मुजफ्फरपुर में रिकॉर्ड वोटिंग का असर, मतगणना में लग सकता है अधिक समय
संक्षेप: मुजफ्फरपुर में मतों की गिनती में अधिक समय लगेगा क्योंकि यहां सबसे ज्यादा वोटिंग हुई है। जिले में 32.03 लाख से अधिक मतदाता हैं और 4186 मतदान केंद्र हैं। 11 विधानसभा क्षेत्रों के लिए एक ही केंद्र पर 11 काउंटिंग हॉल बनाए जाएंगे। यह सब मिलाकर गिनती में अधिक समय लगने की संभावना है।
उत्तर बिहार के अन्य जिलों की अपेक्षा मुजफ्फरपुर में मतों की गिनती में अधिक समय लगेगा। इसकी तीन अहम वजहें हैं। पहला, राज्य में सर्वाधिक वोटिंग। दूसरा, मतदान केंद्र की संख्या के मामले में दूसरे व सीटों की संख्या के मामले में तीसरे नंबर पर रहना। तीसरा, जिले के कुल 11 विधानसभा क्षेत्रों के मतदाताओं की कुल संख्या 32.03 लाख से अधिक है। पहले चरण में सबसे अधिक मुजफ्फरपुर जिले में 71.41 प्रतिशत वोटिंग हुई है।

इस लिहाज से करीब 22.5 लाख मतों की गिनती होगी। राज्य में पटना के बाद दूसरे नंबर पर मुजफ्फरपुर जिले में सर्वाधिक 4186 मतदान केंद्र हैं। सीटों की संख्या के लिहाज से 11 सीटों के साथ तीसरे नंबर पर है। अहम पहलू यह भी है कि मुजफ्फरपुर समेत पांच विधानसभा क्षेत्रों में तीन-तीन लाख से अधिक वोटर हैं। अधिकारियों के मुताबिक इन परिस्थितियों के बीच ईवीएम के जरिये होने वाली वोटों की काउंटिंग में स्वाभाविक तौर पर अधिक समय लगना तय है।
रुझान तो पहले घंटे से ही मिलने लगेंगे, पर अधिक मतों वाली सीटों की गिनती में ज्यादा समय लग सकता है। मुजफ्फरपुर जिले में सर्वाधिक 3.10 लाख से अधिक वोटर गायघाट विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र में हैं। दूसरे नंबर पर कांटी में करीब 3.09 लाख वोटर, मुजफ्फरपुर में 3.05 लाख, पारू में 3.03 लाख और औराई में कुल वोट 3.03 लाख हैं। अन्य विधानसभा क्षेत्रों में तीन लाख से कम वोट हैं। एक मतगणना केंद्र पर होंगे 11 काउंटिंग हॉल जिले की सभी 11 विधानसभा सीटों की मतगणना के लिए एक मतदान केंद्र होगा। वहां हर विधानसभा सीट के मतों की गिनती के लिए अलग-अलग कुल 11 काउंटिंग हॉल होंगे।

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