Muzaffarpur News: टिपर घोटाले में तत्कालीन नगर आयुक्त के पेंशन में पांच प्रतिशत की कटौती
Muzaffarpur News: मुजफ्फरपुर के नगर निगम में ऑटो टिपर की खरीद में घोटाले के लिए तत्कालीन नगर आयुक्त रंगनाथ चौधरी की पेंशन में पांच प्रतिशत स्थाई कटौती की जाएगी। यह निर्णय सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा लिया गया है, जो आठ साल पुराना मामला है। जांच में अनियमितताएं पाए जाने के बाद यह कदम उठाया गया है।

Muzaffarpur News: मुजफ्फरपुर। वरीय संवाददाता नगर निगम में ऑटो टिपर की खरीद में हुए घोटाले में दोषी पाए गए तत्कालीन नगर आयुक्त रंगनाथ चौधरी के पेंशन में पांच प्रतिशत स्थाई कटौती होगी। बिहार लोक सेवा आयोग की सहमति मिलने के बाद इस संबंध में सामान्य प्रशासन विभाग ने संकल्प जारी कर दिया है। यह मामला आठ साल पुराना है।
घोटाले की पृष्ठभूमि
बिहार प्रशासनिक सेवा के अधिकारी व जिले के तत्कालीन एडीएम रंगनाथ चौधरी आठ फरवरी 2017 से 18 जनवरी 2018 तक मुजफ्फरपुर नगर आयुक्त के अतिरिक्त प्रभार में थे। इसी दौरान नगर निगम द्वारा कचरा उठाव के लिए ऑटो टिपर की खरीदारी को लेकर टेंडर निकाला गया। फिर तमाम प्रावधानों को ठेंगा दिखाते हुए चहेते एजेंसी को टेंडर दिया गया। सबसे कम दर वाले (एल-1) आवेदक के बदले दूसरे सबसे कम दर (एल 2) को आपूर्ति की जिम्मेवारी दे दी। वाहनों एमवीआई (मोटर वाहन निरीक्षक) की रिपोर्ट और वाहनों की गुणवत्ता की तकनीकी जांच कराए बिना ही आनन-फानन में आपूर्तिकर्ता को 1.52 करोड़ का भुगतान भी कर दिया। जांच में पता चला कि 16 जनवरी 2018 को नए नगर आयुक्त की पदस्थापना की अधिसूचना जारी होने के दिन ही रंगनाथ चौधरी ने विभागीय मार्गदर्शन नहीं लेकर तत्कालीन मेयर से अनुमोदन प्राप्त करके भुगतान की प्रक्रिया पूरी करवा दी।
रिटायरमेंट के बाद शुरू हुई विभागीय कार्यवाही
रंगनाथ चौधरी 31 जनवरी 2019 को सेवानिवृत्त हो गए थे। इसके बाद उनके विरुद्ध बिहार पेंशन नियमावली के नियम 43(बी) के तहत विभागीय कार्यवाही शुरू की गई। संचालन पदाधिकारी के समक्ष दिए गए साक्ष्य व गवाहों के आधार पर आरोप सच पाए गए। सरकार ने आरोपी रंगनाथ चौधरी से लिखित स्पष्टीकरण मांगा। हालांकि वे भुगतान में जल्दबाजी और प्रक्रिया संबंधी अनियमितताओं को लेकर संतोषजनक जवाब नहीं दे सके। संचालन पदाधिकारी (मुख्य जांच आयुक्त) की जांच रिपोर्ट और सामान्य प्रशासन विभाग की समीक्षा में यह तथ्य भी पता चला कि टीपर खरीद प्रक्रिया में गड़बड़ी को लेकर विभाग में शिकायत पहले ही दर्ज हो चुकी थी। साथ ही एमवीआई रिपोर्ट भी उपलब्ध नहीं था। इसके बावजूद भुगतान में असामान्य जल्दबाजी दिखाई गई।


