Hindi NewsBihar NewsMuzaffarpur NewsPregnant Women Prefer Private Hospitals Despite Government Checkups Health Department Reports
जांच सरकारी में, प्रसव के लिए निजी अस्पताल

जांच सरकारी में, प्रसव के लिए निजी अस्पताल

संक्षेप: मुजफ्फरपुर में गर्भवती महिलाएं सरकारी अस्पतालों में जांच कराने के बाद निजी अस्पतालों में प्रसव करवा रही हैं। जुलाई में 99 प्रतिशत गर्भवती महिलाओं ने सरकारी अस्पतालों में जांच कराई, लेकिन प्रसव केवल 39...

Sun, 31 Aug 2025 06:18 PMNewswrap हिन्दुस्तान, मुजफ्फरपुर
share Share
Follow Us on

मुजफ्फरपुर, प्रमुख संवाददाता। गर्भवती महिलाएं सरकारी अस्पतालों में जांच कराने के बाद प्रसव कराने निजी अस्पताल में पहुंच जा रही हैं। स्वास्थ्य विभाग अपनी रिपोर्ट में इसका खुलासा कर रहा है। बीते जुलाई महीने में सरकारी अस्पतालों में 99 प्रतिशत गर्भवती महिलाओं ने प्रसव पूर्व जांच कराई, लेकिन सरकारी अस्पतालों में प्रसव सिर्फ 39 प्रतिशत ही हुए। ज्यादातर प्रसव निजी अस्पतालों में हुए। जिले के सरकारी अस्पतालों में 50 प्रतिशत भी संस्थागत प्रसव इस वर्ष अब तक नहीं हुए हैं। अप्रैल से जुलाई तक का संस्थागत प्रसव का आंकड़ा सिर्फ 30 प्रतिशत है। इस अवधि में सरकारी अस्पतालों में 95 प्रतिशत गर्भवती महिलाओं ने प्रसव पूर्व जांच कराई।

LiveHindustan को अपना पसंदीदा Google न्यूज़ सोर्स बनाएं – यहां क्लिक करें।

हद तो यह है कि कई पीएचसी ने प्रसव पूर्व जांच लक्ष्य से ज्यादा कर दिए गए, लेकिन उनके यहां प्रसव के लिए गर्भवती महिलाएं नहीं पहुंची। सदर अस्पताल में जुलाई महीने में 135 प्रतिशत गर्भवती महिलाओं की जांच हुई, लेकिन प्रसव सिर्फ 26 प्रतिशत ही हुए। क्षेत्रीय अपर निदेशक स्वास्थ्य डॉ. सरिता शंकर का कहना है कि सभी जिलों को संस्थागत प्रसव बढ़ाने का निर्देश दिया गया है। पीएचसी से मेडिकल तक दलाल ‘उठा रहे मरीजों को सूत्रों ने बताया कि पीएचसी से मेडिकल कॉलेज तक गर्भवतियों को निजी अस्पतालों के सक्रिय दलाल उठा ले जा रहे हैं। इसमें स्वास्थ्य विभाग के कर्मियों भी मिलीभगत की आशंका है। मेडिकल कॉलेज में गर्भवती के आते ही वहां मौजूद दलाल उन्हें बरगलाने लगते हैं और झांसा देकर पास के निजी अस्पताल लेकर चले जाते हैं। एसकेएमसीएच में इस तरह के मामले सामने आ चुके हैं। तीन प्रतिशत प्रसव हुए घर में, अस्पताल नहीं लाई गईं गर्भवतियां जिले में जुलाई महीने में तीन प्रतिशत प्रसव घर में हुए हैं। इनमें भी पांच प्रतिशत प्रसव डॉक्टर और नर्स ने कराया और तीन प्रतिशत प्रसव दाइयों ने कराए। मुजफ्फरपुर में ज्यादातर प्रसव निजी अस्पतालों में हुए। गर्भवतियों को घर से सरकारी अस्पताल लाने की जिम्मेदारी आशा कार्यकर्ताओं की होती है। वहीं, आशा कार्यकर्ताओं का कहना है कि सरकारी अस्पताल की लेटलतीफी के कारण गर्भवतियां निजी अस्पताल चली जाती हैं। अस्पतालों में संसधान नहीं, सदर में शाम के बाद नहीं होती कोई जांच डॉक्टरों का कहना है कि सरकारी अस्पतालों में संसाधान नहीं है। सदर अस्पताल में शाम के बाद अगर को सामान्य प्रसव का भी केस आता है तो उसे कराने में परेशानी होती है। इसका कारण यह है कि शाम में सदर अस्पताल में पैथोलॉजी की सुविधा नहीं है। सामान्य प्रसव में भी गर्भवतियों की हीमोग्लोबिन की जांच करानी जरूरी होती है। कई बार कोई गंभीर केस आता है तो उसे रेफर करना पड़ता है। अगर कोई पोस्ट पार्टम की मरीज आ गई तो उसके लिए जरूरी दवाएं भी नहीं मिल पाती हैं।