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बजट 1 :: जिले के 500 से अधिक कतिन, बुनकर व रंगरेज के बहुरेंगे दिन

बजट 1 :: जिले के 500 से अधिक कतिन, बुनकर व रंगरेज के बहुरेंगे दिन

संक्षेप:

2000 के बाद खादी वस्त्र उद्योग में आमदनी बढ़ाने के प्रयास नहीं हुए, जिससे पलायन बढ़ा। अब केंद्र सरकार ने बजट में खादी के लिए प्रावधान किए हैं। नई योजनाएं कतिन, बुनकर और रंगरेजों को आर्थिक लाभ देने के लिए प्रस्तावित हैं। इससे वैश्विक बाजार में खादी की स्थिति मजबूत होगी और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।

Feb 02, 2026 07:37 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, मुजफ्फरपुर
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मुजफ्फरपुर, वरीय संवाददाता। वर्ष 2000 के बाद खादी के वस्त्र तैयार करने वाले कतिन, बुनकर और रंगरेजों की आमदनी को बढ़ाने का कोई प्रयास नहीं हुआ। इससे खादी के पारंपरिक व्यवसाय को छोड़ नौकरी के लिए बड़ी संख्या में लोग पलायन करने लगे। लेकिन इस बार केंद्र सरकार ने अब बजट में खादी को बढ़ावा देने, रोजगार के साथ बाजार को बड़ा करने के लिए प्रावधान किया है। इससे कतिन, बुनकर और रंगरेजों के दिन बहुरनें की संभावना है। देश में वस्त्र उद्योग को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने पांच योजनाओं के एक एकीकृत कार्यक्रम का प्रस्ताव किया है। इसके अलावा खादी को बढ़ावा देने के लिए महात्मा गांधी ग्राम स्वराज योजना भी शुरू की जाएगी।

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इसके साथ ही कतिन, बुनकर और रंगरेज के उत्थान के लिए राष्ट्रीय हथकरघा स्कीम 2.0 शुरू करना प्रस्तावित है। इससे खादी, हैंडलूम, हैंडीक्राफ्ट से जुड़े पेशवेरों के आर्थिक विकास को गति मिलेगी। मिल सकेगा आसान शर्तों पर लोन : अर्थशास्त्री डॉ. अंजना ने बताया कि खादी और हैंडलूम घर-घर से जुड़ा है। इसके लिए सरकार का प्रावधान सराहनीय है। जिले के मुशहरी, सकरा, औराई, कुढ़नी, कांटी, बंदरा प्रंखड के 500 से अधिक कतिन, बूनकर और रंगरेजों को सीधे तौर पर लाभ मिलेगा। डॉ. अंजना ने बताया कि इस स्कीम के अंतर्गत आसान ब्याज और किस्तों पर लोन की सुविधा मिलेगी। मशीनरी के साथ व्यापार के लिए उचित बाजार भी उपलब्ध कराया जाएगा। वैश्विक बाजार में जगह बनाने में मिलेगी मदद : अर्थशास्त्री सह शिक्षक तरुण कुमार ने कहा कि खादी, हथकरघा और हस्तशल्पि क्षेत्र इस नई योजना से मजबूत होगा। खादी, हैंडलूम को वैश्विक बाजार में जगह बनाने और ब्रांडिंग में मदद मिलेगी। इससे प्रशक्षिण, कौशल, प्रक्रिया और उत्पादन गुणवत्ता को सुसंगत बनाया जाएगा। सरकार से सहायता भी मिलेगी। इस पहल से बुनकरों, ग्रामीण उद्योगों, ‘एक जिला एक पहल’ और ग्रामीण युवाओं को निश्चित तौर पर लाभ मिलेगा। उनकी आर्थिक स्थिति सुधारेगी। इससे उनका जीवन और कार्यशैली पर सकारात्मक प्रभाव दिखेगा। टेक्सटाइल यूनिटें के स्थापना को खुलेगा आसान राह : अर्थशस्त्री डॉ. अरुण कुमार सुमन ने कहा कि मेगा टेक्सटाइल पार्क से मुजफ्फरपुर समेत उत्तर बिहार में बड़ा स्कोप है। मुजफ्फरपुर के बेला औद्योगिक क्षेत्र में स्थित टेक्सटाइल क्लस्टर में कार्यरत महिलाओं और पुरूष को वस्त कौशल विकास के लिए प्रोत्साहन मिलेगा। साथ ही बड़े उद्योग के स्थापना के लिए भी ‘समर्थ 2.0’ योजना अंतर्गत लोन और अन्य सुविधाएं सरकारी स्तर पर उपलब्ध होगा। टेक्सलाइल यूनिटों के स्थापना के लिए राहे आसान होगी। बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। मालूम हो कि वर्तमान में सिर्फ मुजफ्फरपुर के बेला औद्योगिक क्षेत्र में 225 से अधिक टेक्सटाइल यूनिटें है। जहां 7000-8000 लोगों को रोजगार मिल रहे है।