प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए बनाए जा रहे जैव संसाधन केंद्र
मुजफ्फरपुर में खेतों की उर्वरा बढ़ाने के लिए प्राकृतिक खेती को बढ़ावा दिया जाएगा। किसानों को रासायिनक खाद का प्रयोग कम करने हेतु जैव संसाधन केंद्र बनाए जा रहे हैं। जिले में 30 केंद्र स्थापित किए गए हैं, जो जैविक उत्पाद और प्राकृतिक खाद उपलब्ध कराएंगे। यह योजना प्रधानमंत्री प्राकृतिक खेती योजना के तहत चल रही है।

मुजफ्फरपुर, वरीय संवाददाता। जिले में खेतों की उर्वरा बढ़ाने को लेकर प्राकृतिक खेती के तौर तरीकों को बढ़ावा दिया जाएगा। साथ ही किसानों को रासायिनक खादों का प्रयोग कम करने के लिए जैव संसाधन केंद्र बनाए जा रहे हैं, जहां से किसानों को खेती किसानी के लिए जैव संसाधन उपलब्ध कराए जाएंगे। जिला कृषि विभाग ने इसकी तैयारी पूरी करते हुए 30 संसाधन केंद्र की स्थापना कर चुकी है। इसकी जानकारी जिला कृषि पदाधिकारी सुधीर कुमार ने दी। उन्होंने बताया कि यह योजना प्रधानमंत्री प्राकृतिक खेती योजना के तहत संचालित की जाएगी। इसमें जिले की खेती योग्य 750 हेक्टेयर भूमि को 15 कलस्टरों में बांटा गया है।
हर कलस्टर में 50 हेक्टेयर खेती लायक जमीन होगी। इस अभियान के लिए सहायक निदेशक (रसायन) कुणाल सिंह को नोडल पदाधिकारी बनाया गया है। वे पूरे कार्यक्रम की रूपरेखा तैयार कर चुके हैं। इसके अलावा चिन्हित जमीन से मिट्टी के नमूने लिए जा रहे हैं। उन नमूनों की जांच रिपोर्ट के आधार पर जैव उर्वरक के किस्म का निर्धारण होगा। डीएओ ने बताया कि किसानों को जैविक खेती के लिए प्रोत्साहित करने के लिए जैव संसाधन केंद्र बनाए जा रहे हैं। अभी तक ऐसे 30 केंद्र विभिन्न पंचायतों में स्थापित किए जा चुके हैं। इस केंद्रों के माध्यम से किसानों को प्राकृतिक खाद और कीटनाशक उपलब्ध कराए जाएंगे। यहां से किसानों को जीवामृत, घनजीवामृत, नीमास्त्र, ब्रह्मास्त्र जैसे परंपरागत जैविक उत्पाद दिए जाएंगे।

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