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बिन बारिश झेलते जलजमाव, चुनाव के समय ताजा हो जाता घाव

बिन बारिश झेलते जलजमाव, चुनाव के समय ताजा हो जाता घाव

संक्षेप: मुजफ्फरपुर के दास टोला में लोग बिना बारिश के भी जलजमाव की समस्या झेल रहे हैं। चार दशकों से अधिक समय से सड़क और नाले की कमी के कारण स्थानीय लोग परेशान हैं। चुनाव के समय जनप्रतिनिधियों द्वारा दिए गए आश्वासन भी केवल छलावा साबित हुए हैं। जमा पानी सड़कर काला हो गया है, जिससे मलेरिया का खतरा बढ़ रहा है।

Fri, 31 Oct 2025 05:41 PMNewswrap हिन्दुस्तान, मुजफ्फरपुर
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मुजफ्फरपुर, वरीय संवाददाता। नगर निगम के वार्ड संख्या 34 के अंतर्गत नीम चौक से सटे दास टोला स्थित है। यहां के लोग बिना बारिश के ही जलजमाव का दंश झेल रहे हैं। समस्या पुरानी है। चार दशक से अधिक पुराने दास टोला में सौ से अधिक घर हैं। आबादी करीब 600 है। हालांकि यहां बुनियादी सुविधाओं का घोर अभाव है। सड़क और नाला तक नहीं है। दशकों से लोग जलनिकासी का इंतजाम होने की बाट जोह रहे हैं, लेकिन जनप्रतिनिधियों से अब तक सिर्फ समस्या के समाधान का आश्वासन ही मिला है। चुनाव के समय जब फिर भरोसा देने यहां प्रत्याशी आते हैं तो स्थानीय लोगों का घाव ताजा हो जाता है।

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लोगों का कहना है कि जनप्रतिनिधि बदलते रहे, मगर आश्वासन छलावा साबित हो रहा है। साल में पांच से छह महीने तक लोग जलजमाव के बीच रहते हैं। दास टोला के संतोष कुमार, सूरज पासवान, दिलीप सहनी, ज्योति देवी, कुसुम देवी व अन्य लोगों ने बताया कि हर बार विधानसभा चुनाव के समय वोट मांगने वाले प्रत्याशी जलजमाव से मुक्ति दिलाने का वादा करते हैं, लेकिन बाद में भूल जाते हैं। समाजसेवी सतीश कुमार सोनू के मुताबिक स्थानीय वार्ड पार्षद चंदा कुमारी के जरिये निगम को जलजमाव से हो रही लोगों की परेशानी के बारे में जानकारी दी गई है। हालांकि अब तक निगम के स्तर से ठोस पहल नहीं की गई है। स्थिति यह है कि कई घरों के सामने पानी लगा है। इसी पानी से होकर लोग आते-जाते हैं। इस क्रम में खासकर महिला, बच्चे और बुजुर्गों की परेशानी के साथ ही खतरा बढ़ जाता है। जर्जर सड़क पर पानी लगा होने के कारण कई बार पैदल जा रहे लोग फिसल कर या गड्ढे में गिरने से चोटिल हो जाते हैं। सड़ कर काला हो चुका है जमा पानी : दास टोला की सड़क पर तीन महीने से अधिक समय से जमा पानी सड़ कर काला हो गया है। साथ ही दुर्गंध व मच्छरों का प्रकोप बढ़ गया है। मलेरिया का खतरा बढ़ गया है। विशेषकर गंदे पानी के बीच आवाजाही में संक्रमण व बीमारी के डर से लोग सहमे हुए हैं। सड़े हुए पानी की दुर्गंध के बीच आने-जाने में सांस लेना भी मुहाल हो जाता है। मच्छरों के अलावा दुर्गंध से बचने के लिए सड़क से सटे अधिकतर घरों में दरवाजा व खिड़कियां बंद करके रखनी पड़ती है।