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पताही हवाई अड्डा के ओएलएस सर्वे पर खर्च होंगे 2.90 करोड़ रुपये

पताही हवाई अड्डा के ओएलएस सर्वे पर खर्च होंगे 2.90 करोड़ रुपये

संक्षेप:

पताही हवाई अड्डे के पुनर्जीवित कार्य के लिए राज्य के बजट में 2.90 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इससे हवाई अड्डे से जल्द ही विमान सेवा शुरू होने की उम्मीद है। यह सर्वेक्षण भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण नई दिल्ली द्वारा किया जाएगा और इसे उड़ान योजना के तहत पुनर्जीवित किया जा रहा है।

Feb 04, 2026 01:50 am ISTNewswrap हिन्दुस्तान, मुजफ्फरपुर
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मुजफ्फरपुर, हिन्दुस्तान प्रतिनिधि। पताही हवाई अड्डा के पुनर्जीवित कार्य को राज्य के बजट में गति देने का प्रयास किया गया है। इससे जल्द ही इस हवाई अड्डे से विमान सेवा शुरू होने की उम्मीद जगी है। हवाई अड्डे का भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण नई दिल्ली से ओएलएस (बाधा रहित सतह) सर्वेक्षण होना है। इसके लिए राज्य के बजट में 2.90 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। यह राशि भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण नई दिल्ली को सर्वेक्षण के लिए भुगतान की जाएगी। उड़ान योजना के तहत हो रहा काम: उड़ान योजना से पताही हवाई अड्डा को 37 वर्षों के बाद पुनर्जीवित किया जा रहा है।

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इसे 2018 में उड़ान योजना से जोड़ा गया था। इसके बाद 2019 के लोस चुनाव के दौरान चुनावी सभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पताही से विमान सेवा शुरू करने की घोषणा की थी। पिछले वर्ष हवाई अड्डा परिसर व चहारदीवारी के पुनरुद्धार के लिए राज्य सरकार ने 25 करोड़ रुपये आवंटित किया था। इससे चहारदीवारी निर्माण का कार्य अंतिम चरण में है। रनवे का निर्माण 40 करोड़ से होना है। इसकी टेंडर की प्रक्रिया चल रही है। प्री-फैब स्टील स्ट्रक्चर का उपयोग कर इसे जल्द चालू करने का लक्ष्य है। एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया के साथ 15 वर्षों का समझौता किया गया है। इसकी तकनीकी टीम ने रनवे का सर्वे पूरा कर लिया है। रनवे के लिए 101 एकड़ जमीन का उपयोग किया जाएगा। टीम ने छोटे विमानों के लिए इसके रनवे को उपयुक्त माना है। यहां एविएशन ट्रेनिंग अकादमी और एक वीआईपी लाउंज विकसित करने की योजना है। क्या है ओएलएस सर्वेक्षण : ओएलएस (बाधा रहित सतह) एक तकनीकी सर्वेक्षण है। यह सर्वेक्षण हवाई अड्डा व उसके आसपास विमानों की आवाजाही में आने वाली बाधाओं को ध्यान में रख कर किया जाता है। विमानों की आवाजाही में सुरक्षा के दृष्टिकोण से यह सर्वेक्षण काफी महत्वपूर्ण होता है। इस सर्वेक्षण में यह देखा जाता है कि हवाई अड्डे पर विमानों के उतरने व उड़ान भरने में कोई बाधा तो नहीं है। इस तरह की बाधा नहीं होने पर ही हवाई अड्डा से विमान सेवा शुरू करने की अनुशंसा की जाती है।