चिटफंड कंपनी का तीन मंजिला दफ्तर सील, 1000 से ज्यादा नेपालियों से ठगी का खुलासा
मुजफ्फरपुर में पुलिस ने चिटफंड कंपनी के तीन मंजिला दफ्तर को सील कर दिया। यहां एक हजार से अधिक नेपाली नागरिकों को नौकरी दिलाने का झांसा देकर ठगी की जा रही थी। पुलिस ने ठगी के कागजात और कई अन्य सामान जब्त किए हैं। स्थानीय कंपनी के संचालकों की तलाश जारी है।

मुजफ्फरपुर के अहियापुर थाना के दारोगा पिंटू कुमार ने पुलिस टीम और मजिस्ट्रेट के साथ मंगलवार को बैरिया स्थित चिटफंड कंपनी के तीन मंजिले दफ्तर को सील कर दिया। सील किया गया मकान स्थानीय संतोष कुमार का बताया गया है। तीनों मंजिल के कमरों से पुलिस को ठगी मामले के कागजाती साक्ष्य मिले हैं। एक हजार से अधिक नेपाली नागरिकों को इस मकान में नौकरी दिलाने के नाम पर लाकर ट्रेनिंग दी गई थी। नेपाल में कंपनी के एजेंट 25 हजार नेपाली रुपये लेते थे। बैरिया में पहुंचने के बाद सवा लाख भारतीय रुपये लिए जाते थे। पुलिस ने मकान से एक हजार से अधिक युवकों का भरा गया फॉर्म, रुपये वसली के रशीद, डायरी आदि जब्त किया है।
पुलिस की तलाशी के बाद डीएम ने मकान के मुख्य दरवाजे के ग्रील में ताला लगाकर उसे सील कर दिया। अब कोर्ट के आदेश से ही मैजिस्ट्रेट की मौजूदगी में यह सील खुलेगा। जिस मकान को सील किया गया है उस पर ‘रिवाइव स्किल डेवलपमेंट एंड ट्रेनिंग एलएलपी’ का बोर्ड लगा था। पुलिस ने कंपनी का एक बोर्ड भी जब्त किया है। पुलिस ने स्थानीय कंपनी के संचालक संतोष और राहुल की तलाश में छापेमारी की। कोल्हुआ स्थित राहुल के मकान की तलाशी ली गई। वहां से पुलिस को कागजाती साक्ष्य नहीं मिले है।
मौके पर मौजूद पीड़ित अनिल बहादुर थापा ने पुलिस को बताया कि उससे भी 25 हजार रुपये नेपाली रुपये लिए गए थे। ट्रेनिंग दिया जा रहा था। अब सवा लाख भारतीय रुपये की मांग की जा रही थी। उसने पुलिस को बताया है कि राहुल के मकान में मेस चलता था। जहां ट्रेनिंग पाने वाले नेपाली युवकों को खाना खिलाने के लिए ले जाया जाता था। पुलिस को आशंका है कि ये लोग नेपाल से तस्करी का माल भी मंगवाते थे। इसको लेकर भी स्थानीय लोगों ने कांड के आईओ दारोगा पिंटू कुमार को जानकारी दी है।
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