
रोने की आदत लगाओगे तो सुख में दुख ढूंढ़कर रोते रहोगे: प्रेमभूषण जी महाराज
मुजफ्फरपुर में आयोजित श्री रामकथा के तीसरे दिन प्रेमभूषण जी महाराज ने बताया कि मनुष्य को सुख-दुख में संतुलित रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि भगवान की कथा जीवन के ताप को दूर करती है और मानव जीवन का उद्देश्य सत्कर्म होना चाहिए। कथा में बड़ी संख्या में भक्तों ने भाग लिया।
मुजफ्फरपुर, हिन्दुस्तान प्रतिनिधि। मनुष्य अपने जीवन में रोने की आदत लगा ले तो वह सुख में भी दुख खोजकर रोता रहेगा। प्रभु श्रीराम के जीवन में इतने कष्ट आए, फिर भी वे प्रसन्न मुद्रा में रहे। हमें प्रभु से प्रेरणा लेकर जीवन में आगे बढ़ते रहना चाहिए। जिला स्कूल के खेल मैदान में आयोजित श्री रामकथा के तीसरे दिन प्रेमभूषण जी महाराज ने व्यासपीठ से कथा वाचन करते हुए यह सीख दी। उन्होंने कहा कि गंगा जी जैसे पाप का हरण कर लेती हैं, इसी प्रकार भगवान की कथा मनुष्य के जीवन के सभी प्रकार के ताप का हरण कर लेती है।
प्रेमभूषण महाराज ने कहा कि सनातन सदग्रंथों में लिखा गया है कि ‘दैहिक, दैविक, भौतिक तापा, रामराज काहू नहीं व्यापा।’ इस कलिकाल में जो भी भगवान में लीन रहेगा उसे कोई पाप और ताप नहीं सताएंगे। उन्होंने श्रीराम जन्म के कारण और जन्मोत्सव से जुड़े प्रसंगों की चर्चा करते हुए कहा कि मनुष्य के रूप में जन्म लेना जीव का सौभाग्य माना गया है। मानव शरीर धारण करने का एकमात्र उद्देश्य सत्कर्म होना चाहिए है। उन्होंने कहा कि मनुष्य का जब कर्म बिगड़ता है तो उसे भोग योनि प्राप्त होती है। भोग योनि में जीव को कर्म का बंधन नहीं लगता है। इसलिए हर रोज थोड़ा-थोड़ा सत्कर्म करना आवश्यक है। मीडिया प्रभारी राजीव केजरीवाल ने बताया कि कथा में बड़ी संख्या में उपस्थित रामकथा के प्रेमी, भजनों का आनन्द लेते हुए झूमते नजर आए। मुख्य यजमान गोविंद प्रसाद भिवानिवाला और इस आयोजन से जुड़ी समिति के सदस्यों ने व्यास पीठ का पूजन किया और भगवान की आरती उतारी।

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