नियमित रूप से लगे शिविर तो छात्रों में बढ़े नेतृत्व क्षमता
मुजफ्फरपुर में एनएसएस (राष्ट्रीय सेवा योजना) की गतिविधियां ठप हो गई हैं। छात्र स्वयंसेवकों ने बताया कि नियमित शिविरों का आयोजन नहीं होने से सेवा कार्य प्रभावित हो रहे हैं। कॉलेजों में एनएसएस मद में पैसे नहीं आ रहे हैं, जिससे कार्यक्रम आयोजित नहीं हो पा रहे हैं।

मुजफ्फरपुर। कॉलेज और विश्वविद्यालय स्तर पर विद्यार्थियों में सेवा और नेतृत्व क्षमता बढ़ाने के उद्देश्य से संचालित एनएसएस (राष्ट्रीय सेवा योजना) अपने मकसद से पीछे छूट गई है। नियमित शिविर नहीं लगने से इसकी गतिविधियां सुस्त पड़ गई हैं। राष्ट्रीय सेवा योजना से जुड़े स्वयंसेवकों ने बताया कि कैंप लगता तो समाज के लोगों के साथ मिलकर समाज के हित में कार्य करते। साक्षरता, पर्यावरण सुरक्षा, स्वास्थ्य व स्वच्छता कार्यों में अपनी भूमिका निभाते। आपदा के समय लोगों की मदद कर विद्यार्थी जीवन को समाजपयोगी कार्यों में समर्पित करते। लेकिन, न तो एनएसएस मद में पैसे आ रहे हैं और न शिविर लग रहे हैं।
पहले की तरह पोशाक मिलना भी बंद हो गया है। दूसरी ओर, एनसीसी की तरह कॅरियर आधारित नहीं होने के कारण इस महती योजना के प्रति विद्यार्थियों का रुझान अब घटने लगा है। बीआरएबीयू में एनएसएस (राष्ट्रीय सेवा योजना) के 4200 विद्यार्थियों के लिए कई वर्षों से शिविर का आयोजन नहीं हो रहा है। यह कैंप विश्वविद्यालय और कॉलेजों में आयोजित किया जाता है। एनएसएस से जुड़े छात्र-छात्राओं का कहना है कि शिविर नहीं लगने से एनएसएस में शामिल होने का उद्देश्य पूरा नहीं हो पा रहा है। एनएसएस कैंप लगाने के लिए सरकार की तरफ से कई वर्षों से पैसे भी नहीं भेजे जा रहे हैं। बताया कि हर कॉलेज में 100 छात्रों की एनएसएस इकाई होती है। विश्वविद्यालय और कॉलेज दोनों को नियमित तौर पर एनएसएस कैंप आयोजित कराना चाहिए। एनएसएस के अधिकारियों को इस ओर ध्यान देना चाहिए। ललित नारायण तिरहुत कॉलेज के एनएसएस वालंटियर ने बताया कि स्नातक में दाखिले के समय इस मद में 50 रुपये लिये जाते हैं। इसमें 30 रुपया कॉलेज का हिस्सा होता है और 20 रुपया विश्वविद्यालय का।
बीआरएबीयू में हर साल करीब डेढ़ लाख विद्यार्थी स्नातक में नामांकन लेते हैं। इस हिसाब से कॉलेजों में एनएसएस के मद में 75 लाख रुपये जमा होते हैं। इसमें 45 लाख रुपये कॉलेज में रहते हैं और 30 लाख रुपये विवि को भेजे जाते हैं। बीआरएबीयू के सभी 42 अंगीभूत कॉलेजों में एनएसएस का गठन किया गया है। हालांकि छात्रों की पीड़ा है कि जिस काम के लिए उन्होंने एनएसएस ज्वाइन किया, वह काम ही नहीं हो रहा है। लंबे समय से कॉलेजों और विश्वविद्यालय में एनएसएस कैंप का आयोजन नहीं किया गया है। कैंप नहीं लगने से वह समाजसेवा का काम नहीं कर पा रहे हैं और एनएसएस के बारे में पूरी जानकारी भी नहीं मिल पा रही है। विश्वविद्यालय प्रशासन को एनएसएस कैंप लगातार आयोजित कराने पर काम करना चाहिए। बीआरएबीयू के ज्यादातर कॉलेजों