
बंपर वोटिंग के पीछे बदलाव या विकास की चाहत, राजनीतिक दल कर रहे चिंतन
मुजफ्फरपुर में विधानसभा चुनाव के पहले चरण में 121 सीटों पर मतदान हुआ, जिसमें मुजफ्फरपुर जिले का मतदान प्रतिशत 71.98% रहा। महिलाओं ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जहां लगभग 77% महिलाएं और 68% पुरुष मतदाताओं ने वोट डाला। यह पिछले चुनावों की तुलना में एक बंपर वृद्धि है, जो विकास कार्यों और महिला कल्याण योजनाओं का परिणाम है।
मुजफ्फरपुर, अजय कुमार पांडेय। प्रदेश में हो रहे विधानसभा चुनावों के लिए पहले चरण में 121 सीटों पर मतदान हो चुका है। इनमें मुजफ्फरपुर जिले की 11 विधानसभा सीटें भी शामिल हैं। इस बार की वोटिंग पिछले कई चुनावों से काफी अलग रही। एक तरफ राज्य के चुनावी इतिहास में सबसे अधिक वोटिंग का रिकॉर्ड बना तो दूसरी तरफ प्रदेश भर में मुजफ्फरपुर 71.98 प्रतिशत मतदान के साथ सिरमौर बना। मतदान प्रतिशत में हुई इस बंपर वृद्धि के पीछे महिलाओं ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। करीब 77 फीसदी महिला तो 68 फीसदी पुरुष मतदाताओं ने अपने मताधिकारी का प्रयोग किया। मतदान में वोटर्स के उत्साह ने चुनाव आयोग को गदगद तो किया ही है, राजनीतिक विश्लेषक भी इस तरह का मतदान देख अचंभे में हैं।
मतदान को लेकर उनके सभी गणित के विपरीत नतीजों ने उन्हें नए सिरे से सोचने पर विवश कर दिया है। वहीं, सभी दल इसे अपने लिए वरदान बता रहे हैं। जिले में पिछले 35 वर्षों में दूसरी बार 70 प्रतिशत से अधिक वोटिंग को कुछ राजनीतिक विश्लेषक बदलाव का बयार मान रहे हैं तो कुछ 2005 के बाद से जिले में लगातार बढ़ रहे मतदान के आंकड़ों को आधार बना इसका श्रेय विकास कार्यों को देते हैं। विश्लेषक महंथ राजीव रंजन दास कहते हैं कि गत 35 वर्षों में 60 प्रतिशत से कम मतदान महज दो बार 2005 और 2010 में ही दर्ज किए गए। उसके पहले 1990 में जिले में 70 प्रतिशत से अधिक मतदान हुआ था, जिसे कांग्रेस को सत्ता से बेदखल करने के चुनाव के तौर पर जाना जाता है। उस साल कांग्रेस को जिले में 11 सीटों में केवल एक सीट हाथ लगी। लोगों ने भ्रष्टाचार से परेशान होकर कांग्रेस के विरोध में मतदान किया था। वर्ष 2005 में कम मतदान प्रतिशत पर कहा कि लोग 2000 के चुनावों में हुई हिंसा से डरे हुए थे। लेकिन, सत्ता परिवर्तन उस समय भी हुआ और हालात बदलने के साथ लोग बूथों पर वापस आने लगे। वे कहते हैं कि 2010 में 54.06, 2015 में 61.37 और 2020 में 60.72 प्रतिशत मतदान हुआ था। इस बढ़ोतरी का कारण नीतीश कुमार की सुशासन वाली छवि है, जो लगातार प्रदेश में विकास कार्यों को गति दे रही है। वहीं, राजनीति के जानकार डॉ. हरेन्द्र कुमार कहते हैं कि इस बार कल्पना से परे मतदान होने का कारण प्रदेश सरकार द्वारा महिला कल्याण के लिए उठाए गए उपाय हैं। चुनाव से ठीक पहले महिलाओं को कई तरह से आर्थिक मदद देने का असर मतदान प्रतिशत पर पड़ा। इसकी पुष्टि जिले में 76.81 प्रतिशत महिलाओं द्वारा मतदान किए जाने से होती दिख रही है। उधर, इन दोनों के दावों के विपरीत मानवाधिकारी कार्यकर्ता शाहिद कमाल कहते हैं कि प्रवासी मजदूरों ने बड़ी संख्या में मतदान किया। इसमें महिला और पुरुष मतदाता दोनों शामिल रहे। इनमें अधिकतर मतदाता प्रदेश में रोजी रोजगार उपलब्ध कराए जाने के नारों के कारण ही बूथों तक पहुंचे। इन मतदाताओं ने प्रदेश में बदलाव की चाहत लिए अपने मताधिकारी का उपयोग किया। प्रमुख दलों के अपने-अपने दावे : बंपर मतदान पर प्रमुख राजनीतिक दलों के अपने-अपने दावे हैं। राजद जिलाध्यक्ष रमेश गुप्ता और कांग्रेस जिलाध्यक्ष अरविन्द कुमार मुकुल का मानना था कि संकल्प पत्र में किए गए घोषणाओं से मतदाता उत्साहित थे और वे सरकार बदलने के लिए मतदान केंद्रों तक पहुंचे। वहीं, भाजपा पूर्वी के जिलाध्यक्ष विवेक कुमार, पश्चिमी जिलाध्यक्ष हरिमोहन चौधरी और जदयू जिलाध्यक्ष रामबाबू सिंह कुशवाहा ने कहा कि महिलाओं की वजह से मतदान की दर में वृद्धि हुई। उन्होंने सरकार की योजनाओं से प्रभावित होकर उसे बनाए रखने के पक्ष में वोटिंग की।

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