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कहीं लगते ही नल बेकार तो कहीं बरसों से जल टपकने का इंतजार

कहीं लगते ही नल बेकार तो कहीं बरसों से जल टपकने का इंतजार

संक्षेप:

मुजफ्फरपुर जिले में हर घर नल का जल योजना का उद्देश्य पूरा नहीं हो सका है। कई क्षेत्रों में काम नहीं हुआ और जहां नल लगाए गए हैं, वहां जल की आपूर्ति नहीं हो रही। लोगों ने पाइप की गुणवत्ता, काम में लापरवाही और जल की गुणवत्ता पर सवाल उठाए हैं। अधिकारियों की लापरवाही के कारण ग्रामीणों में आक्रोश है।

Dec 23, 2025 06:40 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, मुजफ्फरपुर
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मुजफ्फरपुर। जिले में हर घर नल का जल पहुंचाने की महती योजना जमीनी स्तर पर अपने उद्देश्यों से पीछे रह गई है। कहीं अब तक काम ही नहीं शुरू हुआ है तो कहीं नल लगा दिया, लेकिन जल नहीं टपका। मड़वन में तो प्रखंड कार्यालय में लगा नल और पानी टंकी ध्वस्त है। चापाकल खराब तो नलकूप जंगल-झाड़ से घिरा हुआ है। जहां प्रखंड स्तर के तमाम जिम्मेदार अधिकारी बैठते हैं, वहां यह हाल है तो वार्डों की स्थिति का सहज अनुमान लगाया जा सकता है। जिले के हर प्रखंड में इस योजना के तहत हुए कार्यों में लोगों ने खामियां गिनाईं।

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गुणवत्ता विहीन पाइप और नल के अलावा लोगों ने काम में भी लापरवाही और अनियमितता जैसे आरोप लगाए। पानी टंकी की सफाई नहीं होने और पेयजल की गुणवत्ता जांच पर भी सवाल खड़े किए। लोगों का कहना है कि नल जल में गुणवत्तापूर्ण कार्य के लिए जिम्मेदारों को जागना होगा। मुजफ्फरपुर जिले के प्रखंडों में नलजल योजना अपना उद्देश्य पूरा नहीं कर पा रही है। कई स्तरों पर इसमें गड़बड़ियां हैं। उदाहरण के रूप में मड़वन प्रखंड कार्यालय को ही ले लीजिए। जहां बीडीओ-सीओ और प्रखंड प्रमुख समेत तमाम जिम्मेदार बैठते हैं और समय-समय पर जिले से वरीय अधिकारी भी निरीक्षण करने पहुंचते हैं, वहां भी नल जल की स्थिति खराब है। प्रखंड कार्यालय में लगा नल का जल और वाटर टंकी अर्से से ध्वस्त है। यहां एक कोने में चापाकल भी खराब पड़ा है। नलकूप जंगल-झाड़ से घिरा हुआ है। प्रखंड के कई वार्डों में अब तक नल जल योजना चालू भी नहीं हो सकी है। जहां पानी टंकी लगी है और पाइप बिछी है, वहां पांच से सात साल बाद भी पानी नहीं पहुंच सका।

मड़वन प्रखंड अंतर्गत पकड़ी पंचायत के वार्ड-12 व वार्ड-13 में लोग पेयजल के लिए टकटकी लगाए बैठे हैं। लोगों का कहना है कि जहां काम नहीं हुआ, वहां अब तक न तो काम पूरा कराया गया है और न दोषियों पर प्राथमिकी दर्ज कराई जा रही है। पंचायत जनप्रतिनिधि, वार्ड क्रियान्वयन समिति एवं एजेंसी ने मिलकर जब इस योजना में गड़बड़ी की तो सरकार ने पीएचईडी (लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग) को यह काम हैंडओवर कर दिया। सालभर बीतने के बाद भी हालत सुधरी नहीं है। कई इलाकों में योजनाएं चालू ही नहीं हैं। कई वार्डों में योजनाएं पूरी तरह से बंद हो गई हैं, जिससे ग्रामीणों में काफी रोष व्याप्त है। ग्रामीणों का आरोप है कि अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की लापरवाही और उदासीनता के कारण भी योजना जमीनी स्तर पर सफल नहीं हो पा रही है। प्रखंड में अच्छी गुणवत्ता वाले पाइप व टैंक का अभाव दिखा। मुजफ्फरपुर व मोतीपुर डिविजन को पूरे जिले में नल का जल पहुंचाने की जिम्मेदारी है। इन दोनों डिविजनों में 668 टोले अब भी नल के जल से वंचित हैं। मुजफ्फरपुर डिविजन में उनकी संख्या 264 है तो मोतीपुर में 404 ऐसे टोले हैं, जहां आज भी लोग नल का जल से वंचित हैं। इतना ही नहीं, जिले के 5360 वार्डों में मरम्मती एवं मेंटेनेंस कार्य आधा-अधूरा है।

मड़वन प्रखंड की रक्सा व पकड़ी पंचायत के वार्ड-12 एवं 13 में योजना का बुरा हस्र है। यहां लोगों के घरों में नल का कनेक्शन तो दे दिया गया मगर बरसों से पेयजल का इंतजार है। मोतीपुर की बरियापुर दक्षिणी, सरैया की बसंतपुर उत्तरी, कटरा की धनौर, मुशहरी की सुस्ता, कुढ़नी की अमरख, पारू की मोहब्बतपुर आदि में भी नल का जल योजना का लोगों को समुचित लाभ नहीं मिल सका है। कई पंचायतों के तो एक वार्ड में भी योजना का लाभ नहीं मिला है। जिले की 373 पंचायतों में 5108 वार्ड हैं। औसतन एक पंचायत में 12 से 13 वार्ड हैं। प्रत्येक वार्ड में नल-जल योजना के लिए करीब 14 लाख रुपये की निकासी की गई। इस हिसाब से करीब सात अरब 15 लाख खर्च हुए। बावजूद योजना पूरी तरह जमीन पर नहीं उतर सकी। कुछ वार्डों को छोड़ दिया जाए तो हर जगह योजना की स्थिति बेहद खराब है। ग्रामीणों का आरोप है कि इसे कागज पर पूर्ण दिखा दिया गया है। 14 लाख की योजना में 20 से 25 प्रतिशत का ही काम हुआ लगता है। जिले के 668 टोले अब भी नल जल योजना से लाभान्वित होने से वंचित हैं। पूर्व से लगे नल जल में भी 5360 जगहों पर निर्बाध जलापूर्ति के लिए मरम्मत एवं मेंटेनेंस कार्य जरूरी बताया गया है। पहले पंचायती राज विभग द्वारा नल जल योजनाएं पहले संचालित हो रही थीं, जिसमें भ्रष्टाचार की शिकायतों के बाद सरकार के आदेश पर पीएचईडी ने उसको अधिगृहित कर लिया है। पंचायती राज विभाग से हस्तानांतरित पंचायतों में छूटे हुए टोलों में नए सिरे से कार्य प्रारंभ करने की बात विभाग कह रहा है।

मुजफ्फरपुर डिविजन पीएचईडी के अंतर्गत आठ प्रखंडों के 264 वार्डों में नल जल का कार्य शुरू हुआ है। मुशहरी में 72, बोचहां में 40, सकरा में 12, मुरौल में 11, बंदरा में 16, गायघाट में 22, कटरा में 33 व औराई में 58 वार्डों में ये कार्य होंगे। कार्यपालक अभियंता मुकेश कुमार ने बताया कि पहले की नल जल की 2246 योजनाओं में मरम्मत एवं संपोषण कार्य भी चल रहे हैं। हस्तानांतरण से पहले से 180 योजनाएं उनके डिविजन की हैं। मोतीपुर डिविजन के अंतर्गत आठ प्रखंडों के 404 वार्डों में काम शुरू किया गया है। सरैया में 75, कुढ़नी में 64, कांटी में 34, मड़वन में 36, मीनापुर में 73, साहेबगंज में 13, मोतीपुर में 50, पारू में 59 वार्डों में काम होना है। कार्यपालक अभियंता अमित स्टीफन ने बताया कि पहले की कुल 3114 योजनाओं में मरम्मत एवं संपोषण का कार्य चल रहा है। हस्तानांतरण से पहले से 228 योजनाएं उनके विभाग की अपनी है।

जिले की अधिकतर पंचायतों में गुणवत्तापूर्ण कार्य नहीं कराए जाने के कारण जलापूर्ति पाइप फट जाना, टंकी टूट जाना, मोटर खराब और जल जाना, टावर पाइप फट जाने जैसी समस्या के कारण हर घर नल का जल नहीं मिल पा रहा है। टावर की मरम्मत, मोटर बदलने एवं नई पाइपलाइन बिछाने की मांग अक्सर होती रही है। अधिकारियों का कहना है कि अच्छी गुणवत्ता वाली पाइप, पीतल की टोंटी लगानी है तथा स्टैंड पोस्ट बढ़िया निर्माण करना है। 5000/10000 लीटर क्षमता वाला पीवीसी टैंक का निर्माण करना है।

बोले जिम्मेदार

योजनाओं के क्रियान्वयन एवं उसमें अनियमितता की शिकायतों की जांच चलती रहती है। जहां गड़बड़ी पाई जाती है, वहां सुधार व दोषियों पर कार्रवाई के आदेश भी दिए जाते हैं। योजना को धरातल पर उतारने में हरसंभव कदम उठाए जाते हैं। अगले माह से ही अधिकतर स्थानों पर काम धरातल पर दिखेगा। नल का जल हर घर पहुंचाना प्राथमिकता में है।

-मुकेश कुमार, कार्यपालक अभियंता, मुजफ्फरपुर

जहां नल जल चालू नहीं है, वहां भी काम शुरू किया जा चुका है। ये वैसे इलाके हैं, जहां पंचायतों के स्तर पर योजना के क्रियान्वयन में कोताही बरती गई थी। उन टोलों में काम नहीं हो सका था। वैसे तमाम टोलों को चिह्नित करके काम पूरा कराए जाने की प्रक्रिया चल रही है। जहां कहीं आधा-अधूरा काम हुआ है, वहां जांच कराकर दोषियों पर कार्रवाई के लिए लिखा जाएगा। -

अमित स्टीफन, कार्यपालक अभियंता, मोतीपुर