कार्यशाला में टिशू कल्चर पद्धति से लीची की खेती करने पर जोर
मुजफ्फरपुर में सतत लीची उत्पादन और मूल्य शृंखला प्रबंधन पर दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का समापन हुआ। इसमें वैज्ञानिकों और किसानों ने टिशू कल्चर पद्धति, प्रिसिजन एग्रीकल्चर और जलवायु अनुकूलता जैसे विषयों पर चर्चा की। केंद्र निदेशक ने लीची को बिहार की पहचान बताते हुए किसानों की आय बढ़ाने के लिए नवाचारों की आवश्यकता पर जोर दिया।

मुजफ्फरपुर, हिन्दुस्तान प्रतिनिधि। सतत लीची उत्पादन एवं मूल्य शृंखला प्रबंधन पर वैज्ञानिक नवाचार विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का समापन बुधवार को हो गया। इस दौरान टिशू कल्चर पद्धति से लीची की खेती करने पर जोर दिया गया। राष्ट्रीय लीची अनुसंधान केंद्र के तत्वावधान में आयोजित कार्यशाला में देशभर से आए वैज्ञानिकों, कृषि विशेषज्ञों, उद्यान अधिकारियों एवं प्रगतिशील किसानों ने भाग लिया। समापन सत्र में शुद्ध एवं प्रामाणिक रोपण सामग्री के उपयोग पर बल देते हुए टिशू कल्चर पर जोर दिया गया। साथ ही रूटस्टॉक ग्राफ्टिंग तथा फिनॉल की मात्रा में कमी पर केंद्रित अनुसंधान की आवश्यकता बताई गई। पारंपरिक और गैर-पारंपरिक दोनों क्षेत्रों में गुड एग्रीकल्चरल प्रैक्टिसेज को अपनाने पर जोर दिया गया।
कार्यशाला में एक आई आधारित सेंसर तकनीक द्वारा प्रिसिजन ऑर्चर्डिंग, कीट एवं रोग प्रबंधन, तथा भारत के जलवायु अनुकूलता मानचित्र के आधार पर गैर-पारंपरिक क्षेत्रों में लीची उत्पादन के विस्तार की संभावनाओं पर भी विस्तृत चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने स्टॉक–जलवायु सहनशीलता रणनीतियों के विकास को भविष्य के लिए आवश्यक बताया। लीची केवल फल नहीं बिहार की पहचान केंद्र निदेशक डॉ. विकास दास ने कहा कि लीची केवल एक फल नहीं, बल्कि बिहार की पहचान और किसानों की आजीविका का महत्वपूर्ण आधार है। यदि हम वैज्ञानिक नवाचार, डिजिटल तकनीक और किसान-केंद्रित दृष्टिकोण को साथ लेकर चलें तो लीची उत्पादन को अधिक लाभकारी, टिकाऊ और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाया जा सकता है। मूल्य शृंखला को मजबूत करना समय की आवश्यकता है, ताकि किसानों को उनकी मेहनत का उचित मूल्य मिल सके। लीची उत्पादकों की आय बढ़ाने में प्रिसिजन एग्रीकल्चर की भूमिका पर विचार किया गया। इस मौके पर डॉ. केके कुमार, पूर्व निदेशक डॉ. विशाल नाथ, डॉ. एसडी पांडेय, जिला विपणन पदाधिकारी प्रत्युष एवं लीची ग्रोवर एसोसिएशन के अध्यक्ष बच्चा प्रसाद सिंह, चिमनय केडिया, भोलानाथ झा, वीरेंद्र राय सहित अन्य जिलों से आए किसान उपस्थित थे।
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