
अस्पतालों में एंटी रैबीज और इम्यूनिग्लोबिन की आपूर्ति ठप
मुजफ्फरपुर के अस्पतालों में एंटी रैबीज और इम्युनोग्लोबिन की आपूर्ति बंद है, जिससे मरीज बिना इलाज लौट रहे हैं। सदर अस्पताल में एंटी रैबिज की दवा खत्म हो गई। मरीजों को निजी अस्पतालों में महंगी कीमत चुकानी पड़ रही है। स्वास्थ्य विभाग ने बताया कि दवा की कमी पटना से आपूर्ति न होने के कारण है।
मुजफ्फरपुर, प्रमुख संवाददाता। राज्य के अस्पतालों में एंटी रैबीज और कुत्ता काटने के गंभीर मरीजों को दिए जाने वाले टीका इम्युनोग्लोबिन की आपूर्ति बंद है। श्रीकृष्ण मेडिकल कॉलेज अस्पताल और सदर अस्पताल में भी इम्यूनोग्लोबिन नहीं है। इससे हर दिन मरीज लौट रहे हैं। बताते हैं कि बाजार में इम्यूनोग्लोबिन लगाने पर 10 से 15 हजार तक खर्च करना पड़ता है। इम्यूनोग्लोबिन की दवा मरीज के वजन के आधार पर दी जाती है। 50 किलो के व्यक्ति को इम्यूनोग्लोबिन दवा देने में 14 हजार का खर्च आएगा। सदर अस्पताल में शुक्रवार को एंटी रैबिज की दवा भी खत्म हो गई। दवा खत्म होने से कई मरीज बिना दवा लगाए लौट गए।
उधर, एसकेएमसीएच के पीएसएम विभाग के डॉ रामबाबू प्रसाद ने बताया कि शुक्रवार को 143 लोग एंटी रैबिज का इंजेक्शन लेने आए। उन्होंने बताया कि एसकेएमसीएच में इम्यूनोग्लोबिन नहीं है। एंटी रैबिज की दवा अभी उपलब्ध है। इधर, सदर अस्पताल में दवा नहीं रहने से लोग एसकेएमसीएच और निजी अस्पताल चले गए। निजी अस्पताल में एंटी रैबिज वैक्सीन की कीमत 400 रुपये है। सूत्रों ने बताया कि मुजफ्फरपुर सहित कई जिलों के केंद्रीय दवा स्टोर में एंटी रैबिज नहीं है। पटना से आपूर्ति नहीं होने से दवा खत्म हो गई है। इसके अलावा इम्यूनोग्लोबिन खरीदने का टेंडर ही बीएमएसआईसीएल ने नहीं किया, जिससे इसकी आपूर्ति नहीं हो रही है। स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक मुजफ्फरपुर जिले में वर्ष 2025 में 16 हजार लोगों को एंटी रैबिज का इंजेक्शन दिया गया था। सदर अस्पताल में हर दिन 60 से 70 लोग एंटी रैबिज का इंजेक्शन लेने आते हैं।

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