में एनएसएस के मद में पैसे नहीं आ रहे हैं। एनएसएस के कार्यक्रम चलाने के लिए सरकार की तरफ से हर साल राशि दी जाती है। सरकार ने नये नियम के तहत सीएनए खाता खुलवाने के लिए सभी कॉलेजों को निर्देश दिया है, लेकिन तकनीकी समस्या के कारण बैंकों में यह खाता नहीं खुल पा रहा है। एनएसएस के कार्यक्रम अधिकारियों का कहना है कि खाता खुलवाने के समय बैंक इतनी शर्तें रख दे रहे हैं कि वह कॉलेज पूरा नहीं कर पा रहे हैं। सरकार बिना सीएनए खाता के किसी भी कॉलेज को एनएसएस कार्यक्रम कराने के लिए पैसे नहीं दे रही है। राशि नहीं आने से कॉलेज स्तर के कार्यक्रम कराने में भी परेशानी हो रही है। एनएएस के कार्यक्रम को बेहतर तरीके से चलाने और उसकी रूपरेखा तैयार करने के लिए विश्वविद्यालय में एनएसएस एडवाइजरी कमेटी की बैठक कराने का प्रावधान है, लेकिन यह बैठक कई वर्षों से नहीं हुई है। बैठक नहीं होने से किसी भी कॉलेज को यह पता नहीं चल पा रहा कि एनएसएस में नया क्या काम करना है।
एनएसएस कैंप के लिए पहले नाश्ते के लिए 40 रुपये मिलते थे, लेकिन इतनी कम राशि से वालंटियर का पेट नहीं भर पाता है। इस राशि में वृद्धि की जानी चाहिए, ताकि कैंप लगने के बाद छात्रों को सही तरीके से नाश्ता मिल सके। छात्रों का कहना है कि एनएसएस का 120 घंटे का नियमित कार्यक्रम सभी कॉलेज और विश्वविद्यालय में होना चाहिए। बीआरएबीयू में स्नातक चौथे सेमेस्टर में एनएसएस का कोर्स शुरू किया गया है। यह पांच क्रेडिट का है, लेकिन इस विषय को पढ़ाने के लिए कोई शिक्षक नहीं है। शिक्षक के अलावा किताबें भी छात्रों के पास नहीं है। किसी अन्य विषय के शिक्षक एनएसएस के बारे में बता रहे हैं। किताब और विशेषज्ञ शिक्षक नहीं होने से छात्रों को परीक्षा देने में काफी परेशानी होती है। इस बार भी चौथे सेमेस्टर की परीक्षा में शिक्षक से पढ़े बिना छात्रों ने एनएसएस की परीक्षा दी। विवि प्रशासन को एनएसएस विषय के शिक्षक व किताबें उपलब्ध कराने पर काम करना होगा। विश्वविद्यालय में एनएसएस के बेस्ट वालंटियर और प्रोग्राम अफसर का अवार्ड भी कई वर्षों से नहीं मिल रहा है। इस अवार्ड के मिलने से छात्रों में एनएसएस के प्रति प्रोत्साहन का भाव पैदा होता है। विवि प्रशासन जल्द से जल्द इस अवार्ड को शुरू करे।
कराई जाएंगी एनएसएस की गतिविधियां : प्राचार्य
एनएसएस मद में हम छात्रों से जो राशि लेते हैं, उससे एनएसएस की गतिविधियां कॉलेज में कराई जाती हैं। कॉलेज ने जिस गांव को गोद लिया है, वहां भी गतिविधियां कराई जा रही हैं।
-प्रो. ममता रानी, प्राचार्या, एलएनटी कॉलेज
ऑफलाइन राशि मिलने से होगी सुविधा : कार्यक्रम पदाधिकारी
सरकार ने एनएसस के लिए बैंक में सेंट्रल नोडल अकाउंट खुलवाने को कहा है। हालांकि खाता खुलवाने में परेशानी हो रही है। सरकार ऑफलाइन भी एनएसएस के लिए राशि दे तो गतिविधियां जारी रहें।
-डॉ. संतोष कुमार, एनएसएस कार्यक्रम पदाधिकारी, एलएनटी कॉलेज
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