बंदरों का बढ़ा आतंक, रेस्क्यू के बाद पुनर्वास मुश्किल

Newswrap हिन्दुस्तान, मुजफ्फरपुर
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मुजफ्फरपुर में बंदरों का आतंक बढ़ रहा है, जिससे लोग परेशान हैं। वन विभाग ने हाल ही में 18 बंदरों का रेस्क्यू किया है, लेकिन उनका पुनर्वास मुश्किल हो रहा है। बंदर फसल और संपत्ति को नुकसान पहुंचा रहे हैं। अधिकारी जंगल में उन्हें छोड़ने में कठिनाई का सामना कर रहे हैं।

बंदरों का बढ़ा आतंक, रेस्क्यू के बाद पुनर्वास मुश्किल

मुजफ्फरपुर। जिले में बंदरों का आतंक बढ़ने से आम लोग परेशान हैं। शिकायत पर वन विभाग के अधिकारी बंदरों का रेस्क्यू कर रहे, पर बंदरों का पुनर्वास मुश्किल हो जा रहा है। इस कारण बड़े पैमाने पर बंदरों का रेस्क्यू नहीं हो पा रहा है। जिले के कई प्रखंडों में तेजी से बंदरों की संख्या बढ़ी है। बंदर फसल, घर के सामान और जान माल तक को क्षति पहुंचा रहे हैं। वन विभाग ने हफ्तेभर में 18 बंदरों का रेस्क्यू किया है। इसमें 17 बंदर औराई और एक सरैया से पकड़ा गया। विभाग के अनुसार वीटीआर से भागकर बेतिया, मोतिहारी की ओर से बंदर पहुंच रहे हैं।

वहीं, पूर्वी क्षेत्र के पूर्णिया, कटिहार की ओर से भी बंदर जिले में पहुंच जा रहे हैं। तिरहुत वन प्रमंडल वन्य अरण्य विहार शेरपुर के वन्य जीव चिकित्सक डॉ. संजीव रंजन ने बताया कि बंदरों के रेस्क्यू से ज्यादा मुश्किल उनका पुनर्वास कराना हो रहा है। बीते एक सप्ताह में टीम ने औराई के बसुआ गांव से 17 और सरैया के गोपी धनवत से एक बंदर का रेस्क्यू किया। बताया कि औराई से पकड़े गए 17 बंदरों को जांच के बाद वीटीआर ले जाया गया। वहां बंदरों को जंगल में छोड़ने पर प्रतिबंध है। बड़ी मुश्किल से वीटीआर के अधिकारी माने और जंगल में 20 किमी भीतर बंदरों को छोड़ा गया। अधिकारियों का कहना था कि जंगल में बाघ और अन्य बड़े मांसाहारी जानवर हैं। भूल से कहीं बाहर का संक्रमित बंदर आ गया तो जंगली जानवर भी संक्रमित हो जाएंगे। डॉ. संजीव ने बताया कि इसी कारण सरैया से रेस्क्यू किए गए बंदर को अरण्य विहार में ही रखा गया है। रेस्क्यू में लगती महंगी बेहोशी की दवा: डॉ. संजीव रंजन ने बताया कि विभाग को बंदरों को पकड़ने के लिए पिंजरा लगाना पड़ता है। उसके बाद भी पकड़ में नहीं आते तो ट्रैक्यूलाइजर गन से बेहोश कर रेस्क्यू किया जाता है। बेहोशी की दवा महंगी होती है। कोट: चीफ वाइल्ड लाइफ अधिकारी से अनुमति लेकर रेस्क्यू किए गए बंदरों को वीटीआर के जंगल में रखा जा सकता है। अगर बंदर चोटिल हो गए हैं तो उनका इलाज किया जाएगा। बगैर अनुमति के बाहर के बंदरों को वीटीआर में रखना मुश्किल है। - नेशामनी के., निदेशक सह संरक्षक, वीटीआर।

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