सत्ता, वासना और स्वतंत्रता के बीच का द्वंद्व देख दंग रह गए दर्शक

Newswrap हिन्दुस्तान, मुजफ्फरपुर
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मुजफ्फरपुर में राष्ट्रीय नाट्य महोत्सव के तीसरे दिन 'आसमान जोगी' नाटक का मंचन हुआ। इस नाटक में जोगी की कहानी है जो स्त्रियों का अपहरण कर उन्हें महलों में कैद करता है। यह नाटक स्वतंत्रता, सत्ता और वासना के बीच के द्वंद्व को दर्शाता है। इसे अभिषेक मुद्गल ने निर्देशित किया।

सत्ता, वासना और स्वतंत्रता के बीच का द्वंद्व देख दंग रह गए दर्शक

मुजफ्फरपुर, प्रमुख संवाददाता। आकृति रंग संस्थान की ओर से जिला स्कूल मैदान में चल रहे पांच दिवसीय राष्ट्रीय नाट्य महोत्सव के तीसरे दिन रविवार को उदयपुर की टीम रंगमस्ताने ने ‘आसमान जोगी’ नाटक का मंचन किया। इसमें सत्ता, वासना और स्वतंत्रता के बीच का द्वंद्व देख दर्शक दंग रह गए।कहानी के केंद्र में 'आसमान जोगी' का अलौकिक चरित्र। अपनी शक्तियों के मद में चूर यह जोगी स्त्रियों का अपहरण कर उन्हें बादलों के ऊंचे और वैभवशाली महलों में कैद कर देता है। बाहर से देखने पर यह महल सुख-सुविधाओं और विलासिता का प्रतीक लगता, लेकिन भीतर कैद स्त्रियां अपनी स्वतंत्रता के लिए छटपटाती रहतीं।

इस नाटक ने खूबसूरती से दिखाया कि सोने का पिंजरा भी अंततः एक पिंजरा ही होता है। जोगी का अहंकार और उसका स्वामित्व बोध स्त्रियों के मौन प्रतिरोध के सामने घुटने टेक देता है।लोक संस्कृति को आधुनिक रंग-चेतना से जोड़ाकथाकार विजयदान देथा की लेखनी जब लोकधुनों के साथ मंच पर उतरी तो वह केवल नाटक नहीं, बल्कि मानवीय संवेदनाओं का जीवंत दस्तावेज बन गयी। यह प्रस्तुति पारंपरिक नाटकों से इतर कथा-गायन और वाचन की शैली में पिरोयी गयी थी। नाटक का निर्देशन अभिषेक मुद्गल ने किया। निर्देशक ने राजस्थानी लोक-संस्कृति की गहराई को आधुनिक रंग-चेतना के साथ जोड़ा। इसमें कलाकारों ने बहुआयामी भूमिकाएं निभायी। नाटक ने यह साफ संदेश दिया कि मनुष्य को भौतिक सुख-सुविधाएं और विलासिता देकर उसकी स्वतंत्रता नहीं छीनी जा सकती।इससे पहले उद्घाटन ⁠प्रो. व्यास नंदन शास्त्री, डॉ. अरविंद कुमार, डॉ. भावना, प्रो. रेणु कुमारी, प्रो. श्यामबाबू शर्मा, प्रो. कहकशां, प्रो. प्रमोद कुमार, प्रो. हरिश्चंद्र प्रसाद यादव, डॉ अविनाश कुमार, ⁠डॉ. सुनील कुमार ने संयुक्त रूप से किया। संचालन सत्यम कुमार सिंह ने किया। आयोजन में संयोजक डॉ. संजय सुमन, आकृति रंग संस्थान के डॉ. सुनील फेकानिया, डॉ. सुशांत, डॉ. संतोष सारंग, विनय, प्रभात कुमार, वीरेन नंदा, यशवंत पराशर, नदीम खान आदि की भूमिका रही।-- बॉक्सवर्कशॉप और संवाद में छात्रों ने सीखा हुनरनाट्य मेले में पेटिंग और थियेटर के छात्रों के लिए वर्कशॉप का भी आयोजन किया गया। इसमें रंग निर्देशक अभिषेक मुद्गल ने छात्रों को अभिनय के गुर सिखाए। वहीं, पेटिंग के छात्र-छात्राओं ने लाइव प्रदर्शन किया।

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