होम्योपैथी दवा की बोतलों में लाई जा रही 325 लीटर स्प्रिट जब्त

Newswrap हिन्दुस्तान, मुजफ्फरपुर
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मुजफ्फरपुर में उत्पाद विभाग ने नकली शराब बनाने के लिए मंगाई गई स्प्रिट की खेप को जब्त किया है। एक धंधेबाज को गिरफ्तार किया गया है, जबकि अन्य फरार हैं। शराब कारोबारी मुर्गा फार्म की आड़ में नकली ब्रांडेड शराब तैयार कर रहे थे।

होम्योपैथी दवा की बोतलों में लाई जा रही 325 लीटर स्प्रिट जब्त

मुजफ्फरपुर, हिन्दुस्तान प्रतिनिधि। उत्पाद विभाग की टीम ने नकली शराब बनाने के लिए मंगाई गई स्प्रिट की खेप को जब्त किया है। मौके से एक धंधेबाज को भी गिरफ्तार किया है। स्प्रिट की खेप को होम्योपैथी दवा का लेबल लगे बोतल में लाया गया था। सभी बोतलों पर व्हीजल होम्योपैथी सिपिया छह लिखा हुआ है। उत्पाद विभाग ने यह कार्रवाई पताही हवाईअड्डा और करजा के महमदपुर खाजे स्थित एक मुर्गा फार्म एवं झोपड़ी में छापेमारी कर की है।

गिरफ्तारी की जानकारी

उत्पाद इंस्पेक्टर दीपक कुमार ने बताया कि गिरफ्तार धंधेबाज की पहचान मुशहरी के सलहा के सूरज कुमार के रूप में हुई है, जबकि सुमित पटेल फरार हो गया। सुमित के मुर्गा फार्म और झोपड़ी से स्प्रिट जब्त की गई। इस मामले में मास्टरमाइंड मुशहरी का राजा कुमार है। दूसरे प्रदेश से वह लगातार स्प्रिट की खेप मंगाकर सप्लाई करता है। मुशहरी में भी उसके खिलाफ मामला दर्ज है। जब्त स्प्रिट 325 लीटर बताई गई है। उत्पाद इंस्पेक्टर ने बताया कि गोपालगंज से बस से स्प्रिट की खेप मंगाई गई थी। इसकी सूचना मिलने पर छापेमारी की गई। बैरिया में बस से इसे अनलोड कर आटो से आपूर्ति करने धंधेबाज ले जा रहा था। पताही हवाईअड्डा के पास घेराबंदी कर उसे दबोचा गया। बोतल खोलकर जांच की गई तो इसमें से स्प्रिट मिला। ऑटो चालक सूरज को दबोचने के बाद उससे पूछताछ की गई। उसने सुमित पटेल के ठिकाने की जानकारी दी। वहां पहुंचकर टीम ने छापेमारी की तो बोरियो के पीछे छुपाकर रखी गई स्प्रिट मिली। वहां से नकली शराब बनाने का रैपर, लेबल, ढक्कन और भारी मात्रा में बोतल भी जब्त किया गया। इसके अलावा अलकोहल की मात्रा मापने वाला थर्मामीटर भी मिला।

तस्करों के तरीके

बताया जा रहा है कि शराब धंधेबाज स्प्रिट की सप्लाई के लिए किसी हाईटेक गैजेट का नहीं, बल्कि एक रुपये के नोट और तेजपत्ता पर लिखे गुप्त नंबरों का इस्तेमाल कर रहे थे। गिरफ्तार चालक की तलाशी के दौरान उत्पाद विभाग टीम को उसके पास से 1 रुपये का नोट और एक तेजपत्ता मिला, जिसपर कुछ खास नंबर लिखे हुए थे। पूछताछ में खुलासा हुआ कि तस्करों का नेटवर्क इसी नंबर को कोड के रूप में इस्तेमाल करता था। स्प्रिट की डिलीवरी तभी होती थी, जब प्राप्तकर्ता इन नंबरों को सही तरीके से डिकोड कर मिलान करता था। तस्करों का यह तरीका सुरक्षा एजेंसियों की आंखों में धूल झोंकने के लिए अपनाया गया था।

नकली शराब का निर्माण

जांच में यह बात सामने आयी है कि शराब कारोबारी मुर्गा फार्म की आड़ में झोपड़ी में नकली ब्रांडेड विदेशी शराब तैयार कर रहे थे। इसके लिए होम्योपैथी दवा के नाम पर स्प्रिट मंगाई जाती थी। बाद में उसी स्प्रिट से शराब बनाकर विदेशी शराब की बोतलों में पैक कर बाजार में सप्लाई की जाती थी।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मुजफ्फरपुर में स्प्रिट की खेप कब जब्त की गई?
उत्पाद विभाग की टीम ने नकली शराब बनाने के लिए मंगाई गई स्प्रिट की खेप को जब्त किया है।
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