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विकास के नाम पर जीवों का दोहन कर रहा मानव

विकास के नाम पर जीवों का दोहन कर रहा मानव

प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से सभी जीव एक दूसरे पर आश्रित हैं। एक के खत्म होने से दूसरे जीव को हानि पहुंचती है। मानव के क्रियाकलाप ने जैव विविधता के अस्तित्व के लिए संकट पैदा कर दिया है। विकास के नाम पर मानव जीवों का दोहन कर रहा है। ये बातें रविवार को डॉ. विजय कुमार जायसवाल ने गोला रोड स्थित श्री गांधी पुस्तकालय में आयोजित सेमिनार में कही। श्री केशव प्रसाद अग्रवाल व्याख्यानमाला के तत्वावधान में आयोजित इस सेमिनार में वक्ताओं ने ‘जैव विविधता: संकट एवं संरक्षण विषय पर चर्चा की। शहर के नाला निर्माण पर चिंता भी जताई।

मुख्य वक्ता डॉ. एनपी राय ने कहा कि जीवों में विविधता के कारण जीवों की पहचान होती रही है। सुविधा के नाम पर मानव ने प्रकृति का उपयोग की बजाए दुरुपयोग किया है। पेड़-पौधों के कटने से जो स्थिति बनी है, उससे कोई अनभिज्ञ नहीं है। अध्यक्षता करते हुए डॉ. फूलगेन पूर्वे ने कहा कि आज जल संकट से सभी गुजर रहे हैं। जैव विविधता को नहीं समझने से ऐसा हो रहा है। मानव की वजह से कई प्रजातियां विलुप्त हो चुकी हैं और कई विलुप्त होने के कगार पर है। हमें इन्हें बचाने के लिए अभियान चलाने की जरूरत है। मानव नेअपनी भौतिक जरूरतों की पूर्ति के लिए जैव विविधता से छेड़छाड़ की। तभी से जैव विविधता के लिए संकट पैदा हो गया है। वार्ड पार्षद केपी पप्पू, सूर्यनारायण ठाकुर आदि ने भी अपने विचार रखे।

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  • Web Title:Human being exploiting organisms in the name of development