विद्यार्थियों ने बज्जिका कला से संबंधित चित्रों को उकेरा
मुजफ्फरपुर में वसंतोत्सव का आयोजन हुआ, जिसमें हस्त कला एवं बज्जिका चित्रकला कार्यशाला का आयोजन किया गया। विभिन्न स्कूलों के लगभग 100 विद्यार्थियों ने इसमें भाग लिया और बज्जिका कला के चित्र बनाए। जिला कला अधिकारी सुष्मिता झा ने बज्जिका आर्ट की सरलता और इसकी सांस्कृतिक महत्वता पर प्रकाश डाला।

मुजफ्फरपुर, प्रमुख संवाददाता। जिला प्रशासन एवं कला एवं संस्कृति विभाग के तत्वावधान में शनिवार को जिला परिषद सभागार में वसंतोत्सव का आयोजन हुआ। इस दौरान एक दिवसीय हस्त कला एवं बज्जिका चित्रकला कार्यशाला हुई। इसमें विभिन्न स्कूलों के विद्यार्थियों ने बज्जिका कला से संबंधित कई चित्रों को उकेरा। इस दौरान विद्यार्थियों ने जीवन मूल्यों का उत्सव भी मनाया। इसका उद्घाटन करते हुए जिला कला व संस्कृति अधिकारी सुष्मिता झा ने कहा कि बज्जिका आर्ट की मुख्य विशेषता यह है कि इसमें चित्र बहुत ही सरल रूप से बनते हैं। यह अलंकृत नहीं होता। बज्जिका आर्ट में देवी-देवताओं के चित्रण के साथ दैनिक दिनचर्या की पेंटिंग अधिक रहती हैं।
कार्यशाला प्रशिक्षक किरण शर्मा, विनिता सिंह, राजीव कुमार ने कहा कि बड़ी संख्या में बच्चे इससे जुड़ रहे हैं। शृंगारी पेंटिंग बज्जिका आर्ट में अधिक होती है। इसे देवताओं के घर को सजाना भी कहते हैं। कालांतर में यही कला दीवार पर सजकर भित्ति चित्र/कला के नाम से प्रसिद्ध हुई। इसके बाद अल्पना बनाने का प्रचलन प्रारंभ हुआ। कहा कि पहले चौरेठा और सिंदूर से घर की दीवारों पर चित्रकारी होती थीं। जैसे-जैसे हम विकास की सीढ़ियां चढ़ते गए वैसे-वैसे चित्रकला के क्षेत्र में भी विकसित होते गए। अतिथियों ने कहा कि वसंतोत्सव केवल एक सांस्कृतिक आयोजन नहीं, बल्कि हमारी लोक परंपराओं, कला और जीवन मूल्यों का उत्सव है। कार्यशाला में विभिन्न विद्यालयों के करीब 100 विद्यार्थियों ने भाग लिया। उनको पुरस्कृत भी किया गया। बताया गया कि आने वाले समय में स्कूलों में भी छात्रों के लिए कार्यशाला आयोजित होंगी।
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