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सौ से अधिक हेपेटाइटिस-सी के मिले मरीज

हेपेटाइटिस-सी बीमारी तेजी से फैल रही है। दो सप्ताह में 70 से सौ मरीजों में इस बीमारी की पुष्टि हुई है। आरंभ में सरकारी व निजी अस्पतालों के डॉक्टर जॉन्डिस समझकर इसका इलाज कर रहे हैं। लेकिन, जब सभी की हेपेटाइटिस ए, बी व सी की जांच कराई जा रही है तो ‘सी बीमारी की पुष्टि हो रही है। एसकेएमसीएच में सबसे अधिक मरीज आ रहे हैं। हर रोज औसतन पांच मरीजों में इस बीमारी का लक्षण मिल रहे हैं। वायरस व इन्फेक्शन से फैलने वाली यह बीमारी कॉमन नहीं थी। लेकिन, पांच माह पूर्व मोतीपुर में इस बीमारी की पुष्टि होने के बाद केन्द्र सरकार के निर्देश पर एसकेएमसीएच में जांच की सुविधा बहाल की गई। एसकेएमसीएच के मेडिसीन विभाग के डॉक्टर हर संदिग्ध मरीजों में इसकी जांच करवा रहे हैं। विभाग के सहायक प्रोफेसर डॉ. अकील अहमद मुमताज ने बताया कि यह बीमारी बहुत कॉमन नहीं है। लेकिन, बीमारी के कुछ लक्षण ऐसे हैं जो बहुत दिनों तक दिखते हैं। इस कारण हेपेटाइटिस-सी मानकर इलाज कर लीवर सिरोसी जैसी बीमारी से बचाने का प्रयास किया जा रहा है। गरीब तबके के लोग भी इसकी चपेट में आ रहे हैं। इसका मुख्य कारण है उनका रहन-सहन है। यही नहीं, गांव में अभी भी क्वैक व झोला छाप डॉक्टर एक नीडल से कई मरीजों को इंजेक्शन देते हैं। किसी एक में भी यह बीमारी हुई तो नीडल के माध्यम से कई इससे पीड़ित हो जा रहे हैं। हेपेटाइटिस-सी का वायरस कई दिन के सूखे खून में भी सक्रिय रहता है। इस कारण यह बीमारी हो रही है। अगर यह ज्यादा दिनों तक रही तो लीवर कैंसर की संभावना बन जाती है। इधर, सीएस डॉ. ललिता सिंह ने सभी पीएचसी प्रभारियों को जॉन्डिस से पीड़ित मरीजों को सभी तरह के हेपेटाइटिस की जांच करवाने को कहा है। बीमारी होने का यह है कारण : एचसीवी नामक वायरस से संक्रमित किसी व्यक्ति का रक्त किसी दूसरे व्यक्ति के रक्तप्रवाह में चला जाए, तो हेपेटाइटिस-सी फैल सकती है। ऐसा आमतौर पर त्वचा के छिलने से अथवा नाक, मुंह या गुदा की आन्तरिक नर्म परत के छिलने से हो सकता है। हेपेटाइटिस-सी एक बहुत ही सशक्त विषाणु (वायरस) है और यह शरीर के बाहर भी कई दिनों तक जीवित रह सकता है। यहां तक कि सूखे संक्रमित रक्त से भी फैल सकता है।

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  • Web Title:Over 100 hepatitis C patients