मुजफ्फरपुर के पानी में नाइट्रेट अधिक, ब्लू बेबी सिंड्रोम का खतरा

Jan 20, 2026 05:51 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, मुजफ्फरपुर
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मुजफ्फरपुर सहित 30 जिलों में भूजल की गुणवत्ता चिंताजनक है। रिपोर्ट में नाइट्रेट की मात्रा सुरक्षित सीमा से अधिक पाई गई है, जिससे बच्चों में ‘ब्लू बेबी सिंड्रोम’ का खतरा है। मधुबनी और शिवहर में आर्सेनिक की मौजूदगी भी चिंताजनक है। सुरक्षित पेयजल और भूजल संरक्षण के उपायों पर जोर दिया जा रहा है।

मुजफ्फरपुर के पानी में नाइट्रेट अधिक, ब्लू बेबी सिंड्रोम का खतरा

मुजफ्फरपुर, वरीय संवाददाता। मुजफ्फरपुर समेत सूबे के 30 जिलों में भूजल की गुणवत्ता को लेकर चिंताजनक संकेत सामने आए हैं। इन जिलों के भूजल में नाइट्रेट की मात्रा सुरक्षित सीमा से अधिक पाई गई है। इसके अलावा, मधुबनी और शिवहर सहित चार जिलों के भूजल में आर्सेनिक की मौजूदगी पाई गई है। यह केंद्रीय भूजल बोर्ड (सीजीडब्ल्यूबी) की बीते माह आई रिपोर्ट में सामने आया है। रिपोर्ट में बताया गया है कि भूजल में नाइट्रेट की अधिकता से बच्चों में ‘ब्लू बेबी सिंड्रोम’ का खतरा है। वहीं, लंबे समय तक आर्सेनिक युक्त पानी पीने से आर्सेनिकोसिस हो सकता है। इससे फेंफड़े में दिक्कत आने लगती है।

सांस लेने में तकलीफ होती है और दम घुटने लगता है। इन जिलों में पानी में नाइट्रेट की अधिकता: रिपोर्ट के अनुसार, मुजफ्फरपुर, पटना, वैशाली, समस्तीपुर, सीतामढ़ी, सारण, सीवान, पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, मधुबनी, दरभंगा, गया, भोजपुर, बक्सर, औरंगाबाद सहित 30 से अधिक जिलों में नाइट्रेट की मात्रा 45 मिलीग्राम प्रति लीटर की सीमा से अधिक पाई गई है। कुल 584 नमूनों में से 78 नमूने (13.36 प्रतिशत) में नाइट्रेट की मात्रा सीमा से अधिक मिली है। इस संबंध में मोतीपुर डिवीजन के कार्यपालक अभियंता अमित स्टीफन ने बताया कि उन तक यह रिपोर्ट अभी नहीं पहुंची है। सुरक्षित पेयजल, नियमित निगरानी, वर्षा जल संचयन और भूजल संरक्षण के उपायों पर विभाग लगातार काम कर रहा है। इन जिलों में आर्सेनिक की स्थिति चिंताजनक: मधुबनी और शिवहर के अलावा भोजपुर व बक्सर जिले में आर्सेनिक की मौजूदगी चिंताजनक है। इन चार जिलों से आर्सेनिक की जांच को लिए गए 13 नमूनों में से 6 नमूने (46.15 प्रतिशत) में इसकी मात्रा 10 पीपीबी से अधिक पाई गई। इससे बचाव के लिए घर पर आर्सेनिक हटाने वाले वाटर फिल्टर का उपयोग करने या सुरक्षित स्रोत से पानी का सेवन करने की सलाह दी गई है। सीजीडब्ल्यूबी की यह रिपोर्ट जल शक्ति मंत्रालय के अधीन तैयार की गई है। नाइट्रेट की अधिकता से नीली पड़ जाती बच्चों की त्वचा: एसकेएमसीएच के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. जेपी मंडल ने बताया कि पीने के पानी में नाइट्रेट की अधिक मात्रा स्वास्थ्य के लिए काफी नुकसानदेह है। खासकर छह माह से कम उम्र के बच्चे इससे अधिक प्रभावित होते हैं। उनका होंठ, त्वचा और नाखून नीला पड़ने लगता है। नाइट्रेट से होने वाली बीमारी को मेथेमोग्लोबिनेमिया या ‘ब्लू बेबी सिंड्रोम’ कहते हैं। इसमें शरीर में नाइट्रेट, नाइट्राइट में बदलकर खून की ऑक्सीजन ले जाने की क्षमता को घटा देता है। सांस लेने में परेशानी, कमजोरी और सुस्ती इसके प्रमुख लक्षण हैं।

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