पांडुलिपियों की तलाश में निकला खुदीराम बोस का डेथ वारंट

हिन्दुस्तान, मुजफ्फरपुर
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- शहीद खुदीराम बोस केंद्रीय कारा में सहेज कर रखा गया था दस्तावेज -

पांडुलिपियों की तलाश में निकला खुदीराम बोस का डेथ वारंट

मुजफ्फरपुर, कुंदन कुमार। ऐतिहासिक पांडुलिपियों की तलाश के क्रम में कला संस्कृति विभाग की टीम को महत्वपूर्ण ऐतिहासिक दस्तावेज हाथ लगा है। टीम को शहीद खुदीराम बोस को सुनाई गई फांसी की सजा का आदेश पत्र मिला है। इसे शहीद खुदीराम बोस केंद्रीय कारा में सहेजकर रखा गया था। 13 जुलाई 1908 को मुजफ्फरपुर के अपर सत्र न्यायाधीश द्वारा जारी इस दस्तावेज की लंबे समय से तलाश की जा रही थी। संस्कृति विभाग इसे जल्द ही सार्वजनिक करेगा। ऐतिहासिक पांडुलिपियों की खोज के लिए चल रहे अभियान के क्रम में कला संस्कृति विभाग की टीम केंद्रीय कारा पहुंची थी। इसी क्रम में शहीद खुदीराम का डेथ वारंट टीम के हाथ लगा। यह देश-दुनिया के लिए अब तक अनदेखा था। अंग्रेजी हुकूमत की नींव हिलाने वाले अमर शहीद खुदीराम बोस को मुजफ्फरपुर के अपर सत्र न्यायाधीश ने 13 जून 1908 को फांसी की सजा सुनाई। इस सजा के खिलाफ कोलकाता हाईकोर्ट में अपील की गई। अपील के बाद चीफ जस्टीस लॉरेंस ह्यू जेनकिंस और जस्टिस आशुतोष मुखर्जी की बेंच ने 13 जुलाई 1908 जारी आदेश में फांसी की सजा बरकरार रखी। इसके बाद खुदीराम बोस को मुजफ्फरपुर केंद्रीय कारा में 11 अगस्त 1908 को सुबह तीन बजकर 50 मिनट पर फांसी दे दी गई थी。

मनियारी मठ में मिली गुरुनानक की हस्तलिखित पांडुलिपि

मुजफ्फरपुर के मनियारी मठ में गुरुनानक की हस्तलिखित नौ पांडुलिपियां मिली हैं। इन्हें जिले में मिले सभी दस्तावेजों में सबसे दुर्लभ माना जा रहा है। बताया जाता है कि 15वीं शताब्दी में इस मठ की स्थापना गुरुनानक देव की दूसरी पुत्री चंद जी द्वारा की गई थी। गुरुनानक देव ने अपनी यात्रा के दौरान इस स्थान का चयन किया था। इनके अलावा एक दशम ग्रंथ, एक पंच ग्रंथ और गुरुमुखी लिपि में एक वाल्मीकि रामायण भी सुरक्षित है। वाल्मीकि रामायण तीन सौ वर्ष पुराना है।

मुरौल में पंडित जयकांत झा के घर से मिले ऐतिहासिक संग्रह

मुरौल प्रखंड में पंडित जयकांत झा के निजी पुस्तकालय से भी कई ज्योतिषीय पांडुलिपियां मिली हैं। इन्हें मंत्रालय के ऐप पर अपलोड किया गया है। उनके यहां मिले हस्तलिखित पांडुलिपियों में वाल्मीकि रामायण, कर्मकांड और ज्योतिष से जुड़ी सौ साल पुरानी पाडुलिपि मिली है। यह जयकांत झा उर्फ हजारी पंडित द्वारा हस्तलिखित है। इसके अलावा, मुजफ्फरपुर के रामचंद्र शाही संग्रहालय से भी कला संस्कृति एवं युवा विभाग की टीम को करीब 150 वर्ष पुरानी हस्तलिखित पांडुलिपियां मिली हैं। इनमें मुगल काल व बौद्ध काल आदि से संबंधित महत्वपूर्ण साक्ष्य दर्ज हैं। शहीद खुदीराम बोस केंद्रीय कारागार में मिले दस्तावेजों में 118 वर्ष पुरानी विचाराधीन एवं सजावार कैदियों की सूची भी शामिल है।

सामने आई 7.75 लाख पांडुलिपियों में से 1.18 लाख महत्वपूर्ण

मुजफ्फरपुर, विशेष संवाददाता। राज्य में 16 मार्च से शुरू पांडुलिपि संग्रह अभियान में आए 7.75 लाख दस्तावेजों में से जांच के बाद 6.57 लाख दस्तावेज रिजेक्ट कर दिए गए हैं। अब तक आए तमाम दस्तावेजों में कला संस्कृति एवं युवा मंत्रालय को बिहार से कुल 1.18 लाख दस्तावेज ही वास्तव में पांडुलिपि के रूप में मिले हैं, जो न केवल हस्तलिखित है, बल्कि देश व बिहार के इतिहास की दुर्लभ पांडुलिपियां साबित हुई हैं। कला संस्कृति एवं युवा मंत्रालय ने पांच मई तक मिले तमाम दस्तावेजों की रिपोर्ट जारी करते हुए बताया है कि बिहार से मिले 775652 दस्तावेजों में से 657625 दस्तावेज बेकार पाए गए हैं।

मंदिर की तस्वीर और जमीन के दस्तावेज हो रहे अपलोड

देश भर में बिखरी हुई ऐतिहासिक पांडुलिपियों के संरक्षण के लिए कला संस्कृति एवं युवा मंत्रालय ने ज्ञान भारतम ज्ञान ऐप जारी कर रखा है। इस ऐप पर आम लोगों से भी 75 साल से अधिक पुरानी पांडुलिपियां अपलोड करने का आह्वान किया गया है। जानकारी के अभाव में लोग मंदिर की तस्वीर और जमीन के पुराने दस्तावेज, जो कैथी लिपि में लिखे हैं, उन्हें भी अपलोड कर रहे हैं। यही कारण है कि सूबे में अब जांचे गए कुल पांडुलिपियों में से 657625 को रद्द करना पड़ा है। सूबे के सभी जिलों की जो रिपोर्ट जारी की गई है, उसमें बताया गया है कि कला संस्कृति विभाग की टीम अब तक 3621 स्थलों पर जाकर जांच की तो वहां पांडुलिपि की जानकारी गलत निकली।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

शहीद खुदीराम बोस को कब फांसी की सजा सुनाई गई थी?
शहीद खुदीराम बोस को 13 जून 1908 को फांसी की सजा सुनाई गई थी।
Kundan Kumar

लेखक के बारे में

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शॉर्ट बायो: कुंदन कुमार पिछले 21 साल से पत्रकारिता कर रहे हैं। वर्तमान समय में हिन्दुस्तान के सिटी टीम का नेतृत्व बतौर चीफ रिपोर्टर कर रहे हैं।

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कुंदन ने अपने करियर की शुरुआत 2005 में प्रभात खबर से की थी। उन्होंने राष्ट्रीय सहारा में भी काम किया और सिटी केबुल में बतौर न्यूज एंकर काम किया है।

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कुंदन B.Sc (केमेस्ट्री) और मास कम्युनिकेशन में डिप्लोमाधारी हैं। प्रशासनिक खबरों पर मजबूत पकड़ के कारण सरकारी योजनाओं, आदेश निर्देश आदि की अच्छी परख है और इसपर इन्होंने बेहतरीन काम किया है।

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