40 बेड से कम वाले अस्पतालों का नहीं होगा भौतिक सत्यापन
- स्वास्थ्य विभाग के राज्य मुख्यालय ने जारी की इसकी अधिसूचना - 40 से कम

मुजफ्फरपुर, प्रमुख संवाददाता। राज्य में अब 40 बेड से कम वाले अस्पतालों को लाइसेंस देने के लिए उसका भौतिक सत्यापन नहीं किया जाएगा। स्वास्थ्य विभाग मुख्यालय ने इसकी अधिसूचना जारी कर दी है।
लाइसेंस देने की प्रक्रिया
विभाग ने कहा है कि सिर्फ सारे जरूरी कागजात देखने के बाद अस्पतालों को लाइसेंस दे दिया जाएगा। हालांकि, विभाग ने एक नियम और भी लगा दिया है। ऐसे अस्पताल का लाइसेंस एक वर्ष के लिए ही मिलेगा और लाइसेंस अवधि अधिकतम दो बार ही विस्तारित हो सकेगी। अगर कोई अस्पताल स्थायी मान्यता लेना चाहता है तो तीन वर्ष के भीतर उसे आवेदन करना होगा।
कमेटी का गठन
अस्पतालों को लाइसेंस देने के लिए एक कमेटी बनायी जाएगी। इस कमेटी के अध्यक्ष सीएस होंगे। कमेटी में आईएमए के एक सदस्य और देसी चिकित्सा अधिकारी भी सदस्य होंगे। इन अस्पतालों की जांच से पहले अधिकारियों को दौरे की तारीख और निरीक्षण का कारण भी बताना होगा।
प्रसाद हॉस्पिटल के 12 वर्ष के रिन्यूअल की हो रही जांच :
मुजफ्फरपुर, प्रमुख संवाददाता।
प्रसाद हॉस्पिटल की जांच
आईसीयू अग्निकांड में मरीजों की मौत के बाद प्रसाद हॉस्पिटल के 12 वर्षों के लाइसेंस रिन्यूअल की जांच शुरू की गई है। जिला प्रशासन की मांग पर जिला स्वास्थ्य विभाग प्रसाद हॉस्पिटल के हर वर्ष के रिन्यूअल के दस्तावेज खोज रहा है। स्वास्थ्य विभाग के नियम के अनुसार निजी अस्पतालों को हर साल रिन्यूअल के लिए फार्म भरना पड़ता है। इस फार्म में अस्पतालों को फायर, प्रदूषण और बायोमेडिकल वेस्ट निस्तारण आदि की रिपोर्ट देनी होती है। इसके अलावा कितने मरीज भर्ती हो रहे हैं और कितने डॉक्टर वहां कार्यरत हैं, इसकी भी जानकारी फार्म में देनी होती है। जिला प्रशासन के निर्देश के बाद सीएस कार्यालय में इसकी फाइल तैयार की जा रही है। फाइल जिला प्रशासन के पास भेजी जाएगी। यह रिपोर्ट भी प्रसाद हॉस्पिटल में हो रही जांच के साथ जोड़ी जाएगी। प्रसाद हॉस्पिटल का रजिस्ट्रेशन वर्ष 2014 में हुआ था। आईसीयू अग्निकांड की जांच के लिए सोमवार सुबह से ही सीएस कार्यालय में फाइलें तैयार की जाती रहीं। सीएस डॉ सुधीर कुमार ने बताया कि अभी जांच चल रही है। फिर से प्रसाद हॉस्पिटल जाकर सारे दस्तावेजों की जांच की जाएगी और कर्मचारियों से इस मामले में जानकारी ली जाएगी।
डॉक्टर की ड्यूटी की जांच
डॉक्टर की बंदरा पीएचसी में ड्यूटी की होगी जांच :
प्रसाद हॉस्पिटल में काम करने वाले डॉक्टर बंदरा पीएचसी में ओपीडी में काम करते थे या नहीं, इसकी भी जांच की जाएगी। स्वास्थ्य विभाग की ओर से बनाई गई टीम इसकी जांच करेगी। जांच टीम बंदरा पीएचसी प्रभारी से डॉक्टर के ओपीडी और आईपीडी ब्योरा मांगेगी। इसके अलावा डॉक्टर प्रसाद हॉस्पिटल से वेतन ले रहा था या नहीं और वहां वेतन से उसका पीएफ कट रहा है या नहीं, इसकी भी जांच की जाएगी। बंदरा पीएचसी की रिपोर्ट के आधार पर ही डॉक्टर पर स्वास्थ्य विभाग कार्रवाई करेगा। प्रसाद हॉस्पिटल मामले में गिरफ्तार डॉक्टर के बंदरा पीएचसी में पदस्थापित होने की बात सामने आई है।
सील अस्पतालों की जांच
सील हुए 25 निजी अस्पतालों के नक्शे की होगी जांच :
प्रसाद हॉस्पिटल अग्निकांड के बाद जिला प्रशासन की कार्रवाई में सील हुए 25 निजी अस्पतालों के नक्शे की जांच की जाएगी। जिला प्रशासन की तरफ से जिला स्वास्थ्य विभाग को सील अस्पतालों की सूची भेज दी गई है। स्वास्थ्य विभाग अब अपने स्तर से इन अस्पतालों की जांच करेगा। जांच में देखा जाएगा कि अस्पताल क्लीनिकल स्टैबलिस्टमेंट एक्ट के मानक के अनुसार थे या नहीं। अस्पतालों को फायर सेफ्टी का प्रमाण पत्र मिला था या नहीं। इमरजेंसी और आईसीयू मानक के अनुसार थे या नहीं। कितने डॉक्टर यहां काम करते थे, कितने पारा मेडिकल स्टाफ की ड्यूटी थी। इस जांच के बाद विभाग इन अस्पतालों पर कार्रवाई करेगा।


