कहीं मिट्टी के ढेर तो कहीं टाइल्स वाला, हिस्सा काटा, मुश्किल हुआ सैर-सपाटा
मुजफ्फरपुर में लेक फ्रंट पर त्योहारी मौसम में सैर-सपाटे का मजा किरकिरा हो गया है। निर्माण कार्यों के कारण अव्यवस्था और बुनियादी सुविधाओं का अभाव है। लोगों को यहां घूमने में मुश्किलें हो रही हैं, खासकर...
मुजफ्फरपुर। इस बार त्योहारी मौसम में लेक फ्रंट पर सैर-सपाटा करने वालों का मजा किरकिरा होगा। कछुआ गति से चल रहे बेतरतीब निर्माण कार्य के कारण लेक फ्रंट पर अव्यवस्था है, जिससे यहां सैर-सपाटे का दायरा सिकुड़ गया है। पिछले वर्ष नए साल के मौके पर शहरवासियों को लेक फ्रंट का तोहफा मिला था। कर्बला से सटे लेक-1 को लोगों को लिए खोला गया। बैठने व घूमने से लेकर सेल्फी प्वाइंट तक की व्यवस्था की गई। यहां घूमने आने वाले लोगों का कहना है कि बीते साल पर्व और अन्य विशेष मौकों पर तो यहां भीड़ जुटी थी, लेकिन इस बार यहां पर सैर-सपाटे लायक स्थिति नहीं है।

सेल्फी प्वाइंट वाले हिस्से को छोड़ कर अधिकतर जगहों पर बुरा हाल है। कर्बला से सिकंदरपुर स्टेडियम के बीच मेन रोड के दोनों तरफ लेक-1 का अधिकतर काम पूरा होने के बाद अब लेक फ्रंट के किनारे वाले हिस्से को काटकर काम हो रहा है। मौके पर गहरा गड्ढा है। तीन फीट से अधिक ऊंचा मिट्टी का ढेर लगा है। पिछले 10 दिनों से यहां पर पोकलेन लगा हुआ है। उसके आगे हाल ही में नाला निर्माण को लेकर काटा गया था। दूसरी ओर भी नाले को लेकर टाइल्स-कंक्रीट वाले हिस्से को काटा गया है। बड़े हिस्से में कपड़ा टांगने वाला बांस का टाना लगा हुआ है। सड़क के दोनों ओर दो प्वाइंट पर लोगों के प्रवेश करने के रास्ते को टीन का शेड लगाकर बंद कर दिया गया है। ऐसे में सिर्फ सेल्फी प्वाइंट वाले हिस्से में ही लोग पहुंच रहे हैं। बड़ी संख्या में लोग लौट जा रहे हैं। लेक फ्रंट पर समय बिताने के लिए दूसरी बार परिवार के साथ रविवार को पहुंचे शिवेंद्र गुप्ता और उनकी पत्नी अंजलि को निराशा हुई। कहा कि यहां अभी बुनियादी सुविधाओं का अभाव है। सेल्फी लेने का इंतजाम तो है, लेकिन शौचालय और आरओ वाटर जैसी सबसे जरूरी सुविधा बहाल नहीं हुई है। इसके चलते खासकर महिलाओं और बच्चों को अधिक परेशानी होती है। बाहर सड़क किनारे कुछ फुटपाथी दुकानें खुली हैं, लेकिन वहां जरूरत के सभी सामान नहीं मिलते। बच्चों को भी भौग-दौड़ करने के लिए पर्याप्त जगह नहीं है।
लेक दो और तीन के हिस्से में जारी काम के कारण जगह-जगह निर्माण सामग्री, कियोस्क आदि रखे हुए हैं। साथ ही गंदगी भी है। फिर भी लेक दो के एरिया में बने छठ घाट के आसपास कुछ लोग घूमने-फिरने या मनोरंजन के लिए पहुंच रहे हैं। लेक फ्रंट पर आए लोगों ने बताया कि तेज हवा चलने पर लेक फ्रंट में धूल भरी आंधी जैसी स्थिति उत्पन्न हो जाती है। तब सांस लेना भी मुश्किल होता है। मरीन ड्राइव रोड पर धूल की मोटी परत बिछी है। खासकर लेक दो एरिया में संगम चौक से आरएस कॉलेज होते हुए रिमांड होम के पहले तक काफी बुरा हाल है। वाहनों के गुजरने पर भी धूल का गुबार उठता है। हद तो यह कि एनजीटी के नियमों का भी पालन नहीं किया जा रहा है। कार्यस्थल पर ग्रीन कवर की घेराबंदी के अलावा पानी का छिड़काव नहीं किया जा रहा है। इसके कारण हालात बदतर हैं। शुभम, वैभव कुमार ने बताया कि दुर्गंध के कारण लेक के किनारे बनी सीढ़ियों या चेयर पर बैठना मुश्किल हो जाता है। पानी साफ नहीं है। गंदगी के कारण काफी बदबू आती है। लेक एक में यह समस्या अधिक है। लेक एक के पानी को पिछले साल मानसून के पहले ही बदला जाना था। लेकिन, इस साल मानसून बीत जाने के बावजूद पानी उसी तरह है। नतीजतन घूमने आए लोगों के उत्साह पर गंदगी और बदबू पानी फेर देती है।
बोले जिम्मेदार :
सिकंदरपुर लेक फ्रंट के सौंदर्यीकरण का काम तेजी से चल रहा है। स्मार्ट सिटी के स्तर से लगातार मॉनीटरिंग की जा रही है। त्योहार से पहले साफ-सफाई की मुकम्मल व्यवस्था सुनिश्चित कराई जाएगी। लापरवाही या देरी को लेकर निर्माण एजेंसी के खिलाफ विलंब शुल्क (एलडी) के साथ ही जुर्माना की कार्रवाई भी की गई है।
- निर्मला साहू, मेयर सह डायरेक्टर, एमएससीएस

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