासा हुआ है। श्रीकृष्ण मेडिकल कॉलेज में स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. विभा वर्मा ने बताया कि देर से गर्भधारण करने और जेनेटिक कारणों से महिलाओं में डायबिटिज होता है। डॉ. वर्मा ने बताया कि डायबिटिज के समय खान पान गड़बड़ी के कारण यह बीमारी हो रही है।

शहरी क्षेत्र की गर्भवतियों में यह मामले अधिक सामने आ रहे हैं। सदर अस्पताल में स्त्री व प्रसूती रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रेरणा का कहना है कि ओपीडी में इलाज कराने और जांच के दौरान गर्भवती महिलाओं में डायबिटिज का पता चलता है। ऐसे मरीजों को प्रसव के समय शुगर नियंत्रित करना पड़ता है। शुगर पीड़ित मां से बच्चे को बीमारी का खतरा डॉ. विभा वर्मा ने बताया कि शुगर पीड़ित मां से नवजात को डायबिटिज का खतरा रहता है। शुगर पीड़ित मां से नवजात को मोटापा, रीढ की हड्डी में छेद और आगे चल कर शुगर का खतरा रहता है। अगर महिला में बहुत ज्यादा डायबिटिजि तो नवजात का वजन काफी बढ़ सकता है। ऐसे में बच्चेदानी के भी फटने का खतरा रहता है। डॉ. वर्मा ने बताया गर्भावस्था में लगातार डायबिटिज की जांच करानी चाहिए। उन्होंने एक केस का जिक्र करते हुए बताया कि एक महिला का शुगर काफी बढ़ गया था, जिससे उसकी किडनी पर असर पड़ गया। महिला की डायलिसिस करानी पड़ी। सूबे में शुगर के मरीजों की नहीं हो रही री-स्क्रीनिंग सूबे में शुगर के मरीजों की री-स्क्रीनिंग नहीं हो रही है। स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा में यह बात सामने आया है। अब तक पूरे राज्य में सिर्फ नौ प्रतिशत शुगर के मरीजों की ही री-स्क्रीनिंग हुई है। मुजफ्फरपुर में भी नौ प्रतिशत शुगर मरीजों की ही रीस्क्रीनिंग हुई है। रीस्क्रीनिंग का मतलब है कि एक बार अगर किसी मरीज को जांच में डायबिटिज की बीमारी का पता चल गया तो फिर से उसकी जांच की जायेगी और उसकी रिपोर्ट तैयार की जायेगी। शुगर मरीजों का फॉलोअप शत-प्रतिशत नहीं सूबे के सरकारी अस्पतालों में बीपी और शुगर से ग्रस्त सिर्फ 12 प्रतिशत मरीजों का ही फॉलोअप किया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा में यह बात सामने आई है। अस्पतालों में हर दिन बीपी और शुगर के मरीजों का फॉलोअप लिया जाना है। बीपी और शुगर की फॉलोअप नहीं होने से स्वास्थ्य विभाग ने कई जिलों को रेड जोन में रखा है। मुजफ्फरपुर में आठ प्रतिशत बीपी और 10 प्रतिशत शुगर के मरीजों का फॉलोअप किया जा रहा है।

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