
बीआरएबीयू: छात्रों की फीस से बढ़ रहा विवि का बैंक बैलेंस
मुजफ्फरपुर के बीआरएबीयू में छात्रों से विभिन्न मदों में फीस ली जा रही है, लेकिन सुविधाएं नहीं मिल रही हैं। छात्र नेता गोल्डेन सिंह ने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन सुविधाएं प्रदान नहीं कर रहा है। स्वास्थ्य केंद्र, फर्नीचर, और प्रयोगशाला के नाम पर ली गई राशि का कोई हिसाब नहीं है। छात्रों को बिना प्रैक्टिकल परीक्षा देनी पड़ रही है।
मुजफ्फरपुर, प्रमुख संवाददाता। बीआरएबीयू हर साल छात्रों से विभिन्न मदों में फीस वसूल रहा है, लेकिन उसकी सुविधा विद्यार्थियों को नहीं मिल रही है। स्नातक और पीजी दाखिले के समय छात्रों से मेडिकल सेंटर, बिजली, फर्नीचर, साइकिल स्टैंड जैसी सुविधाओं के नाम पर राशि ली जाती है, लेकिन ये सुविधाएं सिर्फ फीस देने तक ही सीमित हैं। छात्रों का कहना है कि राशि लेने के बाद हमें सुविधाएं नहीं मिल रही हैं। छात्र नेता गोल्डेन सिंह का कहना है कि विश्वविद्यालय प्रशासन जिस मद में पैसा लेता है वह सुविधा छात्रों को नहीं दे रहा है। इस पैसे से विश्वविद्यालय और कॉलेजों का सिर्फ बैंक बैलेंस बढ़ रहा है।
डीएसडब्ल्यू प्रो. आलोक प्रताप सिंह का कहना है कि इस बारे में कॉलेजों और पीजी विभागों से जानकारी ली जायेगी। छात्रों ने बताया कि स्नातक में दाखिले के समय कॉलेजों से मेडिकल सेंटर के नाम पर 100 रुपये लिये जाते हैं, लेकिन कॉलेजों में यह सुविधा नहीं है। पिछले दिनों एलएस कॉलेज के बंद पड़े हेल्थ सेंटर को खोलने की कवायद हुई थी, लेकिन उसमें अभी इलाज की सुविधा नहीं मिल रही है। हेल्थ सेंटर पर लिये जाने वाले इस पैसे से कॉलेज क्या करता है इसका कोई हिसाब और जवाब नहीं दिया जाता है। फर्नीचर से लेकर बिजली तक का बिल भर रहे छात्र कॉलेजों में पढ़नेवाले छात्र फर्नीचर से लेकर बिजली तक का बिल भर रहे हैं। इन सभी मदों में छात्रों से फीस की राशि ली जाती है। इसके अलावा आईकार्ड, एनएसएस, एनसीसी, रेडक्रॉस, नेशनल फ्लैग के नाम पर भी छात्रों से फीस ली जाती है। पीजी विभागों में भी दाखिले के समय कई तरह की फीस विद्यार्थियों से ली जाती है। इनमें पर्यावरण सुरक्षा फीस, बिल्डिंग मेंटेनेंस फीस, मैगजीन फीस, डायरेक्ट्री फीस शामिल हैं। इसके अलावा इंटरनल परीक्षा के लिए भी छात्रों से ही फीस ली जाती है। लेबोरेटरी के नाम पर लेते पैसे, सामान नहीं खरीदते कॉलेजों में दाखिले के समय लेबोरेटरी के नाम पर भी राशि ली जाती है, लेकिन कॉलेजों में प्रैक्टिकल के लिए सामान नहीं हैं। ग्रामीण क्षेत्रों के अलावा शहरी क्षेत्र के कॉलेजों में भी प्रैक्टिकल के सामान नहीं हैं। विज्ञान के छात्र बिना प्रैक्टिकल किये ही परीक्षा दे रहे हैं और पास भी कर रहे हैं। शिक्षकों का कहना है कि जब लेबोरेटरी मद में राशि ली जाती है तो उससे सामान खरीदनी चाहिए।

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