भूमि अधिग्रहण विवादों को सीधे ऊपरी अदालत ले जाना समय की बर्बादी
मुजफ्फरपुर में परिवार न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश पीयूष प्रभाकर ने भूमि अधिग्रहण विवादों को सीधे हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट में ले जाने को समय की बर्बादी बताया। उन्होंने कहा कि पहले निचले स्तरों पर विवाद का निष्पादन होना चाहिए। कार्यशाला में जिला विधिक सेवा प्राधिकार की सचिव ने राजमार्गों के निर्माण और प्रभावित रैयतों के अधिकारों की रक्षा पर जोर दिया।

मुजफ्फरपुर, हिप्र। परिवार न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश पीयूष प्रभाकर ने कहा है कि राष्ट्रीय राजमार्गों के लिए भूमि अधिग्रहण के विवादों को सीधे हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट में ले जाना अनावश्यक समय की बर्बादी है। हाईकोर्ट व सुप्रीम कोर्ट का निर्देश है कि भूमि अधिग्रहण विवाद के मामले को पहले निचले स्तरों पर निष्पादन कराने का प्रयास किया जाना चाहिए। सक्षम पदाधिकारी की ओर से तय मुआवजे से असंतुष्ट होने पर आरबिट्रेटर या प्रमंडलीय आयुक्त के यहां वाद दायर करना चाहिए। वहां के निर्णय से असंतुष्ट होने पर जिला न्यायाधीश के समक्ष चुनौती दी जा सकती है। जिला न्यायाधीश के फैसले से असंतुष्ट होने पर हाईकोर्ट में अपील दायर की सा सकती है।
हाईकोर्ट के फैसले से असंतुष्ट होने पर अंतिम व विशेष उपाय के तौर पर सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका दाखिल की जा सकती है। प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्वेता कुमारी सिंह के निर्देश पर एनएचएआई व जिला विधिक सेवा प्राधिकार की ओर से भूमि अधिग्रहण संबंधी प्रावधानों को लेकर शनिवार को आयोजित कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे। कार्यशाला का संचालन एनएचएआई के विधि सहायक ऋषभ रंजन ने किया। जिला विधिक सेवा प्राधिकार की सचिव जयश्री कुमारी ने कहा कि देश के आर्थिक विकास के लिए राजमार्गों का निर्माण आवश्यक है। भूमि अधिग्रहण से प्रभावित रैयतों के अधिकारों की रक्षा व उनके मुआवजा दावा का सम्मानपूर्वक निष्पादन भी उतना ही आवश्यक है। इसमें जिला प्राधिकार की भूमिका महत्वपूर्ण है। उन्होंने पैनल अधिवक्ताओं व पारा लीगल वालेंटियरों को लोगों की इसकी सही जानकारी उपलब्ध कराने का निर्देश दिया। कार्यशाला में सीजेएम राजकपूर, एसीजेएम प्रथम पंकज तिवारी, अवर न्यायाधीश चतुर्थ सह अपर मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी चतुर्थ (पश्चिमी) मृत्युंजय कुमार, अतिरिक्त मुंसिफ (पूर्वी) अजित कुमार, एडवोकेट्स एसोसिएशन के महासचिव उमेश प्रसाद सिंह, एलएडीसी डिप्टी चीफ रामबाबू सिंह, एनएचएआई के परियोजना निदेशक आशुतोष सिन्हा व स्टैंडिंग काउंसल डॉ. मौर्या विजयचंद्र मौजूद थे।
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