सपना दिखा रहा नगर निगम कब वेंडिंग जोन में जाएंगे हम
मुजफ्फरपुर में फुटपाथी दुकानदारों की समस्या बढ़ती जा रही है। वेंडिंग जोन के निर्माण के वादे अब तक पूरे नहीं हुए हैं। नगर निगम और प्रशासन ने कई बार मार्किंग का आश्वासन दिया, लेकिन स्थिति में सुधार नहीं आया। फुटपाथी दुकानदारों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है और उनकी रोजी-रोटी खतरे में है।
मुजफ्फरपुर। अतिक्रमणकारी के नाम पर उजड़ते-बसते कई फुटपाथी दुकानदार जवान से बूढ़े हो गए, लेकिन वेंडिंग जोन सपना ही रह गया है। आज तक उन्हें स्थायी स्थान मयस्सर नहीं हुआ। नगर निगम और जिला प्रशासन के स्तर पर बीते नवंबर 2025 में हुई बैठक में शहर की प्रमुख सड़कों के किनारे वेंडिंग स्थल की मार्किंग करने का निर्णय हुआ। दिसंबर में एक रात स्टेशन रोड के कुछ हिस्से में सफेद पेंट से वेंडिंग स्थल की मार्किंग की गई। हालांकि एक दिन बाद ही अभियान बंद हो गया। कंपनीबाग समेत कई अन्य इलाकों में भी फुटपाथी दुकानदारों के लिए वेंडिंग स्थल पर निशान लगाए जाने की योजना ठंडे बस्ते में चली गई।
इसका खामियाजा शहरवासियों के साथ ही वेंडरों को भी भुगतना पड़ रहा है। रोज सड़क जाम की समस्या से लोग परेशान हो रहे हैं। साथ ही पुलिस-प्रशासन-निगम के संयुक्त अभियान में फुटपाथी दुकानों पर बुलडोजर चल रहा है। इससे फुटपाथी दुकानदारों की निराशा बढ़ती जा रही है। उनका कहना है कि नगर निगम हमें सपने दिखा रहा है। पता नहीं कब यह पूरा होगा। शहर में छह हजार से अधिक फुटपाथी दुकानदार या वेंडर हैं। इनमें करीब 4600 निबंधित हैं। रोज प्रति दुकान औसतन एक हजार रुपए का कारोबार माना जाए तो 60 लाख और मासिक 18 करोड़ का बिजनेस है। यानी सालाना 200 करोड़ से अधिक का कारोबार है। फिर भी वेंडिंग जोन नदारद है। वेंडिंग जोन बनाने की योजनाएं तो खूब बनीं, पर फाइलों से बाहर धरातल पर नहीं उतरी। स्टेशन रोड में फुटपाथी दुकान चलाने वाले पवन चौधरी, रंजीत गुप्ता और निशात बेगम ने बताया कि अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के समक्ष गुहार लगाने पर हर बार वेंडिंग जोन बनाने का आश्वासन मिला। हालांकि अब तक नतीजा सिफर ही रहा। उल्टे बीते तीन वर्षों में पहले से निगम द्वारा आवंटित अस्थायी दुकान या स्टॉल ध्वस्त कर दिए गए।
फुटपाथी दुकानदारों ने बताया कि स्मार्ट सिटी के विभिन्न प्रोजेक्ट से जुड़े निर्माण कार्यों को लेकर स्टेशन रोड, लक्ष्मी चौक, तिलक मैदान रोड और अन्य इलाकों में दुकानों को खाली कराने के बाद ढहा दिया गया। हद तो यह कि अतिक्रमण के खिलाफ अभियान के दौरान नाले पर दुकान लगाने और निगम से जारी निबंधन या पहचान पत्र दिखाने पर भी कार्रवाई की जा रही है। ठेला या दुकान को तोड़ दिया जाता है। सामान तहस-नहस कर दिए जाते हैं। आर्थिक नुकसान होता है। कई दिनों तक दुकान बंद रहती है। ऐसी स्थिति में रोज कमाने-खाने वाले गरीब वेंडरों के सामने