
आधुनिक खेती में गेम चेंजर होगी टिश्यू कल्चर प्रयोगशाला : डीएम
मुजफ्फरपुर के कुढ़नी प्रखंड में हीक्योर एग्रो प्लांट प्राइवेट लिमिटेड के टिश्यू कल्चर प्रयोगशाला का निरीक्षण डीएम सुब्रत कुमार सेन ने किया। उन्होंने आधुनिक खेती की तकनीकों, जैसे क्रॉम्बिया और अंजीर की टिश्यू कल्चर के माध्यम से उत्पादन के लाभों पर चर्चा की। यह प्रयोगशाला बिहार की पहली कॉमर्शियल लैब है।
मुजफ्फरपुर, वरीय संवाददाता। कुढ़नी प्रखंड के खरौना स्थित हीक्योर एग्रो प्लांट प्राइवेट लिमिटेड के टिश्यू कल्चर प्रयोगशाला का गुरुवार को डीएम सुब्रत कुमार सेन ने निरीक्षण किया। उन्होंने प्रयोगशाला में विकसित हो रहे उन्नत, विदेशी एवं गुणकारी पौधों की तकनीक, गुणवत्ता व किसानों को होने वाले लाभ से संबंधित जानकारी ली। उन्होंने कहा कि ऐसे संस्थान जिले में निवेश, स्थानीय रोजगार व कृषि आधारित उद्योगों को नई गति दे रहा है। डीएम ने कहा कि परंपरागत खेती से हटकर आधुनिक तकनीक आधारित खेती को प्रोत्साहित करने के दिशा में टिश्यू कल्चर गेम चेंजर टेक्नोलॉजी है। यह सीमित भूमि में अधिक उत्पादन सुनिश्चित करती है।
इधर, प्लांट के निदेशक अनिल कुमार सिंह ने डीएम को बताया कि यह एक मान्यता प्राप्त रिसर्च केंद्र है। वर्तमान में यहां क्रॉम्बिया (क्लोनल यूकेलिप्टस) व नीम का टिश्यू कल्चर के माध्यम से बड़े पैमाने पर पौध उत्पादन किया जा रहा है। बताया कि टिश्यू कल्चर से विकसित पौधे कम समय में पेड़ का रूप लेते हैं और रोग मुक्त रहते हैं। इसके विस्तारीकरण के तहत करजा व पानापुर में 30 एकड़ भूमि में प्लांटेशन किया गया है। अंजीर किया जा रहा विकसित : बताया कि यह बिहार की पहली कॉमर्शियल टिश्यू कल्चर लैब है। डीएम को क्रॉम्बिया फसल की जानकारी दी। निदेशक ने बताया कि किसान एक एकड़ भूमि में क्रॉम्बिया की खेती करेंगे तो 10 वर्षों में करीब एक करोड़ तक का लाभ होगा। इसके अतिरिक्त यहां टर्की, अफगानिस्तान और ईरान के डायना प्रभेद के अंजीर भी टिश्यू कल्चर के माध्यम से विकसित किए जा रहे हैं, जिनकी बाजार में भारी मांग है। महाराष्ट्र तक की जा रही आपूर्ति : इस लैब में सीडलेस नींबू, मालभोग केला, बतीसा केला, अनार, सागवान, ईख, बैंबू, सेव, चिकू, आलूबुखारा, कोकोआ, रुद्राक्ष, गम्हार, मौसमी, आंवला, स्ट्रॉबेरी, ग्वाभा, एवोकाडो सहित कई फसलों और फूलों की उन्नत प्रजातियां विकसित की जा रही हैं। यहां विकसित पौधों की आपूर्ति महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश सहित अन्य राज्यों में भी की जा रही है। प्रयोगशाला के माध्यम से न केवल मुजफ्फरपुर बल्कि संपूर्ण बिहार के किसानों को जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। यहां तैयार मोरिंगा, नीम का पाउडर रोमानिया और मालदोव जैसे देशों में निर्यात किया जाता है।

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