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1 अगस्त, 2020|5:00|IST

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इतिहास विज्ञान नहीं बल्कि एक वैज्ञानिक नजरिया

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आजादी के सात दशक बाद भी यदि शिक्षण संस्थाओं में 1857 की क्रांति को सिपाही विद्रोह, क्रांतिकारियों के द्वारा धन संग्रहण की घटना को काकोरी ट्रेन डकैती कांड, क्रांतिकारियों के लिए आतंकवादी शब्द का प्रयोग और वनवासियों के आंदोलन को आदिवासी विद्रोह के रुप में चित्रित किया जा रहा है तो यह गंभीर चिंता का विषय है। दरअसल, हमारे कतिपय समकालीन इतिहासकारों समीक्षकों और लेखकों द्वारा मौजूदा दौर की घटनाओं की पृष्ठभूमि में स्वतंत्रता संग्राम की सक्रियता को विश्लेषित करने की चूक के कारण खुदीराम बोस, भगत सिंह और अनुशीलन समितियों को नई पीढ़ी के सामने सही ढंग से नहीं रखा जा रहा है।

ये बातें शुक्रवार को चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के इतिहास विभाग की पूर्व अध्यक्ष प्रो अराधना ने कही। वे बीआरए बिहार विवि के इतिहास विभाग की ओर से आधुनिक इतिहास लेखन की चुनौतियां और सुझाव विषय पर वेबिनार में संबोधित कर रही थीं। अध्यक्षता करते हुए एलएनएमयू के इतिहास विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रो. रत्नेश्वर मिश्र ने कहा कि इतिहास विज्ञान नहीं बल्कि एक वैज्ञानिक नजरिया है। क्योंकि इसमें क्रमबद्धता, निरंतरता और प्रमाणिकता साबित करने की बाध्यता रहती है।

वेबिनार के संरक्षक कुलपति प्रो. हनुमान प्रसाद पांडेय ने कहा कि स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद इतिहास लेखन के क्षेत्र में अनवरत होने वाले बदलावों से भारत सहित विश्व के अन्य देशों में वैचारिकी के स्तर पर जो बदलाव आए हैं उससे कई समस्याएं और चुनौतियां खड़ी हो गई हैं। इनका सामना करने के लिए इतिहास लेखन के क्षेत्र में वांछित और प्रयोगमूलक कार्ययोजना की तलाश है। राष्ट्र तथा समाज हित में उसका प्रयोग आज की पहली जरूरत है।

इतिहास विभागाध्यक्ष प्रो. अजीत कुमार ने पेशागत मूल्यों के पालन व शोध संबंधी अनुशासन को प्राथमिकता देने की सिफारिश की। कहा कि यूरोपीय वैचारिकी तथा औपनिवेशिक इतिहास की भ्रांत धारणाओं से मुक्त होकर हमें आत्मबोध और आत्मसम्मान के साथ भारतीय समाज, संस्कृति और परंपराओं की विशिष्टताओं से विश्व और अपनी युवा पीढ़ी को परिचित करवाना होगा। वेबिनार का संचालन डॉ. अंशु त्यागी, संदेश वाचन डॉ. गौतम चंद्रा तथा तकनीकी विषयों का संपादन अमर सुंदरम ने किया। इसमें पूर्व अध्यक्ष प्रो. अर्पणा कुमारी सहित दो सौ से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया।

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  • Web Title:History not science but a scientific perspective