No one living in a one stop center - वन स्टॉप सेंटर में पीड़िताओं के रहने की व्यवस्था नहीं DA Image
17 फरवरी, 2020|6:29|IST

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वन स्टॉप सेंटर में पीड़िताओं के रहने की व्यवस्था नहीं

घरेलू हिंसा, यौन शोषण व प्रताड़ना से पीड़ित महिलाओं को जिले के वन स्टॉप सेंटर में शरण नहीं मिल रही है। महिला विकास निगम की ओर से कलेक्ट्रेट परिसर स्थित महिला सशक्तीकरण भवन में पिछले साल खुले इस सेंटर में संवासिनों के रहने की कोई व्यवस्था नहीं है। 
इस सेंटर में संवासिनों को न्याय दिलाने के साथ उनके रहने की भी व्यवस्था की जानी थी। लेकिन, यहां न ही पर्याप्त कमरे हैं न ही बेड। सेंटर में अन्य सुविधाएं भी नदारद हैं। यही नहीं, सेंटर 24 घंटे की बजाय सिर्फ आठ घंटे ही खुल रहा है। इस सेंटर में कार्य करने वाले कर्मचारियों की भी अब तक बहाल नहीं हो सके है। 
यह सेंटर अप्रैल 2019 में खुला था। इसे 24 घंटे खुला रखना था। इसमें संवासिनों के लिए पांच बेड की सुविधा के अलावा एक छत के नीचे ही उन्हें मेडिकल, कानूनी सलाह, सामाजिक परामर्श, पुलिस व प्रशासनिक मदद दी जानी थी। सीसीटीवी लगाये जाने थे और वीडियो कॉन्फेंसिंग से मामले की सुनवाई की जानी थी। लेकिन, यह केवल मामला दर्ज करने तक ही सीमित रह गया। इसको चलाने के लिए डीएम की अध्यक्षता में टास्क फोर्स का भी गठन किया गया है। इसमें पुलिस अधिकारी, सिविल सर्जन, जिला विधिक सेवा प्राधिकार सचिव, जिला बार एशोसिएशन अध्यक्ष, शिक्षा अधिकारी, पंचायती राज अधिकारी, जिला प्रोग्राम अधिकारी व परियोजना प्रबंधक भी शामिल हैं।
इन पदों पर होनी थी बहाली  
सेंटर चलाने के लिए पुलिस बल, केस वर्कर, डाटा इंट्री ऑपरेटर, मल्टी पर्पस वर्कर व स्वास्थ्य फैसिलेटर आदि पदों पर बहाली होनी थी। लेकिन, इस दशी में अबतक कोई कार्य नहीं किया गया।
महिला सशक्तीकरण भवन में जितनी जगह है, उसके अनुसार व्यवस्था की गयी है। वैसे, सेंटर के अपने भवन के लिए कलेक्ट्रेट परिसर में जमीन का चयन किया गया है। जल्द ही सेंटर का अपना भवन बनेगा। इसमें तमाम सुविधाएं रहेंगी। सेंटर 24 घंटे चलेगा। खाली पदों पर जल्द ही बहाली की जाएगी।  
-ललिता कुमारी, नोडल अधिकारी, वन स्टॉप सेंटर  

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