जिले के मनरेगा मजदूरों का 225 करोड़ बकाया
मुजफ्फरपुर में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के तहत जॉब कार्ड धारकों को मजदूरी और पक्के कार्यों का भुगतान नहीं मिल रहा है। 225.20 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान लंबित...

मुजफ्फरपुर, वरीय संवाददाता। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) में जॉब कार्ड धारकों को न तो मजदूरी मिल रही है और न पक्के कार्यों में लगे सामान के दाम। अधिकारियों ने काम तो करा लिया, लेकिन भुगतान नहीं करा पा रहे। जबकि, नियमानुसार जॉब कार्ड धारकों को सात दिनों के भीतर भुगतान करने का नियम है। योजना की हालत इतनी खराब है कि पक्के कार्यों का भुगतान भी डेढ़ वर्ष से फंसा है। जिला ग्रामीण विकास अभिकरण (डीआरडीए) के आकड़ों के अनुसार जिले में पिछले साल और इस साल अबतक मिलाकर मजदूरों की मजदूरी और पक्के कार्यों के बिल का 225.20 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान लंबित है।
विभागीय वेबसाइट पर शनिवार तक अद्यतन किए गए आंकड़ों के अनुसार साल 2024-25 में अकुशल मजदूरों के 4629 मस्टर रोल पर 2.15 करोड़ रुपये का भुगतान लंबित है। वहीं कुशल और अर्द्धकुशल मजदूरों को 871 मस्टर रोल के विरुद्ध 81.25 लाख रुपये का भुगतान किया जाना है। वहीं पक्के कामों के लिए 12813 बिल के विरुद्ध विभिन्न कार्य एजेंसियों पर 87.08 करोड़ रुपये की देनदारी है। इसमें सबसे अधिक कुढ़नी में ही मनरेगा के विभिन्न मदों में 24.50 करोड़ रुपये का भुगतान किया जाना है। लंबित भुगतान को लेकर दूसरे नंबर पर सरैया प्रखंड है। यहां करीब 11 करोड़ रुपये की देनदारी मजदूरी, पक्के कार्य के बिलों के भुगतान और कुशल एवं अर्द्ध कुशल श्रमिकों की मजदूरी मद में लंबित है। वहीं 2025-26 में अभी तक बकाए की रकम 135.16 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। इस साल भी बकाया रखने में कुढ़नी और सरैया प्रखंड सबसे उपर है। कुढ़नी में 36.45 और सरैया में 30.07 करोड़ रुपये विभिन्न मदों में बकाया है। इसको लेकर सकरा की सुनीता देवी, अकली देवी सहित एक दर्जन अन्य मनरेगा मजदूरों ने बताया कि पिछले साल से ही मनरेगा की मजदूरी का भुगतान अटका हुआ है। इस कारण अब भुखमरी की नौबत आ गई है। सुनीता कहती हैं कि मनरेगा अधिनियम में एक सप्ताह के अंदर श्रमिकों का भुगतान नहीं होने पर विभागीय जुर्माना और दंड का प्रावधान है, लेकिन डेढ़ साल से अधिक समय से भी मजदूरी फंसी हुई है। अधिकारी भुगतान में देरी का कारण केंद्र से फंड का नहीं मिलना बता रहे हैं। डीआरडीए के अधिकारी भी दबी जुबान से मानते हैं कि केंद्र सरकार से बजट न मिलने की वजह से भुगतान अटका हुआ है। अब मनरेगा श्रमिकों से काम करना भी बहुत कठिन हो रहा है, क्योंकि उन्हें किए गए कार्यों का मेहनताना नहीं मिल पा रहा। मनरेगा श्रमिक भी अब काम करने से कतरा रहे हैं। बयान किसी खास मजदूर की मजदूरी बकाया हो या खास मद का बिल बकाया होने की जानकारी मिलेगी तो उसका भुगतान कराने का प्रयास किया जाएगा। -श्रेष्ठ अनुपम, डीडीसी, मुजफ्फरपुर
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