
भक्तिकाल के सांस्कृतिक अवदान पर व्याख्यान
मुजफ्फरपुर में हिंदी विभाग द्वारा आयोजित पुनश्चर्या पाठ्यक्रम के दूसरे दिन चार व्याख्यान हुए। डॉ. अंजनी कुमार श्रीवास्तव ने भक्तिकाल के सांस्कृतिक अवदान और भारतीय नवजागरण पर व्याख्यान दिए। प्रो....
मुजफ्फरपुर। यूजीसी-एमएमटीटीसी और विश्वविद्यालय हिंदी विभाग के संयुक्त तत्वावधान में चल रहे पुनश्चर्या पाठ्यक्रम के दूसरे दिन शुक्रवार को हिंदी विभाग के सरस्वती सभागार में चार व्याख्यान हुए। दो सत्रों में विभाजित इस आयोजन के प्रथम सत्र के दो व्याख्यान महात्मा गांधी उत्तर बिहार केंद्रीय विश्वविद्यालय, मोतिहारी के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. अंजनी कुमार श्रीवास्तव ने दिए। उनके व्याख्यानों के विषय थे-'भक्तिकाल के सांस्कृतिक अवदान' एवं 'भक्तिकाल और भारतीय नवजागरण'। दूसरे सत्र में ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के पूर्व हिंदी विभागाध्यक्ष तथा मानविकी संकायाध्यक्ष प्रो. चंद्रभानु प्रसाद सिंह का व्याख्यान हुआ। उन्होंने 'भारतीय साहित्य : अवधारणा और आयाम' विषय पर बोलते हुए कहा कि अनेकता में एकता और विविधता में सामंजस्य के तत्व भारतीय साहित्य के मूल आधार हैं।

उसमें रूप और अंतर्वस्तु के स्तर पर अद्भुत एकता है। यही एकता भारतीय साहित्य का प्राण है। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय हिंदी विभाग की अध्यक्ष प्रो. सुधा कुमारी, पुनश्चर्या पाठ्यक्रम के समन्वयक प्रो. प्रमोद कुमार, वरिष्ठ प्राध्यापिका प्रो. कुमारी आशा, यूजीसी-एमएमटीटीसी के उप-निदेशक डॉ. राजेश्वर कुमार सहित विभिन्न महाविद्यालयों एवं विश्वविद्यालयों के चार दर्जन प्रतिभागी उपस्थित रहे।

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