लीची की फसलों को कीड़ों से बचाने के लिए बनाया उपकरण
बीआरए बिहार विवि के प्रो. मनेंद्र कुमार ने लीची कीड़ों से बचाने के लिए एक उपकरण बनाया है, जिसका पेटेंट भारत सरकार ने प्रकाशित किया है। इस टार्गेटेड मल्टी-लेयर वायोपेस्टिसाइड सिस्टम का उपयोग कीट नियंत्रण के लिए किया जाएगा, जिससे फलों की गुणवत्ता और उत्पादन में वृद्धि होगी।

मुजफ्फरपुर, प्रमुख संवाददाता। बीआरए बिहार विवि के विज्ञान विषय के पूर्व संकाय अध्यक्ष प्रो. मनेंद्र कुमार ने लीची को कीड़ों से बचाने के लिए उपकरण बनाया है। इसका पेटेंट भारत सरकार ने प्रकाशित किया है। यह उपकरण कीटों को आकर्षित कर उन्हें लीची तक जाने से रोकेगा।प्रो. मनेंद्र ने बताया कि इस उपकरण का नाम टार्गेटेड मल्टी-लेयर वायोपेस्टिसाइड सिस्टम है। यह एक अत्याधुनिक, पर्यावरण-अनुकूल तथा टिकाउ तकनीक उपकरण है, जो लीची बागानों में कीट नियंत्रण के लिए उपयोगी साबित होगा। उपकरण में मौजूद फेरोमोन एवं काईरोमोन आधारित तत्व कीटों को आकर्षित करते हैं। यह उपकरण स्प्रे-रहित तकनीक पर आधारित है, जिसे पेड़ों पर लटकाकर, शाखाओं पर क्लिप के रूप में या जड़ों के पास रखा जा सकता है।
इसके इस्तेमाल से फलों की गुणवत्ता एवं उत्पादन में वृद्धि होगी। बताया कि एक उपकरण पर 150-200 रुपये की लागत लाएगी। एक एकड़ के लीची बगान में 25-30 उपकरण लगाने पर कुल 4000-6000 रुपये खर्च होंगे।
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