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22 अक्तूबर, 2020|12:54|IST

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भारी बारिश से बर्बाद हो रही मक्का फसल, मुसीबत में किसान

भारी बारिश से मक्का किसान मुसीबत में घिर गए हैं। लगातार हो रही बारिश से खड़ी फसल बर्बाद होने लगी है। मक्का में लगा दाना खेतों में सड़ने लगा है। किसान पिछले चार महीने से फसल तैयार करने में खून-पसीने एक किये हुए थे, लेकिन अब फसल बर्बाद होते देख बेचैन हो उठे हैं।
किसानों को समझ में नहीं आ रहा है कि अब वह क्या करे। आखिर फसल काटकर ले जाए तो कहां ले जाए। इतने पर भी किसानों की मुसीबत खत्म नहीं हो रही। मक्के की खड़ी फसल वाले खेतों में चारों ओर पानी भरा है। इस स्थिति में कोई मजदूर मक्का काटने के लिए तैयार नहीं हो रहा है। किसान बेबस होकर फसल बर्बाद होते देख रहे हैं। पानी में मक्का का पौधा होने से वह कमजोर होकर खेतों में गिरने लगा है। मक्का उपजाने में अपनी पूरी जमा-पूंजी खर्च कर चुके किसान हर दिन खेतों के सामने आकर फसलों को बर्बाद होते देख आंसू बहाते हैं। बोचहां, कटरा व सकरा समेत करीब आधा दर्जन प्रखंडों के सैकड़ों मक्का किसान पर आफत बनकर बारिश बरस रही है। किसान ‘हिन्दुस्तान’ अपना दर्द साझा करते हुए भावुक हो जा रहे थे।

आस पर खरीदा ट्रैक्टर,अब ईएमआई चुकाने पर आफत
12 एकड़ में मक्के की खेती करने वाले सर्फुउद्दीनपुर के किसान ललित चौधरी फसल बर्बाद होने से काफी दुखी हैं। खेत में चारों ओर से तीन से चार फीट पानी लगा है। लाखों रुपये का मक्का अब खेत में ही सड़ने लगा है। मक्के की अच्छी उपज होने की आस में उन्होंने फाइनेंस पर ट्रैक्टर खरीदा था, पर अब ईएमआई नहीं चुका पा रहे हैं। उम्मीद लगाए बैठे थे कि मक्के की फसल अच्छी है। इसे बेचकर ट्रैक्टर का कर्ज उतार लेंगे, लेकिन कुदरत को कुछ और ही मंजूर था। जब फसल घर ले जाने की बारी आयी तो आफत बनकर बारिश ने बस कुछ बर्बाद कर दिया।

पिछले वर्ष सूखे ने किया कंगाल, अब बारिश उजाड़ने पर तूला
मक्का किसानों ने ‘हिन्दुस्तान’ को अपनी पीड़ा बताते हुए कहा कि पिछले वर्ष मक्का के पौधे अच्छे निकले थे, लेकिन पूरे सीजन ऐसा सूखा पड़ा कि अधिकांश पौधे खेतों में जलकर बर्बाद हो गए। किसानों ने बताया कि मक्का कैश क्रॉप है। सो सोचा कर्ज लेकर मक्का की खेती करते हैं, नुकसान की भरपाई हो जाएगी। इस वर्ष सबकुछ ठीक चल रहा था। उपज अच्छी होने की उम्मीद थी, लेकिन ऐन व्यक्त पर जब मक्का घर ले जाने का समय आया तो बारिश ने सबकुछ बर्बाद कर दिया। बारिश और हवा चलने से मक्का खेतों में गिर गए। किसानों ने बताया कि पिछले वर्ष आर्थिक रूप से पूरी तरह से कमजोर हो गए थे। इस बार की फसल बर्बादी से उजड़ने की कगार पर पहुंच गए हैं।

तीन साल से कर्ज लेकर कर रहे मक्का की खेती
सकरा के किसान रामबाबू ने बताया कि वह तीन साल से कर्ज लेकर मक्का लगा रहे हैं। इस बार उम्मीद थी कि फसल से फायदा मिलेगा। लेकिन तैयार फसल को बारिश से बर्बाद होते देख दिल दहल रहा है। उन्होंने बताया कि अब ऐसा लगता है कि खेती छोड़नी ही पड़ेगा। महाजनों का कर्जा वापस कैसे करेंगे।

नीलगाय से फसल को बचाना जंग जितने के बराबर  
किसान बताते हैं कि मक्का की फसल में लगातार 105-120 दिनों की मेहनत लगती है। किसी दिन इसकी देखभाल छोड़ नहीं सकते हैं। मक्का के लिए सबसे बड़ी मुसीबत है, इसे नीलगाय से बचाना। किसानों ने बताया कि रात-रात भर जागकर खेतों में मक्का फसल की रक्षा करते हैं। ऐसे हालात में जब फसल बर्बाद हो जाती है तो लगता है, जैसे घर में कोई बड़ा हादसा हो गया है। कुछ दिनों तक हंसना-खाना भी छोड़ देते हैं।

15 हजार हेक्टेयर में लगी है मक्के की फसल
जिले में 15 हजार हेक्टेयर में मक्के की फसल लगी है। कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार, फसल तैयार हो चुकी है। ऐसे में छिड़काव का असर कम पड़ेगा। बारिश रुकने से ही फसल बचायी जा सकती है। कृषि विज्ञान केंद्र की प्रमुख सह वरीय वैज्ञानिक अनुपमा कुमारी के अनुसार, कुछ हद तक कीटनाशक कार्बनडाईजीन फसल को सड़ने से बचा सकता है।  

कड़ी मेहनत और लाखों रुपये लागत लगाकर मक्का की फसल तैयार की थी। जब फसल को घर ले जाने की बारी आयी तो बारिश ने सबकुछ बर्बाद कर दिया। खेतों में पानी लगा है। मक्का पानी में गिर रहा है, जिससे दाना खराब हो रहा है। मक्का बेचकर ट्रैक्टर का लोन चुकाना था। अब सब खत्म हो गया।
ललित चौधरी, किसान, सर्फुउद्दीनपुर

दो एकड़ में मक्के की फसल लगाई थी। फसल तैयार हो गई थी। बारिश से सब नाश कर दिया। लगातार पानी पड़ने से मक्का का दाना सड़ने लगा है। दिन-रात जागकर मक्का की फसल को तैयार किया था। नीलगाय के आक्रमण से मक्का को बचाना जंग जीतने के बराबर है। लेकिन चार महीने का मेहनत बर्बाद हो गया।
किशोरी चौधरी, किसान, बोचहां

पिछले साल मक्का की खेती को सूखे ने बर्बाद कर दिया और इस बार बारिश ने सड़क पर ला दिया है। मक्का को लगाते समय क्या-क्या सोचा था। कैश क्रॉप होने के कारण चार एकड़ में मक्का लगाया था। सोचा था लागत निकालकर कुछ आमदनी हो जाएगी। लेकिन बारिश के कारण मक्का खेत में ही बर्बाद होने लगा है।
राजेश चौधरी, किसान, बोचहां
बारिश के कारण मक्का की फसल खराब होने की सूचना नहीं मिली है। सभी प्रखंड कृषि अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे अपने क्षेत्र में मक्का फसल क्षति की रिपोर्ट सौंपें।
-डॉ. केके वर्मा, जिला कृषि अधिकारी

 

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  • Web Title:Maize crop wasting due to heavy rains farmers in trouble