राष्ट्रीय हेल्थ हैकाथॉन में एमआईटी को चौथा स्थान
मुजफ्फरपुर के एमआईटी की एसएआई टीम ने आइडिया वन राष्ट्रीय हेल्थ हैकाथॉन में चौथा स्थान प्राप्त किया। टीम ने पानी में माइक्रोप्लास्टिक के खतरे पर एक कम लागत वाला समाधान पेश किया। यह बिहार के इंजीनियरिंग कॉलेजों की पहली भागीदारी है, जिसने राष्ट्रीय स्तर पर सफलता हासिल की।

मुजफ्फरपुर, प्रमुख संवाददाता। आइडिया वन राष्ट्रीय हेल्थ हैकाथॉन में एमआईटी देशभर में चौथे स्थान पर आया है। एमआईटी की टीम एसएआई ने बाजी मारी है। हैकाथॉन में 50 हजार से अधिक प्रतिभागी शामिल थे। पानी में माइक्रोप्लास्टिक के बढ़ते खतरे पर एमआईटी की टीम का प्रोजेक्ट था। टीम ने कम खर्च में इसका समाधान बताया, जिसने देशभर का ध्यान अपनी ओर खींचा। यह उपलब्धि न केवल संस्थान, बल्कि पूरे बिहार के लिए गौरव की बात बनी है। एसएआई टीम में श्याम कुमार (टीम लीडर), शिवानी कुमारी, हंसिका रानी, मोहित राज और सुमित कुमार शामिल थे। टीम ने पहले पुरी (ओडिशा) में आयोजित प्रस्तुति राउंड के लिए क्वालीफाई किया।
इसके बाद उसे देश की शीर्ष 18 टीमों में चुना गया। 20-21 नवंबर को भारत मंडपम, नई दिल्ली में ग्रैंड फिनाले का आयोजन हुआ। कड़े मूल्यांकन और कई चरणों की प्रतियोगिता के बाद टीम ने राष्ट्रीय स्तर पर चौथा स्थान प्राप्त किया। पहली बार बिहार से किसी इंजीनियरिंग कॉलेज की भागीदारी हैकाथॉन के संस्थान समन्वयक एवं मेंटर प्रो. आशीष कुमार ने बताया कि बिहार के किसी भी इंजीनियरिंग कॉलेज की यह पहली भागीदारी थी। एमआईटी ने सीधे राष्ट्रीय मंच पर अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई है। प्राचार्य प्रो. एमके झा एवं संस्थान के सभी फैकल्टी ने टीम के सभी सदस्यों को बधाई दी। प्राचार्य ने कहा कि यह उपलब्धि पूरे राज्य की तकनीकी शिक्षा जगत के लिए प्रेरणादायक है। आइडिया ने दिलाया राष्ट्रीय स्तर पर स्थान: टीम को पानी में माइक्रोप्लास्टिक के बढ़ते खतरे पर अपना समाधान देना था। टीम ने पानी में बढ़ते माइक्रोप्लास्टिक और अन्य प्रदूषकों की समस्या को चुना, जो मानव स्वास्थ्य, जलीय जीवों और पर्यावरण के लिए गंभीर खतरा है। वर्तमान परीक्षण विधियां महंगी, धीमी और लैब पर निर्भर होने के कारण समय पर कार्रवाई मुश्किल हो जाती है। टीम ने उच्चस्तरीय समाधान दिया। एक पोर्टेबल, कम-खर्चीला, एआई-सक्षम माइक्रोप्लास्टिक डिटेक्शन सिस्टम का प्रस्ताव दिया, जो पानी में प्रदूषकों का रियल-टाइम, ऑन-साइट पता लगा सकता है। यह डिजिटल सिस्टम मोबाइल ऐप और वेब प्लेटफॉर्म से जुड़कर प्राधिकरणों तक तुरंत रिपोर्टिंग की सुविधा देता है। टीम की यह उपलब्धि बिहार के नवाचार और तकनीकी प्रतिभा को राष्ट्रीय स्तर पर मजबूती से प्रस्तुत करती है।

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