Most children die from diarrhea-pneumonia in Tirhut - तिरहुत में डायरिया-निमोनिया से बच्चों की सर्वाधिक मौत DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

तिरहुत में डायरिया-निमोनिया से बच्चों की सर्वाधिक मौत

पूरे राज्य में हर साल निमोनिया व डायरिया से एक लाख 20 हजार बच्चों की मौत हो जाती है। इसमें भी तिरहुत प्रमंडल में 60 फीसदी से अधिक बच्चे मरते हैं। इसका मुख्य कारण है जागरूकता की कमी और बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं का गांवों तक नहीं पहुंचना। आज भी प्रमंडल की एक बड़ी आबादी है जहां इंफ्रास्ट्रक्चर का सही विकास नहीं हुआ है। उक्त जानकारी मंगलवार को क्लब रोड स्थित एक होटल में यूनिसेफ की ओर से दी गई। मौका था यूनिसेफ इंटीग्रेटेड एक्शन प्लान फॉर प्रीवेंशन एंड मैनेमेंट ऑफ निमोनिया विषय पर आयोजित कार्यशाला का।

कार्यक्रम का उद्घाटन तिरहुत प्रमंडल के आयुक्त नर्मदेश्वर लाल ने किया। उन्होंने कहा कि यूनिसेफ की ओर से जो आंकड़े दिखाए जा रहे हैं, उसके अनुसार अब भी इन बीमारियों से निपटना प्रमंडल के लिए चुनौती है। यूनिसेफ के सहयोग से इसका उन्मूलन आवश्यक है। उन्होंने सभी जिलों के सीएस व डीपीओ को जिंक टैबलेट व ओरआरएस के पैकेट आशा के जरिए काफी संख्या में वितरित करने को कहा। साथ ही शिशु मृत्युदर की सही तरीके से समीक्षा करने को कहा। वहीं, प्रमंडल के अपर निदेशक डॉ. विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि डायरिया व निमोनिया के उन्मूलन के लिए लिए जो कार्यक्रम हैं, उस पर बेहतर काम होगा। पहले से ही इस पर कार्ययोजन बनी है। कई जिलों में डायरिया पखवाड़ा चलाया गया है। एएनएम, आशा व आंगनबाड़ी सेविकाओं का सहयोग लिया जा रहा है।

यूनिसेफ के हेल्थ के हेड डॉ. सैयद हुब्बे अली ने कहा कि पूरे राज्य में मौजूद समय में 19 हजार निमोनिया व 13 हजार डायरिया से बच्चों की मौत हो रही है। आधुनिक मेडिकल विज्ञान के होते इतनी मौत नहीं होनी चाहिए। इसको देखते हुए यूनिसेफ ने इंटीग्रेटेड एक्शन प्लान फॉर प्रीवेंशन एंड मैनेमेंट ऑफ निमोनिया शुरू की है। जिलावार इस बारे में डाटा उपलब्ध करा दिया गया है। मौके पर न्यूट्रेशन विशेषज्ञ डॉ. शिवानी धार, यूनिसेफ के आशीष कुमार व राजेश कुमार ने प्रोजेक्टर के जरिए प्रमंडल में डायरिया व निमोनिया की स्थिति के बारे में बताया। संचालन व धन्यवाद ज्ञापन रीजनल प्रोग्राम अफसर प्रशांत कुमार ने किया। मौके पर मुजफ्फरपुर, सीतामढ़ी, शिवहर, वैशाली, पूर्वी व पश्चिमी चंपारण के सिविल सर्जन व अन्य मेडिकल अधिकारी कर्मचारी उपस्थित थे।

कार्यशालाकी प्रमुख बातें:

-समय पर बच्चों को मेडिकल सुविधा नहीं मिलती है

-लगातार वितरण के लिए जिंक टैबलेट उपलब्ध नहीं रहता

-नवजात से पांच साल तक के बच्चों को पोषक तत्व नहीं मिलता

-कुपोषण से पीड़ित बच्चों की संख्या बढ़ रही है

-प्रमंडल के जिलों में 55 से 60 फीसदी बच्चे निमोनिया व डायरिया से की चपेट में आते हैं

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:Most children die from diarrhea-pneumonia in Tirhut