
जल संसाधन विभाग ने शुरू किया क्षतिग्रस्त बांधों का सर्वे
जल संसाधन विभाग ने मुजफ्फरपुर जिले में महत्वपूर्ण नदियों के बांधों के जीर्णोद्धार की योजना बनाई है। इसके तहत गंडक और बागमती नदी के बांधों का सर्वे किया जा रहा है। इस कार्य में ड्रोन का भी उपयोग किया जाएगा और सर्वे रिपोर्ट दिसंबर में मुख्यालय भेजी जाएगी।
मुजफ्फरपुर, वरीय संवाददाता। जल संसाधन विभाग जिले से होकर गुजरनेवाली सभी महत्वपूर्ण नदियों पर बने बांधों के जीर्णोद्धार की योजना में जुट गया है। इसके लिए विभाग इन नदियों के क्षतिग्रस्त बांधों का सर्वे करा रहा है। इन बांधों में बूढ़ी गंडक नदी के दोनों किनारों के अलावा बागमती के भी बाएं और दाएं तटबंधों का सर्वे कराया जा रहा है। साथ ही पश्चिम इलाके में गंडक नदी के किनारे बने बांधों के क्षतिग्रस्त जगहों की पहचान की जा रही है। सर्वे के लिए गंडक परियोजना के अलावा बागमती परियोजना और बूढ़ी गंडक बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल के अधिकारियों ने पहल शुरू कर दी है।

विभागीय मुख्यालय से मिले निर्देश के बाद तीनों परियोजनाओं से जुड़े कार्यपालक अभियंताओं को इसकी जवाबदेही दी गई है। जल संसाधन विभाग के मुजफ्फरपुर के मुख्य अभियंता डी कुमार ने सभी तीनों कार्यपालक अभियंताओं के नेतृत्व में अलग-अलग टीम का गठन किया है, जो सर्वे कर बांधों की हालत का पता लगाएंगे। इसमें पहली बार ड्रोन का भी इस्तेमाल किया जाएगा। दिसंबर में मुख्यालय भेजी जाएगी सर्वे रिपोर्ट: टीम गठन के बाद अब इसके सदस्य बांधों की भौतिक निरीक्षण कर उन जगहों का पता लगाएंगे, जहां बांध पिछले दिनों आई बाढ़ के कारण क्षतिग्रस्त हो गया था। फिर क्षतिग्रस्त हुए बांध की स्थिति देखते हुए मरम्मत पर आनेवाले अनुमानित खर्च भी अपनी रिपोर्ट में शामिल करेंगे। यह रिपोर्ट दिसंबर महीने में मुख्यालय भेजी जाएगी। साथ ही मुख्यालय से बांधों की मरम्मत के लिए आवश्यक निर्देश देने का भी अनुरोध किया जाएगा। अक्टूबर की भारी बारिश से हुआ है नुकसान: बूढ़ी गंडक बाढ़ नियंत्रण डिविजन के कार्यपालक अभियंता संतोष कुमार प्रभाकर ने बताया कि बीते अक्टूबर में दो बार हुई भारी बारिश के बाद बागमती, गंडक और बूढ़ी गंडक में बाढ़ जैसे हालात पैदा हो गए थे। बागमती नदी पर बने बांध में कई जगह कटाव भी हुआ था। इसके अलावा बूढ़ी गंडक नदी के बांधों में भी कई जगहों पर बांध को नुकसान पहुंचा था। हालांकि, कटाव जैसी स्थिति नहीं थी। अब उन जगहों की पहचान कर अगले साल मानसून के पहले ही मरम्मत करा ली जाएगी। इसके लिए ही यह सर्वे कराया जा रहा है।

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