परिवार का पेट पालना मुश्किल हो जाता है। ठेला या दुकान की व्यवस्था करने के लिए कर्ज लेना पड़ता है। निबंधित वेंडरों को निगम से लेकर बैंक तक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। लोन को लेकर आवेदन देने के बावजूद निबंधित वेंडर शीला देवी (लक्ष्मी चौक), रंजीत कुमार (बस सटैंड), रूबी देवी (लक्ष्मी चौक), आफताब अंसारी (बनारस बैंक चौक), नवल साह (स्टेशन रोड) व अन्य निगम से बैंक के बीच चक्कर लगाने को विवश हैं।
मो. सरफराज उर्फ चांद व मुन्ना सहनी के मुताबिक निगम में आवेदन व जरूरी कागजात जमा करने के बाद बैंक की शाखा से संपर्क करने के लिए कहा जाता है। वहां जाने पर बैंककर्मी पूछते हैं कि पीएम स्वनिधि क्या होता है? कभी कहा जाता है कि फंड नहीं आया है। वेंडरों का मजाक उड़ाया जाता है। अक्सर लोन देने में देरी की जाती है। दरअसल कोरोना काल में फुटपाथी दुकानदारों को आजीविका के लिए आर्थिक मदद के मकसद से पीएम स्वनिधि योजना के तहत ऋण की सुविधा उपलब्ध कराई गई थी। आरंभ में पहली बार 10 हजार लोन का प्रावधान था। बाद में इसे बढ़ाकर 15 हजार कर दिया गया। शुरुआती लोन चुका देने पर आगे अधिक राशि दी जाती है। वेंडरों को लोन देने के लिए कई बार निगम कार्यालय परिसर में विशेष कैंप भी लगाए जाते रहे हैं। निगम के स्तर पर होने वाली टाउन वेंडिंग कमेटी की बैठक में भी बैंक अधिकारियों के सामने यह मुद्दा उठता है। हालांकि हालात में सुधार नहीं होने से वेंडर परेशान हैं। पिछले साल के आरंभ में तत्कालीन नगर आयुक्त विक्रम विरकर के निर्देश पर लक्ष्मी चौक के पास वेंडिंग जोन में स्थानीय फुटपाथी दुकानों की शिफ्टिंग को लेकर निगम की गाड़ी से बाकायदा तीन-चार दिनों तक माइकिंग की गई। इसके बाद ब्रह्मपुरा व आसपास के दो दर्जन से अधिक वेंडर उसमें शिफ्ट हो गए। हालांकि बाद में जलजमाव की समस्या को देखते हुए निगम ने नाला ठीक होने के बाद वेंडिंग जोन चालू करने की घोषणा की। कुछ समय पहले निगम बोर्ड की बैठक में भी तत्कालीन नगर आयुक्त ने लक्ष्मी चौक पर वेंडरों को जगह देने की बात कही। हालांकि उनका तबादला होने के बाद अब तक नतीजा सिफर ही रहा। स्थानांतरण के बाद विदाई समारोह में नगर आयुक्त विक्रम विरकर ने वेंडिंग जोन चालू नहीं कर पाने पर अफसोस भी जताया था।
बोले जिम्मेदार
वेंडिंग जोन या वेंडरों की समस्या का समाधान करना प्राथमिकता सूची में है। फुटपाथी दुकानों को व्यवस्थित करने के लिए सड़क किनारे वेंडिंग स्थल की मार्किंग होगी। इससे जुड़े प्रस्ताव को बीते 10 जनवरी को सशक्त स्थायी समिति की बैठक में स्वीकृति दे दी गई है। जल्द ही मार्किंग के काम होंगे। अधिकारियों को निर्देशित किया गया है। वेंडिंग जोन के निर्माण को लेकर राशि का बजटीय प्रावधान भी किया गया है। इस मामले को लेकर पूर्व में निगम बोर्ड के स्तर पर भी चर्चा हुई है।
निर्मला देवी, मेयर

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