प्रदूषण से होने वाली बीमारियों के लिए अस्पतालों में बनेंगे अलग ब्लॉक
एक्सक्लूसिव: - केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने जारी किया निर्देश - सेंटिनल अस्पताल

मुजफ्फरपुर, प्रमुख संवाददाता/मृत्युंजय। प्रदूषण से होने वाली बीमारियों के इलाज के लिए सभी सरकारी अस्पतालों में अलग ब्लॉक बनाए जाएंगे। इसका नाम सेंटिनल अस्पताल होगा। केंद्रीय स्वास्थ्य व परिवार कल्याण मंत्रालय ने सभी राज्यों को इसका निर्देश दिया है। मंत्रालय ने प्रदूषण से होने वाली बीमारियों से निपटने के लिए विस्तृत एक्शन प्लान बनाते हुए राज्यों को इसके अनुसार काम करने को कहा है। इन सेंटिनल अस्पतालों में प्रदूषण जनित बीमारियों पर नजर रखने के लिए एक नोडल डॉक्टर की तैनाती होगी। इसके अलावा, अस्पताल में हर दिन किस तरह के मरीज आए इसकी रिपोर्ट भी तैयार की जाएगी। प्रदूषण से होने वाली बीमारियों के इलाज के लिए डॉक्टरों और नर्सों को ट्रेनिंग भी दी जाएगी।
प्रदूषण से बीमार मरीजों की संख्या बढ़ी एसकेएमसीएच के मेडिसिन विभाग की डॉ. नेहा ने बताया कि बीते एक साल में प्रदूषण से बीमार पड़ने वालों की संख्या में 20 से 30 प्रतिशत तक इजाफा हुआ है। ठंड के अलावा गर्मी में भी मेडिकल कॉलेज में प्रदूषण के कारण सांस की बीमारी से पीड़ित मरीज पहुंच रहे हैं। डॉ. नेहा ने बताया कि बड़ों के साथ बच्चे भी प्रदूषण के कारण दमा और एलर्जी के शिकार हो रहे हैं। गर्भवती महिलाएं भी बड़ी संख्या में प्रदूषण से प्रभावित हो रही हैं। स्वास्थ्य विभाग एक्यूआई पर रखेगा नजर केंद्रीय स्वास्थ्य व परिवार कल्याण मंत्रालय ने प्रदूषण से होने वाली बीमारियों पर अंकुश लगाने के लिए स्वास्थ्य विभाग अपने शहर के एक्यूआई पर नजर रखने का निर्देश दिया है। एक्यूआई बढ़ने पर सेंटिनल अस्पताल को अलर्ट मोड में रखा जाएगा। इसके अलावा लोगों को प्रदूषण के बचाव के लिए जागरूक भी किया जाएगा। इसकी जिम्मेदारी आशा कार्यकर्ताओं को दी गई है। बढ़ते एक्यूआई के बारे में स्वास्थ्य विभाग का आईडीएसपी हर दिन रिपोर्ट करेगा। अस्पतालों में चेस्ट क्लीनिक भी बनेंगे मंत्रालय ने सभी राज्यों को अस्पतालों में चेस्ट क्लीनिक भी बनाने को कहा है। मंत्रालय का कहना है कि प्रदूषण से सबसे ज्यादा असर फेफड़ों पर पड़ता है, इसलिए सभी सरकारी अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों में चेस्ट क्लीनिक खोले जाएंगे। मंत्रालय ने निर्देश दिया है कि सभी अस्पतालों में सांस संबंधी बीमारी की दवाएं, फेफड़ों से जुड़ी बीमारियों की दवाएं अनिवार्य रूप से मौजूद रहें। यह दवाएं हैं या नहीं इसकी मॉनिटरिंग भी की जाए। चेस्ट अस्पतालों में आने वाले मरीजों में प्रदूषण से क्या-क्या परेशानी हुई है, इसकी स्क्रीनिंग भी की जाएगी।

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