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बंध्याकरण ऑपरेशन में महिला की मौत के पांच साल बाद डॉक्टरों पर दबिश

बंध्याकरण ऑपरेशन में महिला की मौत के पांच साल बाद डॉक्टरों पर दबिश

संक्षेप:

मुजफ्फरपुर में बंध्याकरण ऑपरेशन के दौरान महिला की मौत के मामले में पांच साल बाद दो चिकित्सकों पर पुलिस ने कार्रवाई तेज कर दी है। डॉ. सुधीर कुमार और डॉ. पूजा कुमारी ने गिरफ्तारी से बचने के लिए हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत की याचिका दायर की, जिसे हाईकोर्ट ने मंजूर करते हुए सरेंडर करने का आदेश दिया।

Jan 23, 2026 01:46 am ISTNewswrap हिन्दुस्तान, मुजफ्फरपुर
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मुजफ्फरपुर, प्रमुख संवाददाता। बंध्याकरण ऑपरेशन में महिला की मौत मामले में पांच साल के बाद मोतीपुर पीएचसी के दो तत्कालीन चिकित्सकों पर पुलिस ने दबिश बढ़ा दी है। गिरफ्तारी के भय से चिकित्सकों ने हाईकोर्ट से अग्रिम जमानत की मांग की है। मामले में नामजद आरोपित पटना के कंकड़बाग थाना के संपतचक स्थित एमआईजी कॉलोनी निवासी डॉ. सुधीर कुमार ने जिला कोर्ट से अग्रिम जमानत खारिज होने के बाद हाईकोर्ट में अपील की। हाईकोर्ट ने मंजूर करते हुए आठ सप्ताह के अंदर न्यायालय में सरेंडर कर नियमित जमानत लेने का आदेश दिया है। मोतीपुर थाना में 15 सितंबर 2020 को गैर इरादतन हत्या की धारा में मोतीपुर पीएचसी में तैनात रहे चिकित्सक डॉ. सुधीर कुमार और डॉ. पूजा कुमारी को नामजद आरोपित बनाते हुए एफआईआर दर्ज की गई थी।

इसके वादी कथैया थाना के ठिकहां निवासी रामप्रवेश राय ने ऑपरेशन में लापरवाही के कारण पत्नी अनीता देवी की मौत का आरोप लगाया था। उसने पुलिस को बताया कि 14 सितंबर 2020 को उसकी पत्नी परिवार नियोजन का ऑपरेशन कराने के लिए मोतीपुर पीएचसी आई थी। उसी रात को साढ़े सात बजे डॉ. सुधीर और डॉ. पूजा ने अनीता का ऑपरेशन किया। ऑपरेशन में दोनों चिकित्सक और अन्य की लापरवाही के कारण अनीता की मौत कुछ देर के बाद ही हो गई। उसकी मौत के बाद परिजनों व ग्रामीणों ने जमकर हंगामा किया था। रामप्रवेश ने आरोप लगाया था कि जब उसने पत्नी की मौत के बारे में डॉक्टर से जानकारी लेनी चाही तो उसके साथ दुर्व्यवहार किया गया। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम कराया और बिसरा को जांच के लिए भेजा। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर पुलिस ने मामले को साक्ष्य पाते हुए चिकित्सकों पर गिरफ्तारी की दबिश बढ़ा दी है। इस कारण पांच साल से लंबित इस केस में चिकित्सकों ने गिरफ्तारी से बचने के लिए अग्रिम जमानत की अर्जी दाखिल की है। जिला अदालत ने मामले को गंभीरता और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर दोनों चकित्सकों को अग्रिम जमानत देने से इंकार कर दिया। इसके बाद डॉ. सुधीर ने हाइकोर्ट में अपील अर्जी दाखिल की थी। इस पर सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने बीते 15 जनवरी को आदेश दिया कि डॉक्टर आठ सप्ताह के अंदर सीजेएम मुजफ्फरपुर न्यायालय में सरेंडर कर नियमित जमानत कराएं।

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