
टीबी की गिरफ्त में देश के 87 हजार 539 बच्चे
एक्सक्लूसिव: - केंद्रीय स्वास्थ्य व परिवार कल्याण मंत्रालय ने जारी की रिपोर्ट - टीबी की
मुजफ्फरपुर, प्रमुख संवाददाता/मृत्युंजय। टीबी उन्मूलन के लिए सरकार निक्षय योजना चला रही है। इसके जनप्रतिनिधि से लेकर आम लोग तक टीबी मरीजों को गोद लेकर छह महीने तक खाने की थाली (फूड बास्केट) दी जाती है। इस फूड बास्केट में पोषण युक्त चीजें जैसे मूंगफली, तेल, अंडा, दाल जैसी चीजें दी जाती हैं। योजना के तहत देश भर में 17,782 जनप्रतिनिधियों ने टीबी मरीजों को गोद लिया है, लेकिन मुजफ्फरपुर जिले के किसी भी जनप्रतिनिधि ने एक भी मरीज को गोद नहीं लिया है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की रिपोर्ट बताती है कि बिहार में सिर्फ 86 जनप्रतिनिधियों ने टीबी मरीजों को निक्षय योजना के तहत गोद लिया है।
साथ ही 36 राजनीति दलों ने भी निक्षय योजना से टीबी मरीजों को गोद लिया है। रिपोर्ट में मुजफ्फरपुर से एक भी जनप्रतिनिधि के टीबी मरीजों को गोद लेने की जानकारी नहीं है। हालांकि, अन्य लोगों द्वारा 124 टीबी मरीजों को गोद लिया गया है। मुजफ्फरपुर में 7240 मरीज टीबी के इलाज में केंद्रीय स्वास्थ्य विभाग के निक्षय पोर्टल के अनुसार मुजफ्फरपुर जिले में 7240 मरीज टीबी की दवा खा रहे हैं। बिहार में 1 लाख 43 हजार 812 मरीजों का इलाज चल रहा है। पूरे देश में 15 लाख 82 हजार 144 मरीज टीबी का इलाज करा रहे हैं। बिहार के पड़ोसी राज्य झारखंड में 44 हजार 494 मरीज तो उत्तर प्रदेश में 4 लाख 37 हजार 427 टीबी के मरीज हैं। टीबी की गिरफ्त में देश के 87 हजार 539 बच्चे टीबी की गिरफ्त में देशभर के 87 हजार 539 बच्चे हैं। इन बच्चों की उम्र 14 वर्ष तक है। केंद्रीय स्वास्थ्य व परिवार कल्याण मंत्रालय ने इसकी रिपोर्ट अपनी निक्षय योजना की वेबसाइट पर जारी की है। बिहार में 11 हजार 561 और मुजफ्फरपुर में 503 बच्चे टीबी का इलाज करा रहे हैं। मुजफ्फरपुर के जिला संक्रामक नियंत्रण पदाधिकारी डॉ सीके दास ने बताया कि छोटे बच्चों में फेफड़े और गले के ग्लैंड की टीबी की शिकायत ज्यादा मिल रही है। बच्चों को अगर लगातार सर्दी-खांसी और बुखार हो और वजन नहीं बढ़े तो उसकी टीबी की जांच करानी चाहिए। अगर घर में किसी को टीबी है तो उससे बच्चों को अलग रखना चाहिए। बचाव के लिए सभी को नहीं लगा बीसीजी का टीका टीबी से बचाने वाला बीसीजी का टीका बिहार में सभी बच्चों को नहीं लग पा रहा है। स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा में यह बात सामने आ चुकी है। विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2024-25 में बिहार में 20 फीसदी बच्चों को बीसीजी का टीका नहीं लगा था तो वर्ष 2025-26 के जून तक 59 प्रतिशत बच्चों को ही बीसीजी का टीका लगा था।

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