दो साल से प्रोजेक्ट फाइल में बंद, जर्जर सड़क पर गिर रहे लोग
मुजफ्फरपुर में कई मोहल्लों की सड़कें वर्षों से जर्जर हैं। सराय सैयद अली रोड और बुलाकी बाबू गली की स्थिति गंभीर है, जहां गड्ढे और जलजमाव से लोग परेशान हैं। नगर निगम के द्वारा सड़क निर्माण का कार्य पहले ही रद्द हो चुका है, जिससे स्थानीय लोगों को काफी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
मुजफ्फरपुर। शहर की मुख्य सड़कों से जुड़ी कई मोहल्लों की सड़कें वर्षों से जर्जर हैं। ये उबड़-खाबड़ तो हैं ही, कई जगहों पर गड्ढे भी हैं। अलग-अलग मोहल्लों में सड़क किनारे खुला नाला होने से खतरा बना रहता है। लेनिन चौक को सीधे कटही पुल/नया टोला से जोड़ने वाली आधा किमी लंबी सराय सैयद अली रोड में दिन-रात वाहनों का आवागमन रहता है। वार्ड 11 और 27 की सीमा पर स्थित इस रोड का इस्तेमाल लेनिन चौक से मोतीझील, स्टेशन या धर्मशाला आदि इलाके में जाने वाले लोग व्यस्त ट्रैफिक से बचने या समय की बचत के लिए करते हैं। यह सड़क बीते एक दशक से जर्जर है।
इस सड़क के दोनों तरफ सघन रिहायशी इलाका है। करीब दो साल से सराय सैयद अली रोड में सड़क व नाला निर्माण का प्रोजेक्ट निगम की फाइलों में बंद है। इसको लेकर पिछले साल आंदोलन भी हुआ। समस्या के समाधान का आश्वासन मिलने के बावजूद नतीजा सिफर ही रहा। कुछ ऐसी ही स्थिति वार्ड 27 के बुलाकी बाबू गली और वार्ड 46 के सनराइज गली की भी है। अप्रैल 2024 में नगर निगम ने वार्ड संख्या 27 में लेनिन चौक से सराय सैयद अली रोड होकर श्यामनंदन रोड तक सड़क व नाला के निर्माण कार्य को लेकर टेंडर निकाला। 57 लाख के प्रोजेक्ट के तहत छह महीने में निर्माण कार्य पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया। बाद में तकनीकी कारणों से टेंडर रद्द हो गया। फिर पिछले साल जनवरी 2025 में दोबारा टेंडर हुआ, लेकिन धरातल पर अब तक काम शुरू नहीं हो सका है। प्रोजेक्ट में लेटलतीफी से आजिज होकर वार्ड 27 के पार्षद अजय कुमार ओझा निगम कार्यालय परिसर में उपवास आंदोलन किया। तब तत्कालीन नगर आयुक्त विक्रम विरकर ने उपवास स्थल पर जाकर पार्षद की मांग पूरा करने का आश्वासन देते हुए आंदोलन खत्म कराया था। इस बात को एक साल हो गए, लेकिन समस्या जस की तस बनी हुई है। इस बीच नगर आयुक्त का तबादला भी हो गया। स्थानीय बबलू, मुख्तार आलम, सुशील प्रसाद, जवाहर श्रीवास्तव, मेघन साह, मो. इम्तियाज व अन्य लोगों ने बताया कि सराय सैयद अली रोड में रात की बात छोड़िए दिन के उजाले में भी अक्सर दोपहिया वाहन सवार गिर कर चोटिल होते रहते हैं। निगम की अभियंत्रण व अन्य शाखाओं के उपेक्षापूर्ण रवैये के बीच जर्जर सड़क ने लोगों की परेशानी बढ़ा दी है। कई जगहों पर सड़क के बीच अचानक एक फीट तक ऊंचा मलबा या ब्रेकरनुमा संरचना तो कई जगहों पर सड़क कटी या टूटी है। इससे पैदल चलना भी खतरे से खाली नहीं है। सड़क के बीचोंबीच छह इंच या अधिक चौड़ाई में कटी या टूटे प्वाइंट की गहराई भी पांच-छह इंच तक है। ऐसे हालात में पैदल आने-जाने के क्रम में बच्चे व बुजुर्ग भी गिरते रहे हैं। खतरनाक स्थिति को देखते हुए आवागमन के क्रम में सुरक्षा को लेकर कई लोगों ने अपने घर के पास निजी खर्च करके सड़क की मरम्मत करवाई है। बताया कि शाम में बिजली गुल हो जाने पर इस रोड में सबसे अधिक हादसे होते हैं।
बुलाकी बाबू गली का बुरा हाल, नहीं जा रहे वाहन
लेनिन चौक से थोड़ी दूरी पर बुलाकी बाबू गली (दामूचक रोड) में अजीबोगरीब स्थिति है। जर्जर सड़क की सतह से 10-12 इंच ऊपर नाले का ऊपरी हिस्सा है। सात-आठ फीट चौड़ी सड़क के करीब आधे हिस्से में नाला है। नतीजतन सड़क खतरनाक हो गई है। दो साल पहले नाला बनकर तैयार हो गया, लेकिन टूटी-फूटी सड़क की सुध नहीं ली गई। नतीजतन कार, एंबुलेंस व अन्य चारपहिया वाहन इस गली में नहीं जा रहे हैं। आलम यह है कि गंभीर स्थिति होने पर मरीज को किसी तरह चारपाई आदि के सहारे मेन रोड पर लाकर एंबुलेंस में चढ़ाना पड़ता है। लगन के मौसम में दूल्हा-दुल्हन को मेन रोड से गली के घर तक पैदल या बाइक आदि से लाया जाता है। राजेश कुमार, सुनील कुमार वर्मा, रामकिशुन पासवान ने बताया कि सघन आबादी के बीच पहले से संकरी आधा किमी लंबी बुलाकी बाबू गली में बदले हालात में बाइक चलाना भी मुश्किल है। विशेषकर दो बाइक की क्रॉसिंग होने पर परेशानी होती है। रही-सही कसर जर्जर सड़क पर जगह-जगह जलजमाव ने पूरी कर दी है। टुन्ना पासवान, किशन मलिक, सुरेंद्र पासवान, मनोज रजक, बालेश्वर प्रसाद व अन्य लोगों ने बताया कि नाला बनने से पहले गली में आराम से एंबुलेंस या कार आ जाती थी। अब जर्जर व संकरी सड़क पर जलजमाव की समस्या भी है। नल जल योजना से जुड़ा जलापूर्ति पाइप बार-बार क्षतिग्रस्त होने से परेशानी बढ़ गई है। जैसे-तैसे कम गहराई पर भूमिगत पाइपलाइन बिछा दी गई है। दबाव पड़ने पर अक्सर लीक या पाइप टूट जाता है। नतीजतन रोज करीब 10 घंटे होने वाली जलापूर्ति के समय पानी सड़क पर बहते रहता है। इसके अलावा कई जगहों पर नाले का पानी भी सड़क पर बहने से समस्या हो रही है।
सड़क निर्माण से पहले बदला जाए जलापूर्ति पाइप
सड़क की सतह व नवनिर्मित नाले के ऊपरी हिस्से के बीच बेतरतीब ऊंचाई तकनीकी समस्या है। जानकारों के मुताबिक बदले हालात में नाले के हिसाब से ही सड़क की ऊंचाई करते हुए निर्माण करना होगा। इससे नाले के ऊपरी हिस्से को भी रास्ते के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकेगा। आपात स्थिति में एंबुलेंस या छोटे चारपहिया वाहनों का प्रवेश संभव होगा। पवन कुमार, राजू पासवान व अन्य लोगों ने नाला के समानांतर सड़क का निर्माण कराने की मांग की। साथ ही सड़क बनाने से पहले जलापूर्ति पाइप को बदलने का अनुरोध किया, ताकि बार-बार लीकेज और जलजमाव की समस्या से लोगों को राहत मिल सके।
वार्ड 46 की सनराइज गली में सड़क से 10 इंच ऊपर बना दिया नाला
नगर निगम के जूनियर इंजीनियर की ओर से की गई मापी में गलती से सनराइज गली के लोग हलकान हैं। वार्ड संख्या 46 की सनराइज गली में हाल ही में सड़क व नाला का निर्माण हुआ है। सड़क से 10 इंच ऊपर नाला बना दिया गया है। यही नहीं, ठेकेदार ने सड़क के आखिरी हिस्से को अधूरा छोड़ दिया। मौके पर जमा पानी व गंदगी के बीच रास्ता बंद है। इससे गली में पैदल जाना भी मुश्किल है। यही स्थिति कंचन नगर मोहल्ले में भी है। वार्ड पार्षद मो. सैफ अली के मुताबिक निगम के तत्कालीन कनीय अभियंता की मापी में हुई गलती के कारण सनराइज गली और कंचन नगर में सौ-सौ फीट सड़क का निर्माण कार्य पूरा किए बगैर ठेकेदार ने काम छोड़ दिया है।
समस्या का जल्द कराया जाएगा समाधान
संबंधित मामला संज्ञान में हैं। जल्दी ही समस्या का समाधान कर दिया जाएगा। सराय सैयद अली गली में सड़क व नाला का निर्माण कार्य होना है। सनराइज गली व अन्य जगहों का भी निरीक्षण किया गया है। इसको लेकर जरूरी कागजी व तकनीकी काम पूरे किए जा रहे हैं।
-विजेंद्र कुमार, एग्जीक्यूटिव इंजीनियर, नगर निगम

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