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उत्तर बिहार में बांस की चचरी पर हिचकोले खा रहा है ‘विकास

उत्तर बिहार में बांस की चचरी पर हिचकोले खा रहा है ‘विकास

मुजफ्फरपुर का कटरा और औराई प्रखंड के दर्जनभर गांव। यहां जिंदगी का स्वभाव भी पानी की तरह तरल है। परिस्थिति के हिसाब से आकार बदल लेता है। देश-दुनिया में बुलेट ट्रेन का शोरगुल है। इस इलाके से ठीक दस किलोमीटर पहले तक लोग फोरलेन पर फर्राटा भर रहे हैं, लेकिन यहां सालोंभर लोग चचरी पर हिचकोले खाते रहते हैं। दरअसल यहां ‘विकास की कहानी जुदा है। बिटिया की पढ़ाई हो, शादी-विवाह हो अथवा बीमार को इलाज के लिए ले जाने वक्त रुह कांपने लगती है। नेता और चुनाव की बात होते ही लोगों के चेहरे पर नाउम्मीदी दिख जाती है। इनकी दिल्ली से लेकर पटना तक सुनता कौन है? मुजफ्फरपुर के कटरा और औराई प्रखंड के कई गांव में 21वीं सदी में भी चचरी पुल पर जिंदगी हिचकोले खा रही है। यह स्थिति उत्तर बिहार के लगभग दर्जनभर जिलों में है।

चंपारण, मिथिलांचल और कोसी इलाके में बागमती, गंडक और कोसी जैसी नदियों की तबाही के बीच बसे दर्जनों गांवों का दर्द कमोबेश एक जैसा है। अब भ्रष्टाचार की इंतहा देखिए। मुजफ्फरपुर के कटरा में चचरी की जगह सरकार ने पुल बनवाना शुरू किया। मगर बालू में सीमेंट से अधिक ‘भ्रष्टाचार मिला दिया। परिणाम, उद्घाटन के पहले ही पुल धंस गया। अब लोगों ने उसी के ऊपर फिर बांस का चचरी पुल बना दिया।

मोबाइल, बिजली-टीवी सब पर बांस की चचरी पर टिकी जिंदगी

मुजफ्फरपुर के कटरा और औराई प्रखंड के कुछ इलाके उत्तर और उत्तर-पूर्व जिलों की पूरी तस्वीर पेश करने के लिए काफी हैं। हर सौ मीटर पर कहीं चचरी का पुल तो कहीं पीपा पुल बने हैं। कटरा का चामुण्डा स्थान देश के प्रसिद्ध सिद्धपीठ मंदिरों में एक है। मंदिर के बगल के गांव बकुची से बागमती और लखनदेई बहती है।

पढ़ाई से लेकर शादी-विवाह में भी संकट

बकुची के रामअवतार साह ने बताया इन गांवों में समृद्धि की कमी नहीं है। नदी बाढ़ लाती है मगर साथ में ‘सोना छोड़ जाती है। बंपर खेती होती है। मगर लड़का वाला कोई शादी करना पसंद नहीं करता है। पहले बारात लाने में दिक्क्त फिर बाद में लड़की को ले जाने में दिक्कत।

इन इलाकों में संकट

मधुबनी : बेनीपट्टी के करहरा गांव समेत मधेपुर प्रखंड के कई गांव चचरी पुल के सहारे हैं

सीतामढ़ी : बेलसंड में तीन चचरी पुलों से 10 गांवों के हजारों लोग प्रभावित हैं।

मधेपुरा : आलमनगर के मुरौत, सरायगढ़ के मरौना में कई जगह चचरी से आवागमन होता है।

समस्तीपुर : बारिश और जलजमाव की स्थिति में चचरी पुल ही एकमात्र उपाय है

पश्चिम चंपारण : वाल्मीकिनगर इलाके में मैनाटांड और मधुरी के बीच चचरी पुल ही विकल्प है।

दरभंगा : कुशेश्वरस्थान इलाके में कमला-बलान तटबंध के पूर्वी हिस्से में कई चचरी पुल हैं।

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