ट्रेंडिंग न्यूज़

अगला लेख

अगली खबर पढ़ने के लिए यहाँ टैप करें

Hindi News बिहार मुजफ्फरपुरकविता मनुष्यता की मातृभाषा : मदन कश्यप

कविता मनुष्यता की मातृभाषा : मदन कश्यप

रामदयालु सिंह महाविद्यालय स्नातकोत्तर हिंदी विभाग के तत्वावधान में सोमवार को संगोष्ठी हुई। मुख्य वक्ता साहित्यकार मदन कश्यप ने कहा कि कविता मनुष्यता...

कविता मनुष्यता की मातृभाषा : मदन कश्यप
हिन्दुस्तान टीम,मुजफ्फरपुरMon, 27 May 2024 08:45 PM
ऐप पर पढ़ें

मुजफ्फरपुर, वरीय संवाददाता।
रामदयालु सिंह महाविद्यालय स्नातकोत्तर हिंदी विभाग के तत्वावधान में सोमवार को संगोष्ठी हुई। मुख्य वक्ता साहित्यकार मदन कश्यप ने कहा कि कविता मनुष्यता की मातृभाषा है। कविता भाषा कौशल से ज्यादा अनुभव, कल्पना, आत्मलोचन, आत्मबोध और यातना से महान बनती है। कवि को यही मुख्य तत्व महान कवि बनाता है।

डॉ. नीलिमा झा, डॉ. नीरज मिश्रा एवं आशीष कुमारी कान्ता ने भी कविता के संवेदनशील तत्वों पर प्रकाश डाला। कवि को परिस्थिति और समाज के अनुसार संवेदनशील होना चाहिए। मनुष्यता की भावना से ओतप्रोत होना चाहिए। विभागाध्यक्ष डॉ. सत्येंद्र प्रसाद सिंह ने कविता रचना प्रक्रिया के विभिन्न आयामों पर प्रकाश डाला। अध्यक्षता करते हुए प्राचार्य डॉ. अनिता सिंह ने कहा कि कविता का महत्वपूर्ण तत्व संवेदना है। कवि का संवेदनशील होना जरूरी है तभी कविता बड़ी बनती है।

मौके पर डॉ. रमेश प्रसाद गुप्ता, डॉ. सत्येंद्र प्रसाद सिंह, डॉ. मनोज कुमार सिंह, डॉ. नीरज मिश्रा, डॉ. आशीष कांता, डॉ. नीलिमा झा, डॉ. संजय कुमार सुमन, डॉ. अनुपम कुमार, डॉ. राकेश कुमार सिंह, डॉ. सारिका चौरसिया आदि मौजूद थे। मंच संचालन डॉ. रमेश कुमार गुप्ता, स्वागत डॉ. सरोज पाठक एवं धन्यवाद ज्ञापन डॉ. मनोज कुमार सिंह ने किया।

यह हिन्दुस्तान अखबार की ऑटेमेटेड न्यूज फीड है, इसे लाइव हिन्दुस्तान की टीम ने संपादित नहीं किया है।