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Lok Sabha Election 2019: जॉर्ज के रणबांकुरों ने सिम से बदली थी चुनावी फिजां

Lok Sabha Election 2019:  जॉर्ज के रणबांकुरों ने सिम से बदली थी चुनावी फिजां

जेल से चुनाव लड़ रहे जॉर्ज फर्नांडिस का 1977 में हर कोई दीवाना था। अधिकतर लोगों ने उनको देखा तक नहीं था। सिर्फ इतना सुना था कि वे बड़े मजदूर नेता हैं। पूरे देश में रेल का चक्का जाम कर दिया था। ‘जेल का ताला टूटेगा, जॉर्ज हमारा छूटेगा के नारे पर लोगों ने उन्हें देखे बगैर संसद में पहुंचा दिया। बाद के चुनावों में भी जॉर्ज बहुत कम दिन के लिए अपने क्षेत्र में प्रचार करने आते थे। सारी जवाबदेही कार्यकर्ताओं के कंधों पर होती थी।

जॉर्ज के चुनाव अभियान को याद करते हुए सामाजिक कार्यकर्ता मेहदी हसन कहते हैं, मैंने कल्पना में भी नहीं सोचा था कि इतने बड़े लीडर का चुनाव कार्य संभालने का मौका मुझे मिलेगा। 2004 में जब ऐसा हुआ तो मैं तो हतप्रभ हो गया। वैसे, मैं 77 से ही उनके चुनाव प्रचार शामिल रहता था।

बूथ कैप्चरिंग रोक सका

60 वर्षीय मेहदी हसन बताते हैं कि जगदीश देशमुख दा (जॉर्ज के निजी सचिव व मजदूर नेता) से बहुत आरजू मिन्नत की तो वे सभी प्रखंडों के लिए दो-दो मोटर साइकिल का इंतजाम करवाये। एक साथ सौ मोबाइल सिम मिले तो कार्यकर्ताओं के प्रचार कार्य को बल मिला। मोबाइल की बदौलत बूथ कैप्चरिंग पर हम नकेल कसने में बहुत हद तक कामयाब रहे। जार्ज ने विपरीत लहर में यहां से चुनाव जीता। जॉर्ज साहब खुद कमलू बाबू की जीप से अपना चुनाव प्रचार करते थे।

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  • Web Title:George s Ranbankuro had changed from SIM to electoral campaign