
चारा लगे जालों से खत्म किये जाएंगे लीची पर लगे कीड़े
बीआरएबीयू के पूर्व संकाय अध्यक्ष प्रो. मनेंद्र कुमार ने लीची के पेड़ों को कीड़ों से बचाने के लिए एक नया जाल बनाया है। इस आविष्कार को केंद्र सरकार से पेटेंट मिल चुका है। यह कीट संक्रमण को कम करने और किसानों की आय बढ़ाने में मदद कर सकता है। किसान इसे आसानी से खुद बना सकते हैं।
मुजफ्फरपुर, प्रमुख संवाददाता। बीआरएबीयू में विज्ञान के पूर्व संकाय अध्यक्ष प्रो. मनेंद्र कुमार ने लीची के पेड़ों को कीड़ों से बचाने के लिए चारा लगा जाल बनाया है। इस आविष्कार को केंद्र सरकार से पेटेंट भी मिल गया है। प्रो. मनेंद्र ने बताया कि 28 नवंबर को केंद्र सरकार की ओर से इसका पेटेंट प्रकाशित कर दिया गया है। यह आविष्कार लीची बागानों में कीट संक्रमण कम करने, कीटनाशक उपयोग घटाने और किसानों की आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। किसान चारा लगा जाल खुद ही तैयार कर सकते हैं। इसके लिए एक प्लास्टिक की खाली बोतल में कई जगह छेद कर देना है।
इसके बाद इसमें गुड़ और इस्ट का घोल बनाकर डाल देना है। इस बोतल को लीची के पेड़ों पर कई जगह लगा देना है। प्रो. मनेंद्र ने बताया कि इस बोतल में डले गुड़ और इस्ट के घोल से जो सुगंध निकलेगा उससे आकर्षित होकर लीची को नुकसान पहुंचाने वाले कीड़े उसके अंदर चले जाएंगे और उसमें फंस जाएंगे। इस मिश्रण के सुगंध से कीड़े आकर्षित तो होते हैं पर लंबे समय तक इस सुगंध को बर्दास्त नहीं कर पाते। इसलिए बोतल में जाने के बाद वह उसी में मर जाएंगे। लीची के एक पेड़ पर इस तरह के 10 बोतल लगा दिये जाएं तो कीड़ों से राहत मिल जायेगी। एक पेड़ पर इसे लगाने में किसानों को 350 रुपये तक खर्च आएंगे।

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