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कैसे मिले समय पर फरियादी को इंसाफ

कैसे मिले समय पर फरियादी को इंसाफ

संक्षेप:

मुजफ्फरपुर में नए कानून के तहत पीड़ितों को समय पर इंसाफ दिलाने पर जोर दिया गया है, लेकिन 300 दिन बाद भी 5445 मामलों में पुलिस रिपोर्ट न्यायालय में नहीं पहुंची है। एसएसपी ने सभी थानेदारों और अधिकारियों...

Sep 05, 2025 04:30 am ISTNewswrap हिन्दुस्तान, मुजफ्फरपुर
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मुजफ्फरपुर, प्रमुख संवाददाता। नए कानून में पीड़ितों को समय पर इंसाफ दिलाने पर विशेष जोर दिया गया है। इसके लिए कानून में मामलों में कार्रवाई व जांच के लिए समय सीमा तय की गई है। लेकिन, स्थिति यह है कि 300 दिन बाद भी पांच हजार से अधिक मामलों में पुलिस रिपोर्ट न्यायालय नहीं पहुंची है। इस पर नाराजगी जाहिर करते हुए एसएसपी से कहा गया है कि 5445 मामलों में शीघ्र हर पुलिस रिपोर्ट न्यायालय में पेश करें। न्यायालय में लंबित केंसों को लेकर एसएसपी से रिपोर्ट मांगी गई थी। पूछा गया था कि केस दर्ज होने के बाद 300 दिन के अंदर कितने मामलों में पुलिस रिपोर्ट दाखिल कर दी गई।

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एसएसपी ने रिपोर्ट दिया कि लंबित चल रहे कुल 40,098 मामलों में 34,653 में पुलिस रिपोर्ट न्यायालय में जमा कराई जा चुकी है। 5445 मामले पुलिस की जांच के अधीन है। एसएसपी ने प्रत्येक थानेदार, इंस्पेक्टर और डीएसपी को इस मामले में शीघ्र पुलिस रिपोर्ट न्यायालय में दाखिल कराने का निर्देश दिया है। समय पर जांच व कार्रवाई नहीं होने पर इसका मामले के न्यायिक प्रक्रिया पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। तय अवधि में निष्पादन के लिए केस किए जा रहे सत्य सूत्रहीन समय से जांच पूरी नहीं कर पा रही पुलिस बड़े पैमाने पर न्यायालय में फाइनल रिपोर्ट सत्य सूत्रहीन का दाखिल कर रही है। इसमें सबसे अधिक साइबर फ्रॉड के मामले हैं। सामान्य थानों में आने वाले शिकायतों में थानेदार आईटी एक्ट की धारा नहीं लगा रहे हैं। इसमें केवल चोरी की धारा 303 और ठगी की धारा 318 लगाई जा रही है। इसके कारण ऐसे मामलों की जांच 60 दिन के अंदर पूरी कर लेने का पुलिस पर दबाव रहता है। इस अवधि में पुलिस ठीक से बैंक खातों और मोबाइल कॉल तक की पड़ताल नहीं कर पाती है। ऐसी स्थिति में केस को सत्य सूत्रहीन बताकर न्यायालय में फाइनल रिपोर्ट दाखिल कर दी जा रही है। पुलिस की इस सतही जांच व कार्रवाई के कारण साइबर शातिर कानून की पकड़ में नहीं आ पा रहे हैं।