आवारा कुत्ते का थर्ड डिग्री टॉर्चर, इम्यूनोग्लोबिन की खपत 20 फीसदी बढ़ी

Dec 19, 2025 06:03 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, मुजफ्फरपुर
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मुजफ्फरपुर में आवारा कुत्तों के हमले से डॉग बाइट के मामले बढ़ गए हैं। एसकेएमसीएच में इम्यूनोग्लोबिन की खपत 20% बढ़ी है। मधुबनी और अन्य जिलों से मरीज आ रहे हैं, जबकि सरकारी अस्पतालों में दवा की कमी है। गंभीर मामलों में प्लास्टिक सर्जरी की आवश्यकता भी हो रही है।

आवारा कुत्ते का थर्ड डिग्री टॉर्चर, इम्यूनोग्लोबिन की खपत 20 फीसदी बढ़ी

मुजफ्फरपुर, प्रमुख संवाददाता। सड़कों पर घूमने वाले आवारा कुत्ते लोगों को ‘थर्ड डिग्री टार्चर’ दे रहे हैं। कुत्तों के काटने से इस स्तर वाले मरीजों की संख्या काफी बढ़ गई है। श्रीकृष्ण मेडिकल कॉलेज व अस्पताल (एसकेएमसीएच) के आंकड़ों के मुताबिक ऐसे खतरनाक डॉग बाइट के मामले से इम्यूनोग्लोबिन दवा की खपत एक साल में 20 प्रतिशत तक बढ़ गई है। कुत्ते के काटने से गंभीर जख्म होने पर एंटी रैबीज दवा के साथ इम्यूनोग्लोबिन दी जाती है। एक महीने में औसतन 400 इम्यूनोग्लोबिन वाले डॉग बाइट के केस आ रहे हैं। मेडिकल साइंस में डॉग बाइक को तीन ग्रेड में बांटा गया है।

पहले ग्रेड में दवा देने की जरूरत नहीं होती, दूसरे में एंटी रैबीज दी जाती है और तीसरी ग्रेड में इम्यूनोग्लोबिन दिया जाता है। उत्तर बिहार के सभी जिलों से पहुंच रहे मरीज आवारा कुत्तों के शिकार मुजफ्फरपुर के अलावा उत्तर बिहार के सभी जिलों के लोग हो रहे हैं। इम्यूनोग्लोबिन का इंजेक्शन लेने के लिए मधुबनी, मोतिहारी, सीतामढ़ी, वैशाली जिले से मरीज पहुंच रहे हैं। बाजार में इम्यूनोग्लोबिन इंजेक्शन की कीमत 12 से 15 हजार रुपये होती है। सरकारी अस्पतालों में यह दवा मुफ्त में दी जाती है। एसकेएमसीएच के अलावा सदर अस्पताल में ही यह इंजेक्शन दिया जाता है। अस्पतालों में इम्यूनोग्लोबिन रखना अनिवार्य, पर मेडिकल में दवा खत्म कुत्तों के गंभीर रूप से काटने पर दी जाने वाली दवा इम्यूनोग्लोबिन सभी अस्पतालों में रखना स्वास्थ्य विभाग ने अनिवार्य किया है। लेकिन एसकेएमसीएच में इम्यूनोग्लोबिन खत्म हो गई है। दवा के लिए स्वास्थ्य विभाग को पत्र खा गया है। मुजफ्फरपुर जिले में इम्यूनोग्लोबिन दवा सदर अस्पताल में भी नहीं है। गंभीर मरीज निजी अस्पतालों में जा रहे हैं। खूंखार हुए आवारा कुत्ते, हाथ-पैर का मांस नोचकर कर देते अलग एसकेएमसीएच में आने वाले इम्यूनोग्लोबिन वैक्सीन के मरीजों के हाथ और पैर के मांस नोचे मिल रहे हैं। इतना ही नहीं गर्दन का मांस भी नोच ले रहे हैं। एसकेएमसीएच स्थित सुपर स्पेशियलिटी के प्लास्टिक सर्जरी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. राधा रमण ने बताया कि कुत्ते के काटने से घायल मरीजों की प्लास्टिक सर्जरी भी करनी पड़ रही है। कोट:: कुत्ता काटने के बाद सात दिन के भीतर इम्यूनोग्लोबिन इंजेक्शन दिया जाना होता है, लेकिन कई लोग सात दिन के बाद अस्पताल पहुंच रहे हैं। गंभीर रूप से घायल मरीजों को तुरंत अस्पताल पहुंचना जरूरी है। - डॉ. राम बाबू प्रसाद, पीएसएम विभाग, एसकेएमसीएच

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