
पीएचसी में एक टांका तक नहीं लगता, किया जाता रेफर
मुजफ्फरपुर में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (पीएचसी) और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (सीएचसी) में मरीजों को उचित प्राथमिक चिकित्सा नहीं मिल रही है। गंभीर चोटों के मरीजों को टांका लगाने के बजाय रेफर किया जा रहा है। मेडिकल कॉलेज में मरीजों की भीड़ के कारण इलाज में कठिनाई आ रही है। स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही के बावजूद स्थिति को सामान्य बताया जा रहा है।
मुजफ्फरपुर, प्रमुख संवाददाता। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (सीएचसी) में मरीज को ठीक से प्राथमिक चिकित्सा तक नहीं मिल रहा। सिर फटने या अन्य गहरे जख्म वाले मरीजों के पहुंचने पर उन्हें एक टांका तक नहीं लगाया जाता है। सिर्फ ड्रेसिंग कर उन्हें रेफर कर दिया जाता है। इधर, एसकेएमसीएच में मरीजों की भीड़ से रोज अफरातफरी की स्थिति रहती है। इमरजेंसी फुल रहने से फर्श और स्ट्रेचर तक पर इलाज होता है। इन सब कुछ के बावजूद सीएस के मुताबिक सब ठीक है। कहीं से शिकायत नहीं आई है। पीएचसी में सर्जन और पारा मेडिकल स्टाफ की कमी के कारण घायल मरीजों को मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया जा रहा है।

पीएचसी से लगातार ऐसे मामले सामने आ रहे हैं। जिले के कई पीएचसी और सीएचसी में ड्रेसर की कमी है। पारा मेडिकल स्टाफ भी नहीं हैं। ड्रेसर नहीं होने से घायल मरीजों के इलाज में परेशानी आ रही है। हालात ऐसे हैं कि हाथ-पैर टूटने पर प्लास्टर करने तक का भी प्रबंध नहीं है। पीएचस में ऑर्थो के डॉक्टर नहीं होते हैं। माइनर ऑपरेशन थियेटर में सभी दवाएं और इंफेक्शन कंट्रोल के सामान नहीं होने से भी मरीजों को पीएचसी से रेफर कर दिया जाता है। हर दिन मेडिकल कॉलेज पहुंच रहे दर्जनों रेफर केस श्रीकृष्ण मेडिकल कॉलेज में हर दिन पीएचसी और सीएचसी से दर्जनों रेफर केस पहुंच रहे हैं। पीएचसी में मरीजों को ड्रेसिंग कर भेज दिया जाता है। श्रीकृष्ण मेडिकल कॉलेज के मेडिसिन विभाग की डॉ. नेहा ने बताया कि हार्ट अटैक जैसे गंभीर मरीजों को भी सीधा मेडिकल कॉलेज के इमरजेंसी में रेफर कर दिया जाता है। केस : 1 मुशहरी सीएचसी में दुर्घटना में घायल एक मरीज को पैर में कार्टन बांधकर मेडिकल रेफर कर दिया गया था। इस घटना की तस्वीर वायरल होने के बाद बाद आनन-फानन स्वास्थ्य विभाग की तरफ से दोषी पर कार्रवाई की गई। केस : 2 औराई सीएचसी में इमरजेंसी में टॉर्च की रोशनी में घायल मरीज का फोर्थ ग्रेड के द्वारा इलाज करने की बात सामने आ चुकी है। इस मामले में भी काफी शोर शराबा हुआ था, जिसके बाद विभाग ने कार्रवाई के लिए लिखा था। ::कोट सभी पीएचसी में माइनर ओटी काम कर रही है। इलाज की हर सुविधा उपलब्ध है। अगर कहीं से लापरवाही की शिकायत जाएगी तो कार्रवाई की जाएगी। - डॉ. अजय कुमार, सिविल सर्जन

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