
बाईपास पर हो ज्यादा अंडरपास निर्माण तो हादसों में न जाए जान
मुजफ्फरपुर-हाजीपुर बाईपास का निर्माण पूरा होने के बाद, स्थानीय गांवों में कई समस्याएं उत्पन्न हुई हैं। सड़क सुरक्षा, जलजमाव और दुर्घटनाएं मुख्य मुद्दे बन गए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि बाईपास ने सुविधाओं को बढ़ाया है, लेकिन इसके कारण उन्हें यात्रा में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
मुजफ्फरपुर। लंबे इंतजार के बाद मुजफ्फरपुर-हाजीपुर बाईपास का निर्माण पूरा होना जिले के लिए बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। वहीं, 17 साल बाद इसका काम पूरा होने से इसके किनारे बसे गांव के लोगों के सामने कई तरह की समस्याएं भी खड़ी हो गई हैं। बाईपास बनने के पहले जहां मुख्य समस्याओं में भूमि अधिग्रहण का मुआवजा और विस्थापन शामिल था, वहीं निर्माण पूरा होने के बाद वाहनों की अनियंत्रित रफ्तार के कारण दुर्घटना, एक ही गांव के बीच संपर्क, बाईपास का साइड फ्लैंक धंसना जैसे गुणवत्ता दोष और सड़क सुरक्षा के अलावा जलजमाव जैसी बुनियादी सुविधाओं से करीब तीन दर्जन गांवों के लोग जूझ रहे हैं।
लोगों का कहना है कि जहां-जहां जरूरत है, वहां अंडरपास और सुरक्षा के इंतजाम हों तो बाइपास पर सफर आनंददायक हो सकेगा। मुजफ्फरपुर-हाजीपुर बाईपास चालू होने से शहर के अंदरूनी इलाकों में यातायात का दबाव कम हुआ है, लेकिन अब भी रेवा रोड में जाम की स्थिति बनने पर बाईपास से जुड़े गांवों में भारी वाहनों का प्रवेश अब आम हो गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इससे आए दिन होनेवाली दुर्घटना से ग्रामीण सहमे रहते हैं। गांवों की सड़कों को बाईपास से जोड़ने वाले रोड पर खतरनाक मोड़ से पिछले छह महीनों में एक दर्जन से अधिक दुर्घटनाएं हो चुकी हैं, जिनमें 15 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है। वहीं, फोरलेन पर भले ही स्पीड लिमिट 80 किलोमीटर प्रति घंटा तय कर दी गई है, लेकिन चारपहिया वाहनों को 120 किमी की स्पीड से दौड़ाते चालकों को देखा जा सकता है। इस कारण भी पिछले दिनों कई सड़क दुर्घटनाएं हुई हैं। स्थानीय लोगों के लिए विकास और सुविधाओं के साथ-साथ इन मुद्दों का समाधान भी मायने रखता है। स्थानीय सर्वेश चौधरी, सुबोध शर्मा, प्रमोद चौधरी कहते हैं कि 17 किलोमीटर लंबे बाईपास का निर्माण होने से बेशक सुविधाएं बढ़ी हैं, लेकिन इनका फायदा अधिकतर बाहरी लोगों को हो रहा है। स्थानीय लोगों को इससे लाभ के साथ-साथ नुकसान भी है। इस बाईपास के किनारे 40 से अधिक गांव बसे हैं। कई गांवों को यह सड़क दो हिस्सों में बांटती है। ऐसे में एक ही गांव में एक जगह से दूसरी जगह जाने के लिए 4 से 6 किमी की दूरी तय करनी पड़ रही है, क्योंकि एक अंडरपास से दूसरे अंडरपास की दूरी न्यूनतम 7 से 8 किलोमीटर है। इस कारण सबसे अधिक परेशानी महिलाओं और स्कूली बच्चों को है। महिलाओं को एक घर से दूसरे घर तक आना-जाना कठिन हो गया है। वहीं, बच्चों को भी स्कूल जाने में परेशानी होती है। खासकर इस इलाके में एक ही हाईस्कूल होने के कारण आसपास के एक हजार से अधिक बच्चों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। पैदल चलने वाले ग्रामीण दूरी अधिक होने के कारण कई बार बाईपास पर आकर दूसरी तरफ जाने का प्रयास करते हैं। ललन ठाकुर, राजेश कुमार, रीना देवी व अशोक साह कहते हैं कि गांव से बाईपास तक आनेवाली सड़क काफी नीची है। इस कारण गांव की सड़क से बाईपास पर चढ़ते समय अंधा मोड़ जैसी स्थिति बन जाती है। इस कारण अधिक गति से बाईपास पर चलने वाले वाहनों की टक्कर गांव से बाईपास पर आनेवाले वाहनों से होती रहती है। अभी कुछ दिन पहले ऐसी ही स्थिति बनी थी, जिसमें मधुबनी के पास दो वाहनों की जबरदस्त टक्कर में आठ लोगों की जान चली गई थी। दोनों वाहनों के चालकों के एक दूसरे को देखने में असमर्थ रहने के कारण यह दुर्घटना हुई थी। इस दुर्घटना के बाद डीएम ने निरीक्षण के दौरान इसे ब्लैक स्पॉट घोषित कर साइनेज लगाने का निर्देश दिया था, लेकिन अभी तक कुछ नहीं हुआ। हाजीपुर-मुजफ्फरपुर बाईपास पर यातायात अब पूरी तरह से परवान पर है, लेकिन यातायात को दोनों छोर पर नियंत्रित करने के लिए कोई खास उपाय नहीं किए गए हैं। इस कारण दोनों छोर पर ब्लैक स्पॉट की स्थिति बन गई है। पहाड़पुर वाले छोर पर एनएच 27 से जुड़नेवाली जगह पर अब एक तिराहे का निर्माण तो कर दिया गया है, लेकिन यातायात नियंत्रण को कोई उपाय नहीं दिखता है। शिवशंकर चौधरी, शंकर राय, ध्रुवदेव कुमार, अशोक कुमार झा कहते हैं कि कहने के लिए यातायात सिग्नल लगाए गए हैं, लेकिन वे सही तरीके से काम नहीं करते हैं। लगातार पीली बत्ती जलती है। वाहन चालक अपने हिसाब से वाहनों को नियंत्रित कर चलाते हैं। यहां दुर्घटना को रोकने के लिए यातायात नियंत्रित करना अति आवश्यक है। इसके लिए यातायात पुलिस की तैनाती की जानी चाहिए। नसीमा, सुमित कुमार, सूर्य कुमार और शिवम कुमार ने बताया कि पूरे बाईपास पर अधिकांश समय सन्नाटा पसरा रहता है। इसका लाभ उठाकर असामाजिक तत्व आसानी से वारदात को अंजाम दे देते हैं। वे आए दिन वाहनों को रोककर चालकों और यात्रियों से लूटपाट तो करते ही हैं, साथ ही स्थानीय लोगों को भी अपना शिकार बनाने से नहीं चूकते। पिछले एक साल में लूटपाट की 20 से अधिक घटनाएं हो चुकी हैं, लेकिन पुलिस की कार्रवाई उन मामलों में अभी तक सामने नहीं आई है। ऐसे में पूरी दूरी में एक अस्थायी पुलिस चेकपोस्ट बनाकर लगातार पुलिस गश्ती और चेकिंग की जानी चाहिए, ताकि बाईपास पर बढ़ते अपराध पर लगाम लग सके। बोले जिम्मेदार लोगों की शिकायतों पर सड़क सुरक्षा समिति की बैठक में चर्चा की गई थी। उसके आधार पर अंडरपास बनाने के लिए एनएचएआई मुख्यालय से आग्रह किया गया था, जिसे मंजूरी मिल चुकी है। बाकी दोनों छोर पर बने चौराहे पर जल्द ही यातायात पुलिस की तैनाती का प्रयास किया जाएगा। सुरक्षा को लेकर संबंधित थानेदानों को गश्त करने का निर्देश दिया गया है। सुब्रत कुमार सेन,डीएम